600 करोड़ रुपए के राइस मिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, मास्टर माइंड देवेश गिरफ्तार

बिहार के राइस मिल घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार (सांकेतिक चित्र)
बिहार के राइस मिल घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार (सांकेतिक चित्र)

बिहार में हुए धान घोटाला उर्फ राइस मिल घोटाला मामला बहुत बड़ा मामला होता दिख रहा है , इस मामले में अबतक करीब एक हजार से ज्यादा FIR दर्ज हो चुके हैं.

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नई दिल्ली. बिहार में हुए राइस घोटाला (Rice Mill Scam) मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED ) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए देवेश नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. देवेश मूल रूप से दरभंगा का रहने वाला है और इसकी कम्पनी का नाम है जगदंबा फ़ूड. इस कंपनी और आरोपी देवेश के खिलाफ पिछले काफी दिनों से केंद्रीय जांच एजेंसी ED तफ्तीश कर रही थी. उसी तफ्तीश के दौरान आरोपी देवेश के खिलाफ काफी महत्वपूर्ण सबूतों को टीम ने इकट्ठा किया, उसके बाद इससे लगातार पूछताछ की जा रही थी.

पूछताछ में अधिकारियों को नहीं कर रहा था मदद

पूछताछ की प्रक्रिया पटना स्थित ED दफ्तर में ही होती थी लेकिन ED के सूत्रों की अगर मानें तो वो पूछताछ की प्रक्रिया में जांचकर्ताओं को थोड़ा सा भी मदद नहीं कर रहा था बल्कि लगातर सच को छिपाने का प्रयास कर रहा था. लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते हुए उस आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. अब उसको रिमांड पर लेने के बाद आगे की पूछताछ की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा.



क्या है धान उर्फ राइस मिल घोटाला ?
बिहार में हुए धान घोटाला उर्फ राइस मिल घोटाला मामला बहुत बड़ा मामला होता दिख रहा है , इस मामले में अबतक करीब एक हजार से ज्यादा FIR दर्ज हो चुके हैं. बिहार में इस घोटाले को 'बिहार का दूसरा चारा घोटाला' के तौर पर भी देखा जा रहा है क्योंकि इस घोटाले को भी उसी अंदाज और तर्ज पर उस घोटाले की वारदात को अंजाम दिया गया है जिस तरह से देश के काफी प्रसिद्ध चारा घोटाले में स्कूटर/बाइक/ साइकिल का प्रयोग दिखाया गया था. उसी तरह से कई आरोपियों ने इस राइस घोटाले को अंजाम देने के फर्जी राइस मिल और नकली ट्रांसपोर्टर बनकर कई लोगों ने करीब 600 करोड़ से ज्यादा के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है.

विधानसभा में भी उठ चुकी है आवाज

पिछले कुछ समय से इस घोटाला के खिलाफ राजनीतिक गलियारों से लेकर विधानसभा के अंदर तक कई बार आवाजें उठ चुकी है , लेकिन इस मामले पर बिहार सरकार ने भी इस मामले पर ठोस कार्रवाई करने का आदेश दे चुकी है और राज्य स्तरीय आर्थीक अपराध शाखा और सतर्कता विभाग को भी निर्देश दे चुकी है कि इस मामले के किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाए ,जो भी आरोपी हैं उसके खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाए.

कई नौकरशाहों की भूमिका भी संदिग्ध

केंद्रीय जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले में काफी दलालों सहित कई बड़े नौकरशाहों यानी ब्यूरोक्रेट की भी भूमिका संदिग्ध है जिसके आदेश और उनके देखरेख होने के वावजूद इतना बड़ा फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था. इस मामले की जड़ की शुरुआत होती है मुजफ्फरपुर से जहां के अधिकारियों ने सबसे पहले बिहार सरकार को ये सूचित किया था कि उस वक्त होने वाली बारिश से काफी धान की फसल बर्बाद हो जाएगा. इसके साथ ही ये भी सलाह दिया गया था कि इस धान को पश्चिम बंगाल भेजकर वहां उसको 'उसना चावल' में तब्दील करवाया जा सकता है. इससे काफी धान बीज को बारिश में सड़ने से बचाया जा सकता है. मामले की नजाकत को देखते हुए उस वक्त सरकार ने तत्काल उससे संबंधित आदेश पारित कर दिया गया था.

इन जिलों के अधिकारी को मिला था निर्देश

इसी के आड़ में दरभंगा, कटिहार, अररिया , सुपौल, पूर्णिया , मधेपुरा , सहरसा सहित करीब 10 जिलों के ब्यूरोक्रेट को इस मामले में लिखित निर्देश दिया गया था कि उस बारिश में भीगें हुए धान को पश्चिम बंगाल भेजा जाए , लेकिन इसी निर्देश के बाद घोटाले की नींव रखी गई और उसके काफी समय के बाद इस मामले की जानकारी राज्य सरकार को हुई कि करीब 17 लाख मीट्रिक टन के उस धान को न तो पश्चिम बंगाल भेजा गया लेकिन उसके बदले में मनचाहा करोड़ों रुपये का ट्रांसपोर्ट और ट्रांसपोर्टर को भुगतान किया गया.

ED के राडार पर कौन-कौन से राइस मिल ?

ED के राडार पर दर्जनों राइस मिल और उनके मालिक हैं और उनके खिलाफ इस मामले में तफ्तीश चल रही है लेकिन अगर कुछ प्रमुख राइस मिल की अगर बात करें तो - शीतग्राम पानीशाला रायगंज , अनिकेत मनीष राइस मिल करन दिग्ग्घी, उतर दिनाजपुर , मेसर्स रायगंज फूड ग्रेन , रायगंज फूडग्रेन प्राइवेट लिमिटेड , बाबा राइस मिल, मां जगदंबा फूड , सहित दर्जनों कंपनियां हैं.
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