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लालू यादव के नरम पड़े सुर पर कांग्रेस नेताओं के तेवर तल्ख, कहा- अभद्रता-अशिष्टता ही उनकी पूंजी

लालू यादव के नरम पड़े सुर पर कांग्रेस नेताओं के तेवर तल्ख, कहा- अभद्रता-अशिष्टता ही उनकी पूंजी

लाल यादव के बयान पर कांग्रेस नेता मदन मोहन झा व अनिल शर्मा की तीखी टिप्पणी.

लाल यादव के बयान पर कांग्रेस नेता मदन मोहन झा व अनिल शर्मा की तीखी टिप्पणी.

Bihar Politics: आरजेडी कांग्रेस के बीच भविष्य में गठबंधन पर मदन मोहन झा ने कहा कि फिलहाल गठबंधन पूरी तरह से टूट चुका है. आगे क्या होगा इसका फैसला आलाकमान करेगा. मदन मोहन झा ने लालू यादव के इस बयान पर कि कांग्रेस केंद्र के लिए सही है इस पर मदन मोहन झा ने कहा कि आप केंद्र में मानते हैं इसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन बिहार के नेताओं को इस तरह से कहना उचित नहीं है.

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पटना. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास (Congress in-charge Bhakt Charan Das) पर पूछे गए एक सवाल पर उन्हें ‘भकचोन्हर’ शब्द का प्रयोग क्या किया बिहार की सियासत गर्मा गई. कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया काफी तल्ख रही और लगातार इस पर नेताओं के बयान आ भी रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा (Bihar Pradesh Congress President Madan Mohan Jha) ने लालू यादव के इस बयान को अनुचित करार देते हुए कहा है कि राजद नेता को यह समझ लेना चाहिए कि बिना कांग्रेस के कुछ भी नहीं हो सकता है. आरजेडी जब -जब सत्ता में आई है तो कांग्रेस की मदद से आई है. आगे जब कांग्रेस मदद करेगी तभी आएंगे वे सत्ता में आएंगे.

आरजेडी कांग्रेस के बीच भविष्य में गठबंधन पर मदन मोहन झा ने कहा कि फिलहाल गठबंधन पूरी तरह से टूट चुका है. आगे क्या होगा इसका फैसला आलाकमान करेगा. मदन मोहन झा ने लालू यादव के इस बयान पर कि कांग्रेस केंद्र के लिए सही है इस पर मदन मोहन झा ने कहा कि आप केंद्र में मानते हैं इसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन बिहार के नेताओं को इस तरह से कहना उचित नहीं है. प्रदेश स्तर पर जहां काम होगा वहां उनसे बात करनी होगी. वहां सहमति लेनी होगी. इस के बावजूद हम कहेंगे आलाकमान निर्णय करेगा.

बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास के पर लालू यादव के दिए बयान और कांग्रेस को भाव नहीं देने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल शर्मा ने कहा है कि लोगों को महागठबंधन में दरार का तात्कालिक कारण कन्हैया कुमार में दिख रहा है, लेकिन सच्चाई कुछ और है. लालू प्रसाद को कांग्रेस से नाराजगी उस दिन से है जब यूपीए दोबारा सरकार में आई और उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.  नाराजगी उस बात की है जब मनमोहन सिंह सरकार ने अध्यादेश लाकर उन्हें जेल जाने से बचाने का काम नहीं किया.

अनिल शर्मा ने कहा कि नाराजगी उस बात की भी है कि 2015 के चुनाव में महागठबंधन की सरकार में 81 सीटें लाने के बावजूद कांग्रेस ने तेजस्वी को सीएम नहीं बनने दिया. 1 सीट वाले नीतीश कुमार को समर्थन देकर सीएम बनवाया. लालू प्रसाद जी पप्पू यादव की राजनीति खत्म करना चाहते थें, लेकिन कांग्रेस ने उनकी पत्नी रंजीत रंजन को टिकट देकर चुनाव लड़वाया. कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बनवाया.

लालू यादव जी की डिक्शनरी में शिष्टाचार और सम्मान शब्द है ही नहीं. उन्होंने माता-पिता के अलावा शायद ही दुनिया में किसी को भी सम्मान के भाव से देखा होगा या सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया होगा. अभद्रता और अशिष्टता ही उनकी पूंजी है.

बता दें कि राष्‍ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव के बिहार पहुंचते ही सियासी पारा चढ़ गया और कांग्रेस-राजद नेताओं के बीच तल्खी भरे बयानबाजियों का सिलसिला भी बढ़ गया. जितनी राजद आक्रामक लगी उससे अधिक कांग्रेस ने अपने तल्ख तेवर दिखाए. इसके दो दिन बाद ही लालू यादव के बयान में थोड़ी नरमी दिखने लगी.

मंगलवार को महागठबंधन के प्रमुख घटक दल को राष्‍ट्रीय स्‍तर की पार्टी बताया है. साथ ही कहा कि क्‍या किसी ने कांग्रेस की मदद हमसे ज्‍यादा की है? राजद अध्यक्ष के बयान से यह जाहिर हो रहा है कि वह फिलहाल कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ना चाहते हैं. बहरहाल, कांग्रेस-राजद की तल्खी आगे किस मोड़ तक पहुंचती है यह देखना दिलचस्प होगा.

Tags: Bihar News, Bihar politics, Congress, Lalu Prasad Yadav

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