East Central Railway : दोगुनी हो गई है मालगाड़ियों की स्पीड, माल ढुलाई में लग रहा कम वक्त
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East Central Railway : दोगुनी हो गई है मालगाड़ियों की स्पीड, माल ढुलाई में लग रहा कम वक्त
पूर्व मध्य रेल ने मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ाई. (प्रतीकात्मक फोटो)

पूर्व मध्य रेल के मुताबिक, पहले मालगाड़ियों की औसत गति जहां लगभग 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटा हुआ करती थी, वहीं अब यह 50-55 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच गई है.

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पटना. पूर्व मध्य रेल (East Central Railway) ने मालगाड़ियों (Goods Trains) की स्पीड (speed) बढ़ाई है. स्पीड के बढ़ने का सबसे ज्यादा फायदा व्यापारी वर्ग पर पड़ा है. मालगाड़ी की गति में वृद्धि हो जाने से पहले जहां कोई सामान 24 घंटे में पहुंचता था, वहीं अब यह 12 से 14 घंटा में पहुंच रहा है. मालगाड़ियों की यह बढ़ी हुई गति देश की अर्थव्यवस्था के विकास में मददगार सिद्ध होगी.

आपको बताते चलें कि पूर्व मध्य रेल ने 19 और 20 जून को क्रमशः 55 और 52 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से मालगाड़ियों का परिचालन किया. इस तरह उसने दैनिक औसत गति के मामले में भारतीय रेल के सभी 17 क्षेत्रीय रेलों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. मासिक दृष्टिकोण से 1 जून से 20 जून तक मालगाड़ियों की मासिक औसत गति 48 किलोमीटर प्रतिघंटे रही. इस तरह मासिक औसत गति में भी पूर्व मध्य रेल ने पूरे भारतीय रेल में दूसरा स्थान हासिल किया है.

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बुनियादी ढांचे का किया विकास
पूर्व मध्य रेल के मुताबिक, उसकी कोशिश रही है कि कि मेल/एक्सप्रेस की तरह मालगाड़ियों का भी परिचालन बिना किसी रुकावट के किया जा सके. पहले मालगाड़ियों की औसत गति जहां लगभग 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटा हुआ करती थी, वहीं अब यह 50-55 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच गई है. पिछले दो से तीन वर्षों में रेल के बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े कई काम पूरे किए गए हैं, उसी का नतीजा है कि मेल /एक्सप्रेस के बाद मालगाड़ियों के परिचालन पर भी दिखने लगा है. वर्ष 2019-20 में ट्रैकों के नवीनीकरण, दोहरीकरण, विद्युतीकरण जैसे काम पूरा करते हुए 12 महत्वपूर्ण रेलखंडों में गतिसीमा में वृद्धि की गई है. ऐसे ही बुनियादी कामों का नतीजा है कि मेल/एक्सप्रेस के साथ-साथ मालगाड़ियों की गतिसीमा दोगुनी हुई है.

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धनबाद मंडल माललदान के मामले में टॉप पर

गौरतलब है कि पूर्व मध्य रेल का धनबाद मंडल माललदान के मामले में भारतीय रेल में पहले स्थान पर है. माल परिवहन के दृष्टिकोण से प्रमुख जोन होने के कारण यह उपलब्धि अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है. सिर्फ धनबाद मंडल में प्रतिदिन औसतन 80 रैक कोयले की लोडिंग की जाती है. इसके अलावा खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद आदि सामानों की भी आवाजाही होती है. मालपरिवहन में लगने वाला समय अब लगभग आधा हो गया है, जिससे व्यापारी वर्ग काफी लाभान्वित हो रहा है.
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