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केंद्र ने बिहार को दिए और 264 वेंटिलेटर, मरीजों का आहार भी 75 रुपया रोज बढ़ाया

राष्ट्रपति एमैन्युल मैंक्रो ने हाल ही में भारत को तकनीकी विशेषज्ञता के साथ ही चिकित्सा उपकरण देने की घोषणा की थी (सांकेतिक फोटो)

राष्ट्रपति एमैन्युल मैंक्रो ने हाल ही में भारत को तकनीकी विशेषज्ञता के साथ ही चिकित्सा उपकरण देने की घोषणा की थी (सांकेतिक फोटो)

राज्य के आइसोलेशन सेंटरों (Isolation Center) में इलाज करा रहे कोरोना मरीजों (Corona Patients) के आहार दर और मेनू निर्धारण का भी आदेश जारी किया गया है. पहले जहां पौष्टिक आहार के लिए प्रति मरीज (Corona Positive) रोजाना अधिकतम सौ रुपए मिलते थे, वहीं अब इसे बढ़ा कर अधिकतम 175 रुपए निर्धारित किया गया है

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पटना. कोरोना संक्रमण (Corona Virus) काल में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा कैसे मिले इसे लेकर लगातार प्रयास जारी हैं. कोरोना मरीजों (Corona Patients) की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार (Union Government) की तरफ से बिहार (Bihar) को मदद पहुंचाया जा रहा है. केंद्र ने पूर्व में भेजे गए सौ वेंटिलेटर (Ventilator) के अतिरिक्त 264 और वेंटिलेटर भेजा है. केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए वेंटिलेटरों में से 25 वेंटिलेटर एम्स पटना (AIIMS Patna) और शेष वेंटिलेटर राज्य के विभिन्न मेडिकल काॅलेजों सह अस्पताल में लगेंगे. पिछले दो महीने में केंद्र द्वारा राज्य के स्वास्थ्य विभाग को जहां 364 वेंटिलेटर की अधिप्राप्ति हुई, वहीं राज्य सरकार द्वारा भी 30 वेंटिलेटर उपलब्ध कराया गया है. इन वेंटिलेटरों के मिलने से मेडिकल काॅलेज सह अस्पतालों में कोरोना मरीजों का बेहतर इलाज संभव होगा, जहां कोरोना मरीजों के लिए 100-100 बेड आरक्षित रखे गए हैं.

75 रुपए प्रति दिन बढ़ाया गया मरीजों का आहार दर

राज्य के आइसोलेशन सेंटरों में इलाज करा रहे कोरोना मरीजों के आहार दर और मेनू निर्धारण का भी आदेश जारी किया गया है. पहले जहां पौष्टिक आहार के लिए प्रति मरीज रोजाना अधिकतम सौ रुपए मिलते थे, वहीं अब इसे बढ़ा कर अधिकतम 175 रुपए निर्धारित किया गया है. इसमें सुबह की चाय और बिस्कुट, नाश्ता, दिन का भोजन, शाम की चाय और बिस्कुट के अलावा रात का भोजन भी शामिल है. साथ ही जहां आरओ की सुविधा नहीं है, वैसे आइसोलेशन सेंटरों पर बोतल बंद शुद्ध पानी के लिए प्रतिदिन प्रति मरीज 50 रुपए अतिरिक्ति निर्धारित किया गया है, ताकि मरीजों को शुद्ध पीने का पानी की कमी न हो.

मातृत्व मृत्यु दर में 16 अंकों की कमी आई

बिहार में मातृ मृत्यु दर में वर्ष 2014 के बाद पहली बार 16 अंकों की गिरावट आई है. 2014-17 के बीच राज्य में प्रति एक लाख पर 165 माताओं की मृत्यु हो जाती थी. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के अनुसार वर्ष 2018 में यह आंकड़ा गिरकर 149 पर आ गया है. पूरे देश में जहां मातृ मृत्यु दर में पिछले तीन वर्षों में नौ अंकों की कमी आई, वहीं बिहार में यह कमी 16 अंकों में दर्ज की गई है. बिहार में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की एक और बड़ी उपलब्धि है कि वर्ष 2016 तक लोगों की औसत आयु जहां 68.07 वर्ष थी, वो एसआरएस 2018 के अनुसार अब बढ़ कर 68.09 साल हो गया है. इस तरह लोगों के औसत आयु में दो महीने की वृद्धि हुई है. इसी तरह शिशु मृत्यु दर भी प्रति हजार 35 से घटकर राष्ट्रीय औसत 32 के बराबरी पर आ गया है, जो पहली बार हुआ है.

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