बिहार के इस दलित ने 1989 में रखी थी राम जन्मभूमि शिलान्यास की पहली ईंट, बोले- जीवन भर नहीं भूलूंगा वह क्षण
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बिहार के इस दलित ने 1989 में रखी थी राम जन्मभूमि शिलान्यास की पहली ईंट, बोले- जीवन भर नहीं भूलूंगा वह क्षण
कामेश्वर चौपार राम मंदिर ट्रस्ट के स्थायी सदस्य हैं. (फाइल फोटो)

9 नवम्बर 1989... यही वो तारीख थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) सरकार की अनुमति के बाद 30 साल पहले अयोध्या (Ayodhya) में प्रस्तावित राम मंदिर (Ram Temple) की नींव पड़ी थी.

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  • Last Updated: July 21, 2020, 12:17 PM IST
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पटना. अब करीब-करीब पक्का हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आगामी 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान राम मंदिर (Ram temple in Ayodhya) के पुनर्निर्माण का शुभारंभ करेंगे और वे ही नींव की पहली ईंट रखेंगे. इस बार के कार्यक्रम में भी नवंबर 1989 में विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम वाला माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. राम मंदिर भूमि पूजन की तैयारियों के साथ ही एक दलित शख्स फिर से सुर्खियों में आ गए हैं जिन्होंने 30 साल पहले अयोध्या में राम जन्मभूमि शिलान्यास की पहली ईंट रखी थी. आपको बता दें कि तय हुआ है कि भूमि पूजन का विधान तीन चरणों में पूरा किया जाएगा. प्रथम चरण में सूर्यादि नवग्रह का आह्वान किया जाएगा. दूसरे चरण में इंद्रादि प्रधान देवताओं एवं गंधर्वों का आह्वान होगा. तीसरे चरण में महागणपति पूजन के साथ भूमिपूजन किया जाएगा.

बिहार के कामेश्वर चौपाल ने रखी थी पहली ईंट

9 नवम्बर 1989..., यही वो तारीख थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) सरकार की अनुमति के बाद 30 साल पहले अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर की नींव पड़ी थी. शिलान्यास के लिए पहली ईंट विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन जॉइंट सेक्रटरी कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) ने रखी थी. चौपाल का नाता बिहार से है और वे दलित समुदाय से आते हैं. इस बार भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार बने राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के 15 सदस्य हैं, जिनमें कामेश्वर चौपाल स्थायी सदस्य बनाए गए हैं.



'बस यही इच्छा कि राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो'
न्यूज 18 से बात करते कामेश्वर चौपाल उस दिन को याद करते हैं और बताते हैं कि शिलान्यास के लिए देश के तकरीबन दो लाख गांवों से ईंटें आईं थीं. संतों द्वारा एक दलित व्यक्ति से मंदिर का शिलान्यास करवाना मेरे लिए वैसा ही था जैसे राम जी द्वारा शबरी को बेर खिलाना. यह ऐतिहासिक पल मेरे और दलितों के लिए गर्व का विषय है. अब तो सिर्फ यही इच्छा है कि मेरे सामने राम मंदिर बन जाए. मैं मिथिला की भूमि से हूं इसलिए मैं इसके लिए अति उत्सुक हूं. अब भगवान श्रीराम की कृपा से ये वक्त आ गया है. अब तो सिर्फ यही कामना है कि बिना विघ्न के ये कार्य मेरे जीवित रहते पूर्ण हो जाए.

'जीवन भर नहीं भूलूंगा गर्व की अनुभूति से भरा वह क्षण'

66 साल के हो चुके चौपाल कहते हैं कि पहली ईंट रखने वाला पल मैं जीवन भर नहीं भूल पाउंगा. वो क्षण हमें हमेशा गर्व का अहसास करवाता है. गौरतलब है कि राम मंदिर की नींव के लिए पहली ईंट रखने के साथ ही चौपाल इतने मशहूर हो गए कि वे दो बार बिहार विधान परिषद के सदस्य भी बने.

बता दें कि भगवान श्रीराम का नाता बिहार से भी रहा है. उनकी पत्नी माता सीता का जन्म बिहार के सीतामढ़ी में हुआ था. तब से लेकर सीतामढ़ी और अयोध्या के रिश्ते को प्रगाढ़ माना जाता है. जब अयोध्या में राममंदिर के बनाने के लिए संघर्ष चल रहा था तब विश्व हिन्दू परिषद के आहवान पर राममंदिर के निर्माण के लिए बिहार से कामेश्वर चौपाल भी ईंट लेकर अयोध्या पहुंचे थे.
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