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क्या बिहार महागठबंधन में बिखराव के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं !

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: January 10, 2019, 4:21 PM IST
क्या बिहार महागठबंधन में बिखराव के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं !
फाइल फोटो

RJD के स्टैंड से इतर कांग्रेस ने साफ कहा कि वह आर्थिक आधार पर आरक्षण बिल को लाने के लिए प्रतिबद्ध थी इसलिए समर्थन करती है. वहीं जीतनराम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा ने भी इसका समर्थन किया.

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अपर कास्ट को आर्थिक आधार पर रिजर्वेशन देने के लिए संविधान का 124वां संशोधन लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो गया. अब राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह संविधान का हिस्सा हो जाएगा और इकोनॉमिकली बैकवर्ड क्लास को रिजर्वेशन देने का रास्ता साफ हो जाएगा. इस बिल का दोनों सदनों में महज आरजेडी और ओवैसी की पार्टी ने विरोध किया और अन्नाद्रमुक ने दोनों ही सदनों में वोटिंग प्रोसेस में हिस्सा नहीं लिया. इसके अलावा देश के सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया. दिलचस्प ये रहा कि बिहार में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस, हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (हम) और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने भी इसका समर्थन किया.

जाहिर है इस मसले पर अपने ही महागठबंधन में आरजेडी अकेली पड़ गई. कांग्रेस ने साफ कहा कि वह इस बिल को लाने के लिए प्रतिबद्ध थी इसलिए इसका समर्थन करती है. हालांकि कांग्रेस ने केन्द्र सरकार के बिला लाने के टाइमिंग पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन कांग्रेस का आरजेडी से अलग रुख रहा.

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इसी तरह हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतनराम मांझी ने भी साफ ऐलान किया कि उन्हें किसी के रुख से कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि देर से ही सही केंद्र ने अच्‍छा फैसला लिया है, लेकिन आरक्षण की सीमा 10 से 15 फीसद की जानी चाहिए. हालांकि उन्होंने आरक्षित वर्ग के रिजर्वेशन की सीमा बढ़ाने की भी मांग की.

इसी तरह महागठबंधन के दूसरे साथी उपेन्द्र कुशवाहा ने भी सवर्ण आरक्षण बिल का समर्थन किया और कहा कि उनके क्षेत्र के सवर्ण युवक उन्हें आरक्षण वाला मंत्री कहते थे, लेकिन अब नहीं कहेंगे. हालांकि उन्होंने कहा कि आरक्षण से समृद्धि नहीं आती है. सच बात तो ये है कि आरक्षण उन्हें मिलना चाहिए जो सरकारी स्कूल में पढ़ें हों .

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एकजुट होकर एनडीए को हराने का दावा करने वाले महागठबंधन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं होने के संकेत इस बात से भी मिलने लगे हैं कि मंगलवार को कांग्रेस विधायक की बैठक में 20 लोकसभा सीटों की मांग रख दी गई है. ऐसे में गठबंधन के दूसरे सहयोगियों के लिए मुश्किल स्थिति खड़ी हो गई है.वहीं आज राजभवन मार्च में, आरजेडी के साथ कांग्रेस, सपा, लोकतांत्रिक जनता दल के नेता तो तेजस्वी यादव के साथ शामिल रहे, लेकिन सीट शेयरिंग से नाराज जीतनराम मांझी इसमें नहीं गए. जबकि उन्होंने 7 जनवरी को कहा था कि वे मार्च में शामिल होंगे. हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी के नेता दानिश रिजवान को जरूर भेजा, लेकिन यह महागठबंधन के भीतर चल रहे उथल-पुथल के ही संकेत हैं.

बुधवार को बिहार की सियासी सरगरमी तब बढ़ गई जब कांग्रेस और आरजेडी के एक-एक विधायकों ने नीतीश कुमार से एक अणे मार्ग स्थित सीएम आवास में जाकर मुलाकात की. इसी मुलाकात के बाद फिर से यह कयास लगाया जा रहा है कि क्या दलबदल का खेल फिर से शुरू होने वाला है? इस बीच लालू यादव की जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद महागठबंधन कितना एकजुट रह पाएगा इसको लेकर सवाल हैं.

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First published: January 10, 2019, 4:21 PM IST
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