Bihar Lockdown: क्या हुआ ऐसा कि संपूर्ण तालाबंदी को मजबूर हो गई नीतीश सरकार? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में 5 से 15 मई तक के लॉकडाउन का ऐलान किया (फाइल फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में 5 से 15 मई तक के लॉकडाउन का ऐलान किया (फाइल फोटो)

CoronaVirus Cases: बिहार में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आई है इसे रोक पाने में नीतीश सरकार अब तक सफल नहीं हो पाई है. वहीं, सत्ता में सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी के कई नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बिहार में लॉकडाउन की वकालत कर चुके थे.

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पटना. गहराते जा रहे कोरोना संकट के बीच बिहार में 5 से 15 तक के लिए कंप्लीट लॉकडाउन लागू कर दिया गया है. हालांकि आवश्यक सेवाओं पर यह लागू नहीं होगा. दरअसल प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण का दायरा गांव-गांव तक फैल चुका है और स्थिति बेकाबू होती जा रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार औसतन प्रतिदिन 70 से 80 लोगों की मौत हो रही है. हालांकि गैर सरकारी आंकड़ों में यह संख्या बताई गई संख्या से तीन से चार गुनी अधिक कही जाती है. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार के पास कोई विकल्प बचा ही नहीं था. पर अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बिहार के मुख्यमंत्री ने ये फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की? आखिर क्या वजह रही जो सरकार लॉकडाउन से बचना चाह रही थी और न चाहते हुए भी उसे इसे लागू करना ही पड़ गया?

बता दें कि सोमवार को बिहार में कोरोना संक्रमण के 11407 नए मामले सामने आए. जबकि 82 मरीजों की मौत भी हुई. नए मामले सामने आने के बाद राज्य में कोरोना के एक्टिव (सक्रिय) मरीजों की संख्या 1,07,667 पहुंच गई. प्रतिदिन करीब 11 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं. सबसे खास बात यह कि रिकवरी रेट में भी लगातार गिरावट आई है. इससे पहले सरकार ने नाइट कर्फ्यू भी लगा रखा था, लेकिन कोरोना कंट्रोल होने का नाम ही नहीं ले रहा था. ऐसे में पटना हाईकोर्ट बिहार में कोरोना संक्रमण से उपजे हालात का प्रतिदिन मॉनिटरिंग कर रहा है.

नहीं तो पटना हाईकोर्ट ही लगा देता पूर्ण लॉकडाउन!

दरअसल पटना हाई कोर्ट ने अपने ऑब्जर्वेशन में पाया कि एक तरफ जहां मरीजों को अस्पतालों में बेड्स नहीं मिल रहे वहीं ऑक्सीजन की बेहद कमी है और जरूरी दवाइयों की कालाबाजारी भी जोरों पर है. ऐसे में सोमवार को कोर्ट ने भी सरकार से पूछा था कि आखिर बिहार में कब लॉकडाउन लगाया जाएगा? सोमवार को न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने बिहार सरकार से पूछा था कि बिहार में लॉकडाउन लगाने की क्या तैयारी है? कब तक राज्‍य में पूर्ण लॉकडाउन लगाया जाएगा?
हाईकोर्ट के सख्त रुख को देख लिया फैसला!

हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए सरकार के सिस्टम को फ्लॉप बताया था. कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा कि राज्य सरकार से बात करें और मंगलवार यानी चार मई को बताएं कि राज्य में लॉकडाउन लगेगा या नहीं. पटना हाईकोर्ट ने साथ ही कहा था कि अगर आज निर्णय नहीं आता है तो हाईकोर्ट कड़े फैसले ले सकता है. माना जा रहा है कि ऐसे में नीतीश सरकार पर दबाव बढ़ गया था कि कहीं कोर्ट अपनी तरफ से ही बिहार में लॉकडाउन लागू न कर दे. ऐसे में हाईकोर्ट के संभावित फैसले से पहले ही नीतीश सरकार ने लॉकडाउन लागू कर दिया.

सहयोगी दल का नीतीश सरकार था दबाव



बता दें कि जब से बिहार में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आई है इसे रोक पाने में नीतीश सरकार अब तक सफल नहीं हो पाई है. वहीं, सत्ता में सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बिहार में लॉकडाउन की वकालत की थी. सबसे पहले बीते 22 अप्रेल को नीतीश सरकार के नाइट कर्फ्यू लगाए जाने के फैसले पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सवाल खड़ा किया था. उन्होंने कहा कि सरकार के इस एक फैसले को समझने में असमर्थ हूं कि रात का कर्फ्यू लगाने से कोरोना वायरस का प्रसार कैसे बंद होगा. कम से कम वीकेंड लॉकडाउन तो जरूर लगना चाहिए. हालांकि तब जेडीयू की ओर से इस मांग को दरकिनार कर दिया गया था और इस पर जमकर राजनीति भी हुई थी. हालांकि सूत्रों से खबर यही है कि भाजपा ने नीतीश सरकार पर लगातार दबाव बनाकर रखा था.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दी थी सलाह

सरकार के इस फैसले का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्वागत किया है. दरअसल IMA और पटना एम्‍स के डॉक्‍टरों ने भी राज्य में लॉकडाउन लगाने की मांग की थी. इस संबंध में मुख्यमंत्री को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अवगत भी करा दिया था. आईएमए का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा के कई विशेषज्ञों से बातचीत की गई है. इसमें यह सामने आया है कि बिहार में लॉकडाउन लगाना जरूरी है. ऐसे में माना जा रहा है कि डॉक्टरों की राय को मानते हुए कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकाडउन के साथ ही कई नए आदेश जारी किए गए.

व्यापारिक संगठनों ने भी लॉकडाउन लगाने की मांग की थी

Confederation of All India Traders यानी कैट (CAIT) से जुड़े बिहार के व्‍यवसायी और कई तबकों के लोग राज्य में लॉकडाउन की मांग कर रहे थे. माना जा रहा है कि यही वजह रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोविड-19 से बचाव के लिए किए जा रहे कार्यो की सोमवार को भी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी. साथ ही राजधानी पटना के कई इलाकों का भ्रमण भी किया था. सीएम ने कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करवाने का निर्देश देते हुए कहा था कि पुलिस और प्रशासन बेवजह घरों से निकलने वालों पर नजर रखे, जिससे कोरोना फैलाव को रोका जा सके.
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