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CAA-NRC का विरोध करते-करते कन्हैया भूले राष्ट्रगान, गलती का अहसास होने पर हुए शर्मिंदा
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Updated: February 28, 2020, 8:35 AM IST
CAA-NRC का विरोध करते-करते कन्हैया भूले राष्ट्रगान, गलती का अहसास होने पर हुए शर्मिंदा
CAA-NRC का विरोध करते-करते कन्हैया ने राष्ट्रगान की लाइनों में कर डाला झोल (फाइल फोटो)

पटना के गांधी मैदान (Gandhi Maidan) में गुरुवार को एनआरसी-सीएए विरोधी संघर्ष मोर्चा की 'संविधान बचाओ नागरिकता बचाओ' महारैली का आयोजन किया गया था.

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  • Last Updated: February 28, 2020, 8:35 AM IST
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पटना. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई (CPI) नेता कन्हैया कुमार ने पटना में हुई 'संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ' महारैली में कुछ ऐसा कर दिया कि सबके सामने हंसी का पात्र बनकर रह गए. दरअसल, कन्हैया की रैली में जब राष्ट्रगान (National Anthem) गाया गया, तब उन्होंने अंतिम दो लाइन में “जन गण मंगल” के बदले “जन मन गण” गा दिया. हालांकि, बाद में उन्‍होंने अपनी इस गलती का अहसास हुआ. इसके बाद उन्‍होंने राष्‍ट्रगान को पूरा गाया.

सोशल मीडिया में हुए ट्रोल
अपने भाषण की शुरुआत करने से पहले कन्हैया कुमार ने गांधी मैदान में मौजूद लोगों से खड़े होकर राष्ट्रगान गाने की अपील की और फिर राष्ट्रगान शुरू किया. लेकिन राष्ट्रगान गाते समय कन्हैया कुमार ने अंतिम दो लाइन में “जन गण मंगल” के बदले “जन मन गण” गा दिया. गलती का अहसास होने पर दोबारा राष्ट्रगान गाया गया. इस वाकये के बाद लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया है.

गांधी मैदान में हुई महारैली



बता दें कि पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार को एनपीआर-एनआरसी-सीएए विरोधी संघर्ष मोर्चा की 'संविधान बचाओ नागरिकता बचाओ' महारैली का आयोजन किया गया था. इसमें जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व सीपीआई नेता कन्हैया के अलावा वाम विचारों से जुड़ी और भी कई हस्तियां शामिल हुई थीं.

मोदी सरकार पर जमकर बरसे कन्हैया
इस महारैली में वक्‍ताओं ने दिल्ली की हिंसा के लिए केंद्र सरकार को निशाना बनाया. कन्‍हैया कुमार ने यहां तक कहा कि इस घटना के कारण उन्‍हें तीन दिनों से नींद नहीं आ रही है. उन्होंने कहा कि देश में जो चल रहा है और जो उथल-पुथल है, उसकी वजह से मैं सो नहीं पा रहा हूं. उन्‍होंने यह भी कहा कि 'गांधी जिंदाबाद' कहने वाले को देशद्रोही बताया जा रहा है और 'गोडसे जिंदाबाद' कहने वाले को संसद पहुंचाया जा रहा है. आजादी के बाद देश में जो मुसलमान रह गए हैं, उन्होंने जिन्ना के बजाय गांधी को राष्ट्रपिता माना है. लेकिन आज सरकार ने गोडसे को चुन लिया है. अब जनता तय करेगी कि गांधी के साथ रहना है या गोडसे के साथ.

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First published: February 28, 2020, 8:29 AM IST
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