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COVID-19: बिहार के 16 जिलों में सिविल सर्जन नियुक्त, ड्यूटी से गायब 198 डॉक्टरों पर कसा शिकंजा

कोरोना को लेकर जागरुकता दिखाई दे रही है.

कोरोना को लेकर जागरुकता दिखाई दे रही है.

बिहार में कोरोना (COVID-19) संकट के बीच राज्य की नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सरकार ने 16 जिलों में सिविल सर्जनों की नियुक्ति की है. साथ ही ड्यूटी से गायब डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं.

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पटना. कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण के बीच आज बिहार की नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) सरकार ने दो अहम फैसले लिए. इसके तहत एक तरफ तो वायरस का संक्रमण रोकने के अभियान को धार देते हुए 16 जिलों में महीनों से खाली पड़े हुए सिविल सर्जन के पद पर डॉक्टरों की नियुक्ति का फैसला लिया गया. वहीं, दूसरी ओर कोरोना संकट के बावजूद ड्यूटी से गायब रहने वाले 198 डॉक्टरों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है. इन सभी 198 डॉक्टरों को सरकार ने शोकॉज नोटिस जारी किया है.

वायरस के संक्रमण पर ब्रेक लगाने का निर्णय

बिहार में कोरोना वायरस के संक्रमण पर पूरी तरह ब्रेक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में महीनों से खाली पड़े सिविल सर्जन के पदों को भरने का फैसला लिया है. कोरोना संकट को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यपाल के आदेश पर एक साथ बिहार के 16 जिलों में चिकित्सा पदाधिकारियों की पदस्थापना की है. इन डॉक्टरों को सिविल सर्जन की जिम्मेवारी दी गई है.



इन जिलों में नए सिविल सर्जन
डॉ. संजीव कुमार सिन्हा दरभंगा
डॉ. आत्मानंद कुमार लखीसराय
डॉ. विमल प्रसाद सिंह नवादा
डॉ. राकेश चंद्र सहाय सीतामढ़ी
डॉ. महेश्वर प्रसाद गुप्ता कटिहार
डॉ. त्रिभुवन नारायण सिंह गोपालगंज
डॉ. सुनील कुमार झा मधुबनी
डॉ. श्री नंदन किशनगंज
डॉ. अवधेश कुमार सहरसा
डॉ. रतिरमण झा समस्तीपुर
डॉ. विजयेंद्र सत्यार्थी जमुई
डॉ. अजय कुमार सिंह खगड़िया
डॉ. राजदेव प्रसाद सिंह शिवहर
डॉ. उमेश शर्मा पूर्णिया
डॉ. यदुवंश कुमार शर्मा सीवान
डॉ. सुधीर कुमार रोहतास

निर्देश के बावजूद ड्यूटी से गायब हुए डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संकट के मद्देनजर राज्य में कार्यरत सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टी रद्द करने का फैसला लिया था. फिर भी राज्य के 198 चिकित्सा पदाधिकारी ड्यूटी से गायब रहे. विभाग ने ऐसे 76 डॉक्टरों को शोकॉज नोटिस भेजा है. वहीं 122 के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है. सभी 76 डॉक्टरों से 3 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. बताया जा रहा है कि सही जवाब न मिलने पर इन डॉक्टरों को सस्पेंड किया जा सकता है. ड्यूटी से गायब डॉक्टरों पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी हो रही है.

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