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पटना के मशूहर ल्हासा मार्केट पर Corona का असर, हर साल लगती थीं 250 दुकानें, इस बार सिर्फ 80 स्टॉल

पटना का ल्हासा बाजार
पटना का ल्हासा बाजार

Patna Lahasa Market: पटना में सर्दी के दिनों में गर्म कपड़ों के बाजार के लिए ल्हासा मार्केट काफी मशूहर है. यहां हर साल तिब्बती शरणार्थी गर्म कपड़ों का बाजार लगाते हैं और इसकी खरीदारी के लिए बिहार के कोने-कोने से लोग आते हैं.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: November 30, 2020, 10:41 AM IST
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रिपोर्ट-धर्मेन्द्र कुमार

पटना. बिहार में ठंड (Winter Season) ने दस्तक दे दी है. वहीं शहर के मार्केट में गर्म कपड़ों के बाजार में सजने लगे हैं लेकिन कोरोना संक्रमण का असर इस बार पटना के गर्म कपड़ों के बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. पटना में कई जगहों पर गर्म कपड़ों के बाजार लगते थे लेकिन इस साल बाजार नहीं लगे हैं. वहीं अगर बात करें गर्म कपड़ों के लिए मशहूर ल्हासा मार्केट (Patna Lahasa Market) की करें तो मार्केट खुल चुका है और लोगों की सुरक्षा का पूरा ख्याल भी रखा जा रहा है लेकिन बाजार में वह रौनक नहीं दिख रही. पिछले साल तक इस बाजार में 250 से ज्यादा दुकानें सजती थीं, लेकिन इस साल कोरोना महामारी (COVID-19 Pandemic) के कारण सिर्फ 80 स्टॉल ही लगाए गए हैं. इस वजह से लोग मार्केट में तो आ रहे लेकिन खरीदारी कम कर रहे है.

शॉपिंग करने आई युवतियों ने बताया कि बाजार में इस वर्ष कुछ नया नहीं है. ल्हासा बाजार में हर बार कुछ ना कुछ नया रहता था, लेकिन इस बार बाजार ही नहीं लगा. ग्राहक ने बताया कि कोरोना का असर बाजार पर देखने को मिल रहा है. विभिन्न प्रकार के गर्म कपड़े नहीं मिल रहे. खरीदारी तो कर ली है लेकिन हर बार की तरह इस बार बाजार नहीं है. गर्म कपड़े खरीदने आयी युवतियों ने बताया कि बाजार में इस वर्ष कुछ नया नहीं है और हमलोग बिना खरीदारी के ही वापस लौट रहे है. इस बार पिछले साल के मुताबिक कम स्टॉल भी लगे हैं.



बाजार के व्यवस्थापक ने बताया कि लोगों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. बिना मास्क और सैनेटाइजेशन के किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है. हर वर्ष 200-250 स्टॉल लगाए जाते थे, लेकिन इस बार आधे से भी कम सिर्फ 80 स्टॉल लगवाए गए हैं, ताकि स्पेस अधिक मिल सके और गैदरिंग ना हो. इस बार ल्हासा मार्केट में ल्हासा बाजार नहीं लगा लेकिन जितने भी तमाम व्यवसायी जिन जगहों से गर्म कपड़े लेकर आते थे उन सभी जगहों से कपड़े आए हैं और बाजार में भी उपलब्ध है.
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