बिहार इलेक्शन रिजल्ट : पहले से लिखी जा चुकी थी जहानाबाद में एनडीए की 'हार की स्क्रिप्ट'

अंदरखाने से जो खबर आ रही है उसके मुताबिक एनडीए प्रत्याशी अभिराम शर्मा की हार का एक और कारण जहानाबाद में एनडीए का अंदरूणी स्वार्थ था. अभिराम शर्मा का स्थानीय रालोसपा सांसद अरूण कुमार का खास न होना भी हार का एक बड़ा फैक्टर है

Amrendra Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 14, 2018, 5:25 PM IST
बिहार इलेक्शन रिजल्ट : पहले से लिखी जा चुकी थी जहानाबाद में एनडीए की 'हार की स्क्रिप्ट'
जहानाबाद से एनडीए/महागठबंधन के प्रत्याशी
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 14, 2018, 5:25 PM IST
बिहार उपचुनाव में जहानाबाद सीट राजद ने जीत ली है. राजधानी पटना से सटी ये सीट दोनों दलों के लिये प्रतिष्ठा का विषय थी लेकिन बाजी राजद के पाले में गई. हार-जीत का ऐलान तो शाम के साढ़े तीन बजे हुआ लेकिन खुद जहानाबाद से जेडीयू के उम्मीदवार अभिराम शर्मा ने सुबह में ही रूझानों को देख कर अपनी हार को तय मान लिया और मतगणना समाप्त होने के पहले ही मतगणना केंद्र को छोड़कर चले गये.

उनका वो बयान जिसमें उन्होंने राजद की जीत को शहर के लिये दुर्भाग्य तक कह डाला जो की काफी हद तक उनकी हार की पुष्टि कर रहा था. इस सीट से राजद ने वहां के विधायक रहे मुंद्रिका प्रसाद यादव के बेटे कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव को टिकट दिया था जबकि एनडीए ने जहानाबाद के पूर्व विधायक अभिराम शर्मा पर दाव खेला था. दोनों दलों के नेताओं ने सीट के लिये जमकर प्रचार भी किया लेकिन बाजी हाथ लगी महागठबंधन के सुदय यादव ने अभिराम शर्मा को 35 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया.

अभिराम शर्मा को 41255 वोट जबकि सुदय यादव को 76568 वोट मिले. ऐसा माना जा रहा है कि ऐन वक्त पर दलित नेता जीतन राम मांझी के महागठबंधन में जाने ने चुनावी दाल में तड़का का काम किया और ऐन वक्त पर जिले के लगभग 40 हजार महादलित और दलित तबके के वोटों का पूरा ध्रुवीकरण महागठबंधन के खेमे में हो गया. सुदय यादव जहानाबाद के लिये नये चेहरे थे लेकिन उन्होंने अपने पिता के निधन से खाली हुई सीट पर वैसा ही समर्थन हासिल किया जैसा कि 2015 मेें उनके पिता मुंद्रिका यादव ने किया था.

अंदरखाने से जो खबर आ रही है उसके मुताबिक एनडीए प्रत्याशी अभिराम शर्मा की हार का एक और कारण जहानाबाद में एनडीए का अंदरूणी स्वार्थ था. अभिराम शर्मा का स्थानीय रालोसपा सांसद अरूण कुमार का खास न होना भी हार का एक बड़ा फैक्टर है शायद यही कारण था कि अरूण कुमार खुद प्रचार करने भी नहीं आये थे. अभिराम शर्मा अरूण कुमार से दूर हैं तो जेडीयू के अरबपति सांसद किंग महेंद्र के खास. इसी कारण उन्हें पिछली बार टिकट काटने वाले नीतीश कुमार ने इस बार टिकट दिया लेकिन अभिराम टिकट पाकर भी वोट पाने में फिलहाल पूरी तरह से नाकाम रहे.

सांसद अरूण कुमार के करीबी रहे सूत्रों की मानें तो इस सीट से अरूण कुमार अपने वकील बेटे रितुराज को भी टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन रालोसपा के अंदर मची कहल के कारण उनकी ये मंशा पूरी नहीं हुई और ऐन वक्त पर अभिराम को ही टिकट दिया गया. शायद यही कारण था कि स्थानीय सांसद होने के बावजूद अरूण ने एनडीए प्रत्याशी के लिये एक दिन भी चुनाव प्रचार नहीं किया.

इस सीट से कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव की जीत से इलाके में राजद का भी प्रभाव बरकरार रहेगा और उसे इस बात की तसल्ली होगी कि लालू के जेल जाने के बाद भी इस इलाके में जनाधार खिसका नहीं है. जहानाबाद की सीट से मिली जीत को राजद तेजस्वी की कामयाबी से भी भुना सकती है जिन्होंने अपने पिता की मौजूदगी में प्रचार की कमान संभाली थी.

वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और एनडीए आमने-सामने थे. राजद के मुंद्रिका सिंह यादव को 76,458 वोट मिले थे, जबकि एनडीए के रालोसपा के प्रत्याशी प्रवीण कुमार को 46,137 वोट मिले थे. इससे पहले 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में जेडीयू के अभिराम शर्मा ने ही इस सीट पर आरजेडी के सच्चितानंद यादव को हराया था. अभिराम शर्मा को उस समय 35,508 वोट और आरजेडी के सच्चिदानंद यादव को 26,941 वोट मिले थे.
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