साइबर अपराधियों ने ADG जितेंद्र कुमार का फर्जी फेसबुक अकॉउंट बनाया, लोगों से मांग रहे पैसे, सतर्क रहने की अपील

बिहार पुलिस मुख्यालय के एडीजी जितेंद्र कुमार के फर्जी फेसबुक अकाउंट से पैसे की मांग.

बिहार पुलिस मुख्यालय के एडीजी जितेंद्र कुमार के फर्जी फेसबुक अकाउंट से पैसे की मांग.

Crime In Bihar: डीजी पुलिस मुख्यालय ने इस मामले की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई को सूचित कर दिया है और उनकी शिकायत पर EOU के अधिकारी छानबीन भी शुरू कर चुके हैं.

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पटना. बिहार में साइबर हमले का शिकार आम से लेकर खास तक हो रहे हैं. बात चाहे पूर्व DG सुरेश कुमार भरद्वाज की हो, DG आलोक राज की, या ADG नैय्यर हसनैन खान की या फिर आईएएस धर्मेंद्र कुमार से लेकर पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा तक की. साइबर अपराधियों ने एक-एक कर सभी के फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने की कोशिश की. कुछ मामलों में कामयाब भी हो गये तो कई मामलों में साइबर अपराधियों की दाल नहीं गली. ताजा मामला ADG पुलिस मुख्यालय जितेंद्र कुमार से जुड़ा हुआ है. साइबर अपराधियों ने इनके नाम से भी फेक फेसबुक आईडी बना ली है और लोगों से पैसे की डिमांड कर रहे हैं. अपराधियों की इस करतूत की जानकारी खुद ADG जितेंद्र कुमार ने अपने ऑरिजनल फेसबुक ऑकउंट पर लोगों को दी है. उन्होंने लिखा है कि अगर मेरे फेसबुक आईडी से कोई रिक्वेस्ट आता है तो उसे एक्सेप्ट ना करें, इग्नोर करें.

ADG पुलिस मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने अपने फेसबुक आईडी के माध्यम से लोगों से कहा है कि उनकी तस्वीर का इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहे हैं और रुपयों की मांग कर रहे हैं. उससे बचने की जरूरत है. मिली जानकारी के अनुसार एडीजी पुलिस मुख्यालय ने इस मामले की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई को सूचित कर दिया है और उनकी शिकायत पर EOU के अधिकारी छानबीन भी शुरू कर चुके हैं.

नई नहीं है साइबर अपराधियों करतूत

साइबर अपराधियों की यह करतूत कोई नई नहीं है. इससे पहले भी साइबर अपराधियों ने पूर्व DG सुरेश कुमार भरद्वाज, DG आलोक राज, ADG नैय्यर हसनैन खान, ADG CID विनय कुमार से लेकर सारण रेंज के DIG मनु महाराज और IAS धर्मेंद्र कुमार के अतिरिक्त मंत्री संतोष सुमन, पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा, हम प्रवक्ता डॉ दानिश रिजवान तक की फेक आईडी बनकार कर साइबर अपराधी लोगों को  ठगने की कोशिश कर चुके हैं. कुछ मामलों में वो कामयाब भी हो गए लेकिन, अधिकतर मामलों में साइबर अपराधियों की यह चालबाजी धरी की धरी रह गई.

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