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बिहार: जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर JDU के आठ सांसदों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कही यह बात

जनता दल यूनाइटेड के सांसदों ने पीएम मोदी से जातीय जनगणना कराने की मांग की.

जनता दल यूनाइटेड के सांसदों ने पीएम मोदी से जातीय जनगणना कराने की मांग की.

Bihar News: सांसदों ने अपने पत्र में लिखा कि संसद में मॉनसून सत्र में सरकार द्वारा बताया गया है कि 2021 की जनगणना जाति आधारित नहीं होगी. इस सूचना से हम सब स्पष्ट स्तब्ध एवं दुखी हैं क्योंकि हमारी केंद्र सरकार पिछड़ों एवं वंचितों के कल्याण के लिए जानी जाती है.

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    पटना. बिहार में जातिगत जनगणना (Caste Census) एक बड़ा मुद्दा बन गया है और इसको लेकर प्रतिदिन सियासी बयान भी सामने आ रहे हैं. खास तौर पर विपक्षी दलों द्वारा सीएम नीतीश कुमार पर इस मुद्दे को लेकर ढुलमुल रवैया अख्तियार करने का आरोप लगाया जाता रहा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) अक्सर यह कहते हैं कि सीएम नीतीश ही जातीय जनगणना नहीं चाहते हैं. हालांकि सीएम नीतीश कुमार(CM Nitish Kumar) स्वयं कई बार कह चुके हैं कि गरीब-गुरबों के हक के लिए देश में जातिगत जनगणना कराना जरूरी है. अब बिहार के जेडीयू के कई सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Prime Minister Narendra Modi) को इस बाबत पत्र लिखा है और जाति आधारित जनगणना कराने की मांग की है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिन जेडीयू सांसदों ने चिट्ठी लिखी है उनमें सीतामढ़ी सांसद सुनील कुमार पिंटू, झंझारपुर सांसद आरपी मंडल, गया सांसद विजय कुमार मांझी, सुपौल सांसद दिलेश्वर कामात, गोपालगंज सांसद डॉ आलोक कुमार सुमन, वाल्मीकिनगर सांसद सुनील कुमार, पूर्णिया सांसद संतोष कुशवाहा और जहानाबाद सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी के नाम शामिल हैं. इन सांसदों ने संयुक्त आवेदन देकर देश में जातिगत जनगणना करवाने की मांग की है.

    इन सांसदों ने अपने पत्र में लिखा कि संसद में मानसून सत्र में सरकार द्वारा बताया गया है कि 2021 की जनगणना जाति आधारित नहीं होगी. इस सूचना से हम सब स्पष्ट स्तब्ध एवं दुखी हैं क्योंकि हमारी केंद्र सरकार पिछड़ों एवं वंचितों के कल्याण के लिए जानी जाती है. यह सूचना निराशाजनक है. आज देश के अधिकांश लोग जाति आधारित जनगणना का समर्थन करते हैं.

    सांसदों ने लिखा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या पता नहीं चलेगी तब तक उनके फायदे की योजनाएं कैसे बनेंगे.  जाति आधारित जनगणना से एससी- एसटी के अलावा भी अन्य कमजोर वर्ग हैं, उनकी वास्तविक संख्या की जानकारी होगी और सभी के विकास के कार्यक्रम बनाने में सहायता मिलेगी. सभी ओबीसी एवं अति पिछड़ा समाज के सांसदों का मानना है कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए.

    सांसदों के हस्ताक्षरित पत्र में आगे लिखा गया है कि बिहार विधानमंडल में 18 फरवरी 2019 एवं 27 फरवरी 2020 को सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया था तथा इसे केंद्र सरकार को भेजा गया था. अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए. हम सभी सांसदों का आग्रह है कि जातिगत जनगणना यथाशीघ्र कराई जाए.

    बता दें कि इसी क्रम में गुरुवार को राजद नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार को घेरते हुए एक बार फिर मांग की कि बिहार में राज्‍य सरकार के खर्च पर जातीय जनगणना कराई जाए. इसके साथ ही उन्‍होंने मांग की कि जाति जनगणना कराने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानसभा का एक प्रतिनिधिमंडल बनाएं.

    विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्‍वी ने कहा कि हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विधानसभा की एक कमेटी बने और जातिगत आधार पर जनगणना के लिए प्रधानमंत्री से कमेटी बात करें लेकिन यदि केंद्र सरकार इस पर विचार नहीं करती है तो राज्य सरकार अपने खर्चे पर जातिगत जनगणना कराए. तेजस्‍वी ने आरोप लगाया कि उन्‍हें सदन में प्रस्ताव लाने से बार-बार रोका जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि सीएम नीतीश दुविधा से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

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