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    कांग्रेस ने राज्यपाल से मुलाकात कर बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम को तुरंत हटाने की मांग की

    मुंगेर हिंसा को विपक्ष ने जलियांवाला बाग जैसी घटना बताया है. (फाइल फोटो)
    मुंगेर हिंसा को विपक्ष ने जलियांवाला बाग जैसी घटना बताया है. (फाइल फोटो)

    बिहार के राज्यपाल से कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी को अविलंब हटाने की मांग की. उन्होंने प्रतिमा विसर्जन के दौरान मारे गए युवक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग की.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 7:45 PM IST
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    पटना. बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Elections) के बीच मुंगेर में हुई हिंसा (Munger Violence) अब बड़ा मुद्दा बनती जा रही है. आज बिहार के राज्यपाल फागू चौहान (Phagu Chauhan) से कांग्रेसी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल (Congress delegation) ने मुलाकात की और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Deputy CM Sushil Kumar Modi) को अविलंब हटाने की मांग की. कांग्रेस के नेताओं ने मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए युवक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग की है.

    राज्यपाल को सीआईएसएफ की रिपोर्ट दिखाई

    राज्यपाल से मुलाकात के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता रणदीप सुरेजवाला ने कहा कि हमने राज्यपाल को घटना के बारे में पूरी जानकारी दी है. हमने उन्हें सीआईएसएफ (CISF) की रिपोर्ट दिखाई है. सीआइएसएफ की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इस मामले में पुलिस से भारी चूक हुई है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 26 अक्टूबर को पुलिस ने ही गोली चलाई थी. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मुंगेर की घटना को जान-बूझकर अंजाम दिया गया. इस पूरे मामले के लिए नीतीश कुमार और सुशील मोदी जिम्मेदार हैं उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए. सुरजेवाला ने आरोप लगया कि सरकार एसपी और डीएम को बचाने में लगी है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच सिटिंग जज से कराई जानी चाहिए. गौरतलब है कि राज्यपाल फागू चौहान से मिलने गए कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने की. उनके साथ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा, पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा समेत कई कांग्रेसी नेता थे.







    ये है सीआईएसएफ की फाइंडिंग

    आपको बता दें कि CISF की रिपोर्ट के अनुसार, 26 अक्तूबर की रात 11 बजकर 20 मिनट पर CISF के 20 जवानों की टुकड़ी को मूर्ति विसर्जन की सुरक्षा ड्यूटी के लिए जिला स्कूल स्थित कैंप से भेजा गया था. राज्य पुलिस ने इन 20 जवानों को 10-10 के दो टुकड़ी में बांट दिया. इनमें से एक ग्रुप को एसएसबी और बिहार पुलिस के जवानों के साथ दीनदयाल उपाध्याय चौक पर तैनात किया गया था. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 26 अक्टूबर की रात को करीब 11 बजकर 45 मिनट पर विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और लोकल पुलिस के बीच विवाद शुरू हुआ. इसकी वजह से कुछ श्रद्धालुओं ने पुलिस और सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मामला बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से स्थिति को काबू में करने के लिए सबसे पहले हवाई फायरिंग की गई. इसके कारण ही श्रद्धालु भड़क गए और पत्थरबाजी शुरू कर दी.
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