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...तो JDU में PK का खेल हुआ खत्म! पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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Anand Amrit Raj | News18 Bihar
Updated: January 29, 2020, 10:21 AM IST
...तो JDU में PK का खेल हुआ खत्म! पढ़ें इनसाइड स्टोरी
जेडीयू से निकाले जा सकते हैं प्रशांत किशोर. (फाइल फोटो)

सीएम नीतीश (CM Nitish Kumar) ने जिस तरह से PK के मुद्दे पर अपनी बेबाक राय जाहिर की है, इससे यह स्‍पष्‍ट है कि वह PK की एक्टिविटी से बेहद नाराज हैं.

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पटना. क्या जेडीयू में प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का खेल ख़त्म हो गया है? यह सवाल इसलिए भी उठने लगा है, क्योंकि पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने PK पर खुल कर कड़े शब्दों में निशाना साधा है. सीएम नीतीश की पीके से कितनी अधिक नाराजगी है यह उनकी प्रतिक्रिया से समझी जा सकती है. मंगलवार को मीडिया के एक सवाल के जवाब में सीएम नीतीश ने कहा, 'अमित शाह (Amit Shah) ने मुझे कहा प्रशांत किशोर को जेडीयू (JDU) में शामिल करने के लिए, तब मैंने उन्हें पार्टी में शामिल कराया. पीके से पूछ लीजिए रहना है या नहीं? यदि रहना है तो पार्टी लाइन पर रहना होगा, नहीं तो जहां जाना है जाएं. हम किसी को पकड़ कर नहीं रखते हैं.'

दरअसल, बीते दिनों बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर प्रशांत किशोर के ट्वीट ने बीजेपी और जेडीयू के संबंध में थोड़ी खटास भर दी थी. बीजेपी के नेताओं ने पीके पर खुल कर हमला भी बोला था. जेडीयू की तरफ़ से बीच बीच में कुछ नेता पीके पर निशाना साधते थे, लेकिन इशारों-इशारों में. लेकिन, जब पत्रकारों ने सीएम नीतीश से पीके के ट्वीट पर सवाल किया तो उन्होंने कहा, हमारे यहां ट्वीट का कोई मतलब नहीं, जिसे ट्वीट करना है करें. हमारी पार्टी में बड़े और बुद्धिजीवी लोगों की नहीं है. सब जमीनी स्तर के सामान्य लोग हैं.

प्रशात किशोर के सुशील मोदी पर ट्वीट के बाद बिहार में एऩडीए की सियासत में काफी हलचल हो गई थी उसे सीएम नीतीश के बयान ने शांत करने की कोशिश की.


सीएम नीतीश ने जिस तरह से इस मुद्दे पर अपनी बेबाक राय जाहिर की है इससे दो बातें स्पष्ट हो गईं. पहला यह कि सीएम नीतीश पीके की एक्टिविटी को लेकर बेहद नाराज हैं. दूसरा यह कि वे एनडीए गठबंधन को नुकसान पहुंचाने वालों को बर्दाश्त नहीं करने जा रहे.



गौरतलब है कि पीके को लेकर जेडीयू का हमलावर रुख जेडीयू के बैठक के पहले ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने साफ़-साफ़ लहजों में कह दिया था कि जेडीयू को न तो पीके की ज़रूरत है और न ही पवन वर्मा की. वहीं, जेडीयू के ही विधायक श्याम बहादुर ने तो नीतीश कुमार से साफ़-साफ़ मांग कर दी कि प्रशांत किशोर की वजह से पार्टी को नुकसान हो रहा है. प्रशांत किशोर जाली आदमी है और उन्हें नीतीश कुमार तुरंत पार्टी से निकाल बाहर करें.

पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करने पर प्रशांत किशोर और सीएम नीतीश कुमार के रिश्तों में अब खटास आ गई है.


बहरहाल, प्रशांत किशोर के प्रति जेडीयू के बड़े से लेकर छोटे नेताओं के तल्ख़ रवैये से साफ़ है की जेडीयू अब प्रशांत किशोर को तवज्जो देने नहीं जा रही है. यानी जेडीयू में पीके के दिन लद गए, वहीं जेडीयू के बड़े नेताओं के ख़ुद पर हमले से पीके तिलमिला गए हैं. ख़ासकर नीतीश कुमार के हमले के बाद. इसलिए उन्होंने ट्वीट कर नीतीश कुमार के सवालों का जवाब देने की बात कह रहे हैं. हालांकि, सवाल-जवाब के सिलसिले के बीच अब साफ़ हो गया है कि प्रशांत किशोर के जेडीयू में दिन बस गिने चुने बचे हैं.

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First published: January 29, 2020, 9:46 AM IST
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