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Covid-19: बिहार के लिए चुनौती बने प्रवासी मजदूर, 9 दिन में 3 गुना बढ़े कोरोना के मरीज

राजस्थान सरकार का दावा है कि प्रदेश में पलायन की रफ्तार धीमी हुई है. सांकेतिक फोटो.

राजस्थान सरकार का दावा है कि प्रदेश में पलायन की रफ्तार धीमी हुई है. सांकेतिक फोटो.

बिहार (Bihar) पूरी तरह कोरोना महामारी (Corona epidemic) से घिर चुका है. अब राज्य के सभी 38 जिले कोरोना वायरस के संक्रमण (Covid-19) की चपेट में आ चुके हैं.

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पटना. बिहार (Bihar) पूरी तरह कोरोना महामारी (Corona epidemic) से घिर चुका है. अब राज्य के सभी 38 जिले कोरोना वायरस के संक्रमण (Covid-19) की चपेट में आ चुके हैं. इतना ही नहीं पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 953 पहुंच चुका है. ये हालत तब है जब बिहार में रैंडमली सैम्पल कलेक्ट किये जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे बड़ा कारण प्रवासी मजदूरों का राज्य में वापस लौटना है. जानते हैं कि आखिर प्रवासी बिहारियों को लेकर राज्य सरकार की क्या तैयारी है?

लॉकडाउन में बिहार से बाहर फंसे श्रमिकों के बिहार पहुंचने के बाद राज्य सरकार की नींद उड़ गई है. क्योंकि बीते 9 दिनों के भीतर बिहार में मरीजों में आंकड़ों में लगभग तीन गुना वृद्धि हो गयी है. राज्य में अबतक पॉजिटिव मरीजों की संख्या एक हजार के करीब पहुंच गई है. इसमें 4 मई से अबतक मिले लगभग सवा 400 पॉजिटिव मरीज मिले हैं. इसमें से 335 मरीज सिर्फ प्रवासी बिहारी हैं.

इस​ तरह की जा रही है जांच
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय बताते हैं कि सभी बाहर से आने वालों का हर स्तर से स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और डॉक्टरों के अनुसार परिस्थिति देखते हुए क्वारंटाइन सेंटर या आइसोलेशन सेंटर में उन्हें रखा जाता है. मंत्री ने कहा कि सरकार रैंडमली टेस्ट करवा रही है, जिसको लेकर फिलहाल किट की कमी नहीं है. मंत्री का दावा है कि बिहार में कोरोना जांच के लिए आरटीपीसीआर, आरएनए एक्सट्रैक्ट मशीन के अलावे सीबी नेट मशीन काम कर रही है, जिसमें फिलहाल किट की कमी नहीं है. जरूरत पड़ने पर भारत सरकार और बीएमएसआईसीएल बिहार आपूर्ति कर रही है. मंत्री पांडेय के मुताबिक बिहार में 19 हजार 250 आरएनए किट उपलब्ध है. जबकि 32 हजार 250 विटीएम किट और 35 हजार आरटीपीसीआर किट उपलब्ध है. फिलहाल न तो किट की कमी है और ना ही मशीनों की.

फिर ऐसा क्यों?
मंत्री के दावों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब संसाधनों  की कमी नहीं है तो फिर रैंडमली ही प्रवासी बिहारियों की जांच क्यों करवाई जा रही है. जबकि सरकार के आंकड़े ही बताते हैं कि बाहर से आये लोगों में रैंडमली 6 प्रतिशत लोगों में पॉजिटिव निकल रहा है. ऐसे में बाहर से आये 2 लाख लोगों में 6 प्रतिशत के मुताबिक 12 हजार श्रमिक पॉजिटिव हैं, जिनकी जांच नहीं हो सकी है. पूरे मामले पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. निगम प्रकाश भी मानते हैं कि प्रवासी बिहारियों में सबसे ज्यादा पॉजिटिव मिल रहा है. ऐसे में इन्होंने भी रैंडमली जांच की बजाय प्रतिदिन 10 हजार सैम्पल जांच करने की अपील की. बता दें कि प्रवासी मजदूरों में पॉजिटिव मिलने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने भी प्रतिदिन 10 हजार सैम्पल जांच करने का निर्देश दिया है. बावजूद इसके बिहार में अभी 1800 सैम्पल की ही जांच हो पा रही है.

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