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बिहार के डिप्टी सीएम ने पूछा- किसी ने कभी दुर्गा या सरस्वती मां को घूंघट में देखा है?

Neel kamal | News18 Bihar
Updated: November 21, 2019, 2:57 PM IST
बिहार के डिप्टी सीएम ने पूछा- किसी ने कभी दुर्गा या सरस्वती मां को घूंघट में देखा है?
सुशील कुमार मोदी ने ये बातें पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं. (फाइल फोटो)

सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gahlaut) ने भी कहा था कि समाज को किसी महिला को घुघंट में कैद करने का क्या अधिकार है?

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पटना. कुछ दिन पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gahlaut) ने कहा था कि समाज को किसी महिला को घूंघट में कैद करने का क्या अधिकार है? उन्होंने कहा था कि जब तक घूघंट नहीं हटेगा महिलाएं कभी आगे नहीं बढ़ सकती हैं. बुधवार को गहलोत के इस बयान का बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने भी समर्थन किया और कुछ ऐसी ही बातें कहीं. उन्होंने कहा कि किसी ने कभी दुर्गा मां या सरस्वती मां और लक्ष्मी माता को घूघंट में देखा है क्या?

अधिकार के साथ कर्तव्य भी जानें बच्चे

दरअसल, बिहार के उपमुख्‍यमंत्री मोदी वर्ल्ड चिल्ड्रेन डे के मौके पर पटना के अधिवेशन भवन में महिला विकास निगम द्वारा आयोजित संयुक्त राष्‍ट्र बाल अधिकार समझौता की 30वीं वर्षगांठ पर राज्यस्तरीय किशोर-किशोरी शिखर सम्मेलन में पहुंचे थे. बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बच्चों को अब उनके अधिकार ही नहीं, बल्कि उनके कर्तव्य को भी बताने की जरूरत है. साथ ही उन्हें दी जाने वाली सुविधा नहीं मिल रही है तो इसका विरोध भी बच्‍चों को करना चाहिए.

खुद का दिया उदाहरण

डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने इस मौके पर अपना उदाहरण भी दिया कि कैसे वह अपने बच्चों के स्कूल में पैरेंट-टीचर मीट के दौरान खुद भी जाया करते थे. उन्होंने यह भी कहा कि दहेज प्रथा खत्म करने के लिए लड़कियों को ही आगे आना होगा और बाल-विवाह के साथ दहेज प्रथा खत्म करने में लड़कों को भी लड़कियों की मदद करनी होगी. सुशील मोदी ने वहां अधिवेशन भवन में बैठे बच्चों से कहा कि कानून बनाने से समाज में बदलाव नहीं लाया जा सकता, बल्कि समाज में जागृति और शिक्षा से ही बदलाव आ सकता है.

दहेज प्रथा रोकने के लिए आगे आएं लड़कियां

दहेज प्रथा रोकने के लिए लड़के-लड़कियों को आगे आना होगा. डिप्‍टी सीएम ने कहा कि लड़कियां दहेज का विरोध तभी कर सकती हैं, जब वह अपने पैरों पर खड़ी होंगी. इसके बाद ही वह दहेज देने के खिलाफ माता-पिता से लड़ सकती हैं. इस मौके पर महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक एन. विजय लक्ष्मी ने कहा कि आज भी बिहार जैसे राज्य में बाल विवाह की दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा है. ऐसे में बच्‍चों को अपने माता-पिता को जागरूक करने की जरूरत है. बच्‍चों को पढ़ाई कर अपने पैरो पर खड़ा होना होगा, ताकि बाल विवाह और दहेज जैसी प्रथा का खुलकर विरोध कर सकें.

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First published: November 21, 2019, 1:54 PM IST
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