कोरोना पॉजिटिव होने पर हुई थी ऑक्सीजन की किल्लत, ठीक होते ही पति-पत्नी ने खोल लिया ऑक्सीजन बैंक
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कोरोना पॉजिटिव होने पर हुई थी ऑक्सीजन की किल्लत, ठीक होते ही पति-पत्नी ने खोल लिया ऑक्सीजन बैंक
पटना में मुफ्त ऑक्सीजन बैंक चलाने वाला दंपति

पटना के गौरव राय न कोई एनजीओ चलाते हैं और न ही उनका कोई ट्रस्ट है. वो बस समाज सेवा करते हैं. उनकी जानकारी के मुताबिक उन्होंने 86 बार रक्तदान किया है.

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पटना. यदि जिंदगी में किसी चीज की कमी हो जाए तो उसकी महत्ता काफी बढ़ जाती है. पटना के गौरव कुमार के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. गौरव कुमार कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) हो गए थे. उनमें कोरोना के लक्षण भी साफ-साफ दिखने लगे थे. एक दिन अचानक उनको सांस लेने में दिक्कत होने लगी. अपनी पत्नी अरुणा के किसी भी तरह से वो पटना के पीएमसीएच (PMCH) में पहुंचे. गौरव की हालत काफी खराब होती जा रही थी. पत्नी अरुणा के लिए पति का एक-एक लम्हा काफी अहम था. पीएमसीएच में ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए अरुणा दर-दर की ठोकरें खा रही थी. किसी भी तरह कई पैरवी करने के बाद गौरव को ऑक्सीजन सिलेंडर मिल पाया और वह धीरे-धीरे ठीक होने लगे.

पति-पत्नी ने शुरू की मुहिम

कोरोना से उबरने के बाद गौरव और उनकी पत्नी अरुणा ने एक मुहिम शुरू की. यह मुहिम है लोगों की जान बचाने की जो कई लोगों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है. दोनों पति-पत्नी ने अब ऑक्सीजन सिलेंडर बैंक बनाना शुरू किया. यह बैंक ऑक्सीजन सिलेंडर इकट्ठा करता है और जरूरतमंद लोगों को मुहैया कराते है.



ऑक्सीजन देने की ट्रेनिंग भी ले चुके है गौरव
गौरव ने इस मुहिम को शुरू करने के लिए अपने कुछ नजदीकी दोस्तों से मदद ली. आज गौरव के पास ऑक्सीजन के 30 सिलेंडर हैं. कोई भी गौरव को यदि फोन करता है तो गौरव खुद अपनी गाड़ी से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर उनके घर तक पहुंचते हैं या फिर जिस हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती होते हैं वहां पहुंचकर उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराते हैं. साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर में आने वाले जितने भी इक्विपमेंट्स है वो भी गौरव ही देते हैं. बकायदा गौरव ने ऑक्सीजन लगाने की ट्रेनिंग ली है और खुद से मरीजों को ऑक्सीजन चढ़ाते हैं.

पटना के दंपत्ति द्वारा बनाया गया ऑक्सीजन बैंक
पटना के दंपत्ति द्वारा बनाया गया ऑक्सीजन बैंक


जो तकलीफ पीएमसीएच में उठाई वो दूसरों को ना हो

गौरव कुमार राय आज कोरोना संक्रमित मरीजो  के लिए एक सहारा बन गए हैं. जब सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिलती है तो गौरव ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर पहुंचते हैं. गौरव बताते हैं कि जिस तकलीफ से पीएमसीएच में उन्होंने वक्त गुजारा है वो तकलीफ अब दूसरे मरीजों को ना हो यह उनका लक्ष्य है. गौरव उन मरीजों को ज्यादा तरजीह देते हैं जो काफी बुजुर्ग और अक्षम हैं. गौरव प्राइवेट फर्म में काम करते है लेकिन इनकी सैलरी का ज्यादा भाग इसी काम मे खर्च होता है.

पटना में ऑक्सीजन बैंक चलाने वाले गौरव
पटना में ऑक्सीजन बैंक चलाने वाले गौरव


प्लाज्मा भी डोनेट करने की तैयारी में है  

गौरव राय कोई एनजीओ नहीं चलाते हैं. इनका कोई ट्रस्ट भी नहीं है. बस वो समाज सेवा करते हैं. उनकी जानकारी के मुताबिक उन्होंने 86 बार रक्तदान किया है. साथ ही कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद अब इनका लक्ष्य है कि जो मरीज ज्यादा क्रिटिकल पोजीशन में है उनको यह अपना प्लाज्मा भी डोनेट करेंगे . एक साथ कई बीमारियों से लड़ने वाले गौरव आज पटना में समाज सेवा के रूप में एक जाना माना नाम हो चुके हैं.
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