बिहार: कांग्रेस के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा, पार्टी दफ्तर में लगे 'दलाल भगाओ, पार्टी बचाओ' के पोस्टर्स

पटना के कांग्रेस मुख्यालय में धरना देते कार्यकर्ता
पटना के कांग्रेस मुख्यालय में धरना देते कार्यकर्ता

चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के सहयोगी दलों ने भी पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए हैं. RJD नेता शिवानंद तिवारी ने कांग्रेस (Congress) पर हमलावर होते हुए कहा कि महागठबंधन के लिए वह बोझ बन गई थी.

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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के बड़े नेता से लेकर कार्यकर्ता तक कुछ नेताओं की भूमिका पर लगातार सवाल खड़ा कर रहे हैं. बयानबाजी के अलावा पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ अब धरना-प्रदर्शन भी शुरू हो गया है. अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक और बिहार प्रभारी राजकुमार शर्मा के नेतृत्व में पार्टी के बिहार मुख्यालय सदाकत आश्रम में 'कांग्रेस बचाओ दलाल भगाओ' महाधरना आयोजन किया गया.

इस महाधरना के माध्यम से पूर्व विधायकों से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं तक ने कांग्रेस बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल, सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, पार्टी नेता सदानंद सिंह समेत स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे पर टिकट वितरण में धांधली और दलाली करने का गंभीर आरोप लगाया है.





धरना पर बैठे नेताओं की मानें तो टिकट वितरण में धांधली के कारण ही पार्टी के 30 से 40 साल पुराने वर्कर जयंती झा और मुर्तज़ा अली जैसे नेताओं की जान चली गई. नेताओं का आरोप है कि मोटी रकम लेकर दूसरे दलों के कुछ नेताओं को पार्टी के बड़े नेताओं ने आयातित किया. बछवाड़ा, मटिहानी, भोजपुर, जहानाबाद, अरवल समेत कई जिलों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलने पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली.
धरना दे रहे लोगों का आरोप था कि कुछ कार्यकर्ताओं को टिकट दूर के जिलों में महज इसलिए दिया गया, ताकि दूसरे दलों के प्रत्याशियों को  वाक ओवर दिया जा सके. पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले इन बड़े नेताओं ने संगठन का खात्मा कर दिया और बूथ, पंचायत, ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर तक कमेटी नहीं बन पाई. मालूम हो कि इस बार के चुनाव में बिहार में कांग्रेस ने राजद और वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.
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