Inside Story: कुशवाहा और सहनी जैसे नेताओं को भाव देने के मूड में क्यों नहीं दिख रही RJD?
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Inside Story: कुशवाहा और सहनी जैसे नेताओं को भाव देने के मूड में क्यों नहीं दिख रही RJD?
महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर अब पेंच फंसा हुआ है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

महागठबंधन (Grand Alliance) में एक फॉर्मूले पर गंभीरता से चर्चा चल रही है, जिसके तहत RJD 135 से 140, कांग्रेस 45 से 50, RLSP 23 से 25, सीपीआई माले 12 से 15, VIP 8-10, CPI -3-5 और CPIM को 2-3 सीटें मिल सकती हैं.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 4, 2020, 10:38 AM IST
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पटना. ऐसा माना जा रहा है कि सितंबर के तीसरे या चौथे हफ्ते में बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए तारीखों का ऐलान हो सकता है. इसके बावजूद अभी तक महागठबंधन (Grand Alliance) में सीटों का सियासी समीकरण फाइनल नहीं हो पाया है. सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन में आरजेडी (RJD) के रुख ने छोटी पार्टियों और उसके नेताओं को परेशान कर दिया है. खासतौर से परेशानी आरएलएसपी और वीआईपी को हो रही है, जिसके मुखिया उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी लगातार जल्द से जल्द सीट बंटवारे की मांग करते आ रहे हैं. भले ही मुकेश सहनी बार-बार बात बन जाने का दावा करें, लेकिन अभी भी आरजेडी और कांग्रेस ने उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी को कोई भरोसा नहीं दिया है.

महागठबंधन के भीतर के समीकरण को देखें तो सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है. उसके बाद कांग्रेस का स्थान है. इन दोनों के अलावा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी, मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी है. इसके अलावा वामदलों और सीपीआईएमएल के भी साथ चुनाव लड़ने पर सहमति बनी हुई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा भी इस बार बिहार में आरजेडी से कुछ सीटों की मांग कर रही है. झारखंड में आरजेडी के एकमात्र विधायक होने के बावजूद उसे हेमंत सरकार में मंत्री बनाया गया है. अब जेएमएम बिहार में अपना पांव पसारना चाह रही है.

सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी किसी भी कीमत पर 150 से कम सीटें पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है. ऐसे में बाकी बचे हुए दलों में बची हुई 90-93 सीटों में से ही बंटवारा करना होगा. सीट बंटवारे की असल समस्या यही है. कांग्रेस भी अपने लिए पिछली बार की तुलना में ज्यादा सीटें मांग कर रही है. कांग्रेस पिछली बार 41 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन इस बार 80 सीटों पर दावा किया जा रहा है. कांग्रेस 50-60 सीटों के बीच चुनाव लड़ने पर राजी हो सकती है. इसके अलावा वामदलों और सीपीआईएमएल को भी गठबंधऩ में रखने पर सहमति पहले ही बन गई है.



आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव छोटे क्षेत्रीय दलों को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. उनका मानना है कि आरएलएसपी और वीआईपी जैसी छोटी पार्टियों को अगर सीटें दी जाती हैं तो कम संख्या होने के चलते उनके विधायक पाला बदलकर दूसरे खेमे में जा सकते हैं. लिहाजा, वे इन पार्टियों के उम्मीदवारों को आरजेडी या कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ाना चाहते हैं. इससे पहले आरजेडी के इसी टालमटोल के बाद जीतनराम मांझी ने नाउम्मीदी में पाला बदलकर एनडीए का दामन थाम लिया.
सूत्रों की मानें तो अब कांग्रेस भी आरजेडी की इस बात से सहमत दिख रही है. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी की पार्टी को कम सीटें ऑफर की जा सकती हैं. लेकिन, ये दोनों नेता आरजेडी-कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने को राजी नहीं हो रहे हैं. ऐसे में क्या कम सीटों पर ही ऑफर को स्वीकार कर महागठबंधन का हिस्सा बनेंगे? ये देखने वाली बात होगी.
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