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बिहार में लालू को छोड़कर आगे बढ़ेगी कांग्रेस ! चिंतन शिविर में राहुल गांधी ने निकाला फार्मूला

राजद से कांग्रेस ने दूरी बनाने का फैसला लिया है और इसके लिए राजस्थान के शिविर में फार्मूला सुझाया गया है

राजद से कांग्रेस ने दूरी बनाने का फैसला लिया है और इसके लिए राजस्थान के शिविर में फार्मूला सुझाया गया है

RJD-Congress Alliance: राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा पिछले विधानसभा उपचुनाव में बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास को भकचोन्हर कहा गया था. इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था जिसके बाद राजस्थानी में चल रहे कांग्रेस के चिंतन शिविर में राहुल गांधी के सामने बिहार से जुड़े नेताओ ने नया फार्मूला निकाला.

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पटना. राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा पिछले विधानसभा उपचुनाव में बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास को भकचोन्हर कहने का मामला अभी भी शांत नहीं पड़ा है. राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस द्वारा आयोजित नव चिंतन संकल्प शिविर में राहुल गांधी ने जब क्षेत्रीय दलों की विचारधारा पर प्रश्न खड़ा किया और क्षेत्रीय दलों को जाति विशेष की पार्टी बता दी तो बिहार में राजद की उपेक्षा से परेशान कांग्रेस के नेताओं को एक बड़ा मौका मिला गया. प्रदेश कमेटी द्वारा आलाकमान को यह साफ कर दिया गया है कि गठबंधन के नाम पर समझौता नहीं बल्कि अपने भरोसे पर खड़ा होने का प्रयास करना चाहिए.

बिहार कांग्रेस नेताओं ने एहसास कराया कि पार्टी को अपनी पुरानी जमीन को प्राप्त करना है तो उसे लालू प्रसाद की छत्रछाया से मुक्त होना होगा. वैसे कांग्रेस और राजद के बीच पहले से ही बिहार में रास्ते अलग-अलग बन चुके हैं. पिछले बिहार विधानसभा उपचुनाव के साथ विधान परिषद चुनाव में भी दोनों ने अलग-अलग प्रत्याशी उतारे थे, फिर भी लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय स्तर पर गठबंधन बरकरार रहने का हवाला दिया था, ऐसे में माना जा रहा था कि दोनों दलों के रास्ते अभी भी साथ-साथ हैं.

चिंतन में बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास ने आलाकमान के सामने बिहार में पार्टी को अपने हाल पर खड़ा होने फार्मूला भी शेयर किया. इस फॉर्मूले के मुताबिक खोये आधार को प्राप्त करने के लिए कांग्रेस को बिहार में अनुसूचित जाति और मुस्लिम वोट बैंक को फिर से साधने की जरूरत बताई गई. चिंतन शिविर में यह भी सवाल उठाया गया कि बिहार कांग्रेस के अभी अधिकतर महत्वपूर्ण पद पर सवर्ण जाति के लोग काबीज हैं. प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा की एकमात्र सीट और विधानसभा में पार्टी के नेता सवर्ण जाति से ही आते हैं लेकिन फिर भी सवर्णों का वोट बैंक आखिर कांग्रेस को क्यों नहीं मिल पाता.

इसलिए प्रदेश कमेटी ने सुझाव दिया है कि सवर्णों के साथ-साथ वैसे सभी समुदायों को भी पार्टी अपने पाले में करने के लिए प्रयासरत हो जो दशकों  पहले कांग्रेस से जुड़े थे. हालांकि कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि बिहार में राजद से लड़ना मुश्किल होगा. वैसे चिंतन शिविर में शामिल नेताओं ने दावा किया कि आलाकमान भक्त चरण दास के तर्कों से सहमत है.

Tags: Bihar Congress, Bihar News, PATNA NEWS

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