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डॉ कलाम ने कहा था- 'बिहार में दूसरी हरित क्रांति की संभावना'! अब कोरोना संकट को 'वरदान' बनाने के प्लान पर शुरू हुआ काम
Patna News in Hindi

Anand Amrit Raj | News18 Bihar
Updated: May 21, 2020, 12:40 PM IST
डॉ कलाम ने कहा था- 'बिहार में दूसरी हरित क्रांति की संभावना'! अब कोरोना संकट को 'वरदान' बनाने के प्लान पर शुरू हुआ काम
कोरोना वायरस (Coronavirus) के इस संकट काल को देखते हुए बिहार सरकार ने 10 सूत्रीय प्लान तैयार किया है.

कोरोना संक्रमण (Corona infection) को देखते हुए लागू लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से बड़ी संख्या में बिहार के बाहर रहनेवाले लोग लाखों की संख्या में बिहार आ रहे हैं.

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पटना. कोरोना महामारी (Corona epidemic) से पूरा विश्व परेशान है, लेकिन बिहार का कृषि विभाग (Agriculture Department) कोरोना को बिहार के लिए वरदान बनाने की तैयारी में जुट गया है. कृषि विभाग पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) की उस भविष्यवाणी को आगे कर काम कर रहा है जो उन्होंने बिहार के संदर्भ में की थी. दरअसल जब वे जब बिहार आए थे तो उन्होंने बिहटा क्षेत्र के खेतों में लगे फसलों को देख भविष्यवाणी की थी कि बिहार में दूसरी हरित क्रांति की सम्भावना है.

दरअसल कृषि विभाग को हमेशा इस बात की समस्या से जूझना पड़ता था कि बिहार में कृषि कार्य के लिए जितने श्रमिकों की जरूरत होती थी, वह अन्य राज्यों में पलायन के कारण कम पड़ जाती थी. खासकर ट्रेंड कृषकों की भारी कमी थी.

लेकिन, कोरोना संक्रमण को देखते हुए लागू लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में बिहार के बाहर रहनेवाले लोग लाखों की संख्या में बिहार आ रहे हैं. जिसमें कुशल श्रमिक के तौर पर  कृषि में हरियाणा पंजाब और दूसरे राज्यों को कृषि में अव्वल बनाने वाले मजदूर भी शामिल हैं.



अब बिहार के कृषि विभाग की नजर ऐसे ही विशेषज्ञ खेतिहरों पर टिक गई है और इन्हीं की बदौलत बिहार को कृषि और कृषि से जुड़े उत्पाद के क्षेत्र में अव्वल बनाने की तैयारी में  विभाग जुट गया है.



आखिर कृषि विभाग की क्या-क्या है तैयारी, इसे इन दस प्रमुख प्वाइंट्स में समझते हैं-

1. कृषि के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन करना

2. पलायन से लौटे लोगों का डाटा बेस तैयार करना ताकि उसका सही यूज किया जा सके

3. कृषि, पशुपालन , डेयरी और मत्स्य पालन में रोज़गार के बड़े अवसर पैदा करना ताकि लोगों को स्थायी रोजगार मिल  सके

4. 20 लाख करोड़ के पैकेज से कृषि विभाग को बड़ा फ़ायदा मिलने की उम्मीद

5-. लोकल उत्पादों की ब्रानडिंग की तैयारी

6. मखाना,  शाही लीची, शहद और मगही पान जैसे लोकल ब्रांड के निर्यात की तैयारी

7. डेयरी सेक्टर को मज़बूत कर रोजगार के अवसर उपलब्ध करने की तैयारी

8. सोन नदी का रोहू, गंगा नदी का बचवा मंछली,  कोशी नदी का मोई और दरभंगा जिले में पाया जाने वाले भुना मछली की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की तैयारी

9. बड़े पैमाने पर FPO बनाकर ग्रामीण स्तर पर लघु एवं कुटीर उद्योग की स्थापना करने की तैयारी

10.  इस साल खेती के समय कृषि कार्य में मजदूरों के उपलब्ध होने से इस बार कृषि में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार कहते हैं कि प्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े उत्पादों के विकास की तमाम सम्भावनाएं मौजूद हैं. इसके लिए कृषि रोड मैप भी बनाया गया है जिसकी वजह से बिहार में कृषि के क्षेत्र में विकास भी तेज गति से हो रहा है. लेकिन, इस बार कोरोंना की वजह से बड़ी संख्या में श्रमिक, जो बाहर रहते थे बिहार लौटे हैं. उनकी मदद से हम बिहार को कृषि के क्षेत्र में अव्वल बना सकते हैं.

बिहार में विदेशी सब्जी की खेती करने वालों को अनुदान
बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार की फाइल फोटो


कृषि मंत्री कहते हैं कि और  ये सम्भव हो सकता है आए हुए कुशल श्रमिकों की वजह से जिसे लेकर हम तैयारी में जुट गए हैं. वे कहते हैं कि कोरोना संकट को हम अपने लिए वरदान साबित करने की कोशिश में लग गए हैं.

बता दें कि बिहार में तीन लाख तीस हज़ार हेक्टेयर में धान की खेती होती है. 45 हज़ार हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है और एक लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती होती है. वहीं, पचास हज़ार हेक्टेयर में तेलहन की खेती होती है.

बिहार के बड़े किसान राजेंद्र सिंह कहते हैं, बिहार में खेती में कई समस्या आती है जिसमें सबसे बड़ी समस्या कृषि कार्य में लगने वाले मज़दूरों की होती है. इस बार शायद उसकी कमी दूर हो जाए, लेकिन वो स्थायी रूप से बिहार में ही रुक जाए इसके लिए कृषि विभाग जो उपाय करने का दावा कर रहा है उसे मज़बूती से अमल में भी लाना होगा तभी बिहार में कृषि क्रांति संभव है.

बता दें कि बिहार में 2017-22 तक इसमें कुल बजट एक लाख 54 हजार करोड़ रुपया है. एन स्वामीनाथन और अबुल कलाम ने पूर्वी भारत में हरित क्रांति की भविष्यवाणी की थी जिसमें बिहार में सम्भावना सबसे ज़्यादा जताया था. बिहार कई मामले में आत्म निर्भर है.

गौरतलब है कि धान, गेहूं, मक्का उत्पादन में बिहार का देश में हाइएस्ट प्रोडक्शन रेट है. ये भी बता दें कि अभी तक बिहार को तीन कृषि कर्मन पुरस्कार मिल चुका है. यही नहीं बिहार देश का पहला राज्य है जहां पंचायत लेवेल पर कृषि कार्यालय खोले गए हैं.

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First published: May 21, 2020, 12:07 PM IST
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