बिहार में बिजली की दर 18 प्रतिशत तक कम होने के आसार, होली से पहले आ सकता है फैसला

बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कम्पनी ने वित्तिय वर्ष 2021--22 के लिए 1403.05 करोड़ का प्रस्ताव दिया है. (सांकेतिक फोटो)

बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कम्पनी ने वित्तिय वर्ष 2021--22 के लिए 1403.05 करोड़ का प्रस्ताव दिया है. (सांकेतिक फोटो)

बिजली दर में संशोधन को लेकर बिहार की 5 कंपनियों ने दिया था प्रस्ताव, जिसमें से 3 के लिए मंजूर राशि में 18.5 फीसदी की कटौती की गई है. दो अन्य कंपनियों के प्रस्ताव पर मंजूरी के बाद बिजली की नई दर को लेकर होगा फैसला.

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धर्मेंद्र कुमार

पटना. देशभर में कोरोना के कारण महंगाई से लोग त्रस्त हैं, लेकिन बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर हो सकती है. बिहार में बिजली की दर (Electricity Rate) 18 फीसदी तक कम हो सकती है. दरअसल, बिहार में बिजली की दरों के निर्धारण के लिए पांच कम्पनियों ने प्रस्ताव दिया था. उनमें से तीन के प्रस्ताव पर फैसला आ गया है. इनके लिए मंजूर राशि में 18.15 फीसदी कटौती की गई है. हालांकि, दो कम्पनियां साउथ और नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी (North Bihar Power Distribution Company) के प्रस्ताव पर फैसले के बाद तस्वीर साफ होगी. लेकिन फिलहाल माना जा रहा है कि बिजली की दर में 18 फीसदी तक की कमी हो सकती है. इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

हालांकि, विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष शिशिर सिन्हा ने कहा कि वितरण कंपनियों का फैसला आने पर ही इस संबंध में कुछ भी कहा जा सकता है. लेकिन एक बात तो सच है कि यदि बिजली बिल में 18 फीसदी की कमी होती है तो बिहार के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है. जानकारी के मुताबिक होली से पहले बिजली दरों पर फैसला हो जाएगा. अब सब कुछ विनियामक आयोग पर निर्भर करता है कि वो इसे किस तरह से नियंत्रित करती है. पिछले साल कोरोना कोरोना से लोगों की आय बुरी तरह से प्रभावित हुई थी और अभी तक लोग उबर नहीं पाए हैं. ऐसे में विद्युत विनियामक आयोग भी नहीं चाहता है कि दरों में कोई वृद्धि हो.

बिजली दर बढ़ाने का दिया था प्रस्ताव
बताते चलें कि बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कम्पनी ने वित्तीय वर्ष 2021--22 के लिए 1403.05 करोड़ का प्रस्ताव दिया है. जबकि आयोग ने 1130.68 करोड़ मंजूर किया है. दो कम्पनी साउथ और नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी ने बिजली की दर 9 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव पहले से दे रखा है. साउथ बिहार ने 42.86 प्रतिशत और नार्थ बिहार ने 27.71 प्रतिशत का नुकसान भी दिखाया है. आयोग की इस मामले पर जन सुनवाई भी हो चुकी है. अब गेंद विनियामक आयोग के पाले में है कि वो कैसे इस मामले को नियंत्रित करती है.
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