COVID-19 का कहर: Lockdown के बीच बिहार में उठी विशेष आर्थिक पैकेज की मांग

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आरएलएसपी (RLSP) के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने मांग की है कि केंद्र सरकार बिहार को डेढ़ लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे.

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पटना. प्रधानममंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर लॉकडाउन और कोरोना महामारी (Corona virus) के हालात पर चर्चा की. चर्चा में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) भी शामिल थे. केंद्र सरकार के अलावा बिहार सरकार की तरफ से भी कोरोना के फैलाव को रोकने और राज्य की गतिविधि को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है. खासतौर से दूसरे राज्यों में फंसे और वापस आ चुके बिहार मजदूरों को लेकर सरकार की चिंता सबसे बड़ी है. सबको रोजगार देने और आर्थिक संकट से उबरना बिहार में भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

राजनीतिक दलों की तरफ से भी कई सुझाव दिए जा रहे हैं
प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के बीच बिहार में राजनीतिक दलों की तरफ से भी कई सुझाव दिए जा रहे हैं. कोरोना के बाद के आर्थिक संकट को देखते हुए बिहार में विपक्षी आरएलएसपी ने केंद्र सरकार के बड़े आर्थिक पैकेज की मांग की है. आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने मांग की है कि केंद्र सरकार बिहार को डेढ़ लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे. न्यूज 18 से बात करते हुए माधव आनंद ने कहा, ‘कोरोना महामारी से निपटने और बिहार में रोजगार मुहैया कराने के लिए राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज की जरूरत है. लिहाजा केंद्र सरकार को डेढ़ लाख करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज का ऐलान करना चाहिए. इस महामारी के दौरान सरकार दो फ्रंट पर लड़ रही है. एक तो महामारी के खिलाफ और दूसरा आर्थिक मोर्चे पर. इस वक्त दोनों में सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है.'

हर जरूरतमंद के खाते में साढ़े सात हजार रुपए दिए जाए
उधर, विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की गई है कि हर जरूरतमंद के खाते में साढ़े सात हजार रुपए दिए जाए. कांग्रेस नेता और एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्र ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा, ‘सबसे पहले लोगों के लिए खाने की व्यवस्था कराई जाए. क्योंकि अभी भी लोगों को भोजन नहीं मिल पा रहा है.’ कांग्रेस एमएलसी ने बिहार सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा, ‘बिहार के एमएलए और एमएलसी की तरफ से अपनी विकास निधि की दी गई राशि से ही 160 करोड़ रुपए जमा हो गए हैं. लेकिन, इस राशि को भी कहां खर्च किया जा रहा है नहीं पता.’ उन्होंने कहा, ‘सरकार की तरफ से रोजगार सृजन के उपाय करने की जरूरत है.’ कुछ ऐसा ही सवाल आरजेडी की तरफ से भी किया जा रहा है. आरजेडी भी लगातार गरीबों, मजदूरों और कामगारों की समस्या को उठा रही है. लेकिन, इसके बावजूद अभी भी पार्टी की तरफ से लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की मांग की जा रही है, जिससे इस महामारी पर नियंत्रण किया जा सके.



 मनरेगा समेत कई योजनाओं को शुरू करने का फैसला हुआ है
आर्थिक संकट का एहसास सरकार को भी है. बिहार सरकार की तरफ से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने की कोशिश के तहत मनरेगा समेत कई योजनाओं को शुरू करने का फैसला हुआ है. लेकिन, लॉकडाउन के बाद भी बिहार के बाहर फंसे हुए मजदूरों और कामगारों के बिहार लौट जाने की संभावना प्रबल है. ऐसे में बिहार के भीतर उन्हें रोजगार देने और राज्य की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए सरकार को बहुत कुछ करना होगा. न्यूज 18 से बात करते हुए जेडीयू नेता और बिहार सरकार में सूचना और जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने केंद्र सरकार से मदद की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि ‘बिहार में चुनौती बड़ी है, क्योंकि जुलाई से अगले तीन महीने तक राज्य को बाढ़ का सामना भी करना पड़ता है. अब तक राज्य सरकार की तरफ से लगभग 6000 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई है.’ लेकिन, उन्होंने कहा कि ‘कोरोना महामारी के इस हालात में सरकार का राजस्व घटेगा. ऐसे में केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए.

फिलहाल, लॉकडाउन की अवधि को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने से लेकर उसके बाद के आर्थिक हालात से निपटने की सभी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. लेकिन, विरोधी दलों की तरफ से बिहार के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग कर बिहार सरकार पर दबाव बढ़ा दिया गया है.

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