बिहार चुनाव 2020: महागठबंधन में हाशिये पर क्यों गए शरद यादव? जानें क्या है CM नीतीश की सियासत
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बिहार चुनाव 2020: महागठबंधन में हाशिये पर क्यों गए शरद यादव? जानें क्या है CM नीतीश की सियासत
शरद यादव की फिर से JDU में वापसी की चर्चा. (फाइल फोटो)

शरद यादव (Sharad Yadav) के जेडीयू में दोबारा शामिल होने की चर्चाओं पर जेडीयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) संबंध निभाने में सबसे आगे रहने वाली शख्शियत हैं.

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  • Last Updated: August 31, 2020, 12:30 PM IST
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 पटना. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव (Sharad Yadav) की जेडीयू में दोबारा वापसी हो सकती है. सूत्र बताते हैं कि अंदरखाने इस बात की कवायद जारी है कि शरद यादव घर वापसी कर लें. कहा तो यह भी जा रहा है कि यह सब सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के कहने पर हो रहा है. जाहिर है अगर ऐसा होता है तो आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh prasad singh) के जेडीयू में जाने की अटकलों के बीच शरद यादव का JDU में जाना महागठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. सवाल यह उठता है कि आखिर महागठबंधन की बुनियाद को मजबूत करने के बाद शरद यादव के बारे में ऐसी चर्चा क्यों हो रही है? राजनीतिक जानकार बताते हैं कि हाल के दिनों में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की तरह ही शरद यादव भी महागठबंधन में हाशिए पर चले गए हैं.

दरअसल, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल के नेता और 2019 में आरजेडी के टिकट से लोकसभा चुनाव लड़े शरद यादव को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था. सिर्फ शरद यादव ही नहीं, कांग्रेस के एक प्रत्याशी को छोड़ महागठबंधन के सभी प्रत्याशियों को हार ही नसीब हुई थी. इसके बाद से ही महागठबंधन में कई तरह के असंतोष के स्वर फूट पड़े थे. खास तौर पर आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ.

बीते फरवरी में महागठबंधन मेें तेजस्वी यादव के नेतृत्व को चुनौती मिलने लगी थी और महागठबंधन के जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी की तिकड़ी की मीटिंग शरद यादव के साथ हुई थी. इस बैठक में शरद यादव को सीएम पद का फेस घोषित करने की मांग उठी थी. जाहिर है इसके बाद से ही आरजेडी और कांग्रेस नेताओं के कान खड़े हो गए थे, क्योंकि इस बैठक में आरजेडी और कांग्रेस के नेता नहीं थे.



जाहिर है कि बिहार की राजनीति में शरद यादव का सीएम फेस के लिए नाम आना सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के लिए चुनौती मानी जाने लगी. दूसरी ओर, शरद यादव के अगुआ बनने के बीच जीतन राम मांझी के स्वर और तेज रूप से मुखर होते चले गए. वहीं, इस बैठक के बाद फिर दिल्ली के पांच सितारा होटल में शरद यादव, प्रशांत किशोर, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी की मीटिंग हुई. इसे सीथे तौर पर विधानसभा चुनाव के तहत आरजेडी पर दबाव बनाने की रणनीति कही गई. यही वजह रही कि कांग्रेस और राजद की गैरमौजूदगी में शरद यादव को महागठबंधन की ओर से सीएम बनाए जाने की बात इन दोनों ही पार्टियों को नागवार गुजरी. इसके बाद से ही अक्सर देखा जाने लगा कि आरजेडी की ओर से शरद यादव को कभी भी किसी अहम मीटिंग में नहीं बुलाया गया. वहीं, जीतन राम मांझी की नाराजगी को भी शरद यादव की महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जाने लगा. वहीं, राजद की कुशवाहा से दूरी बरकरार ही रही.
अब जब शरद यादव की घर वापसी की चर्चा सियासी गलियारे में जोरों पर है तो यह समझा जा रहा है कि मांझी के महागठबंधन से अलग होने के बाद ही कुशवाहा को भी सीट शेयरिंग के मुद्दे पर हैसियत दिखा दी गई है. इसकी पीड़ा कुशवाहा ने यह कहकर जाहिर भी की है कि वह विष पीने को भी तैयार हैं. बहरहाल, शरद यादव के जेडीयू में दोबारा शामिल होने की चर्चाओं पर जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि राजनीति सम्भावनाओं का खेल है.

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि शरद यादव यूं तो रहने वाले एमपी के हैं, लेकिन उनका बिहार की राजनीति में अच्छा-खासा प्रभाव रहा है. खासकर यादव जाति में उनकी कुछ हद तक पैठ मानी जाती है. लालू के समधी चंद्रिका राय, दिवंगत राम लखन सिंह यादव के पोते जयवर्धन यादव के बाद शरद यादव अगर जेडीयू में शामिल होते हैं तो सीएम नीतीश कुमार शरद को सम्मान देने के साथ ही यह सियासी मैसेज देने की भरपूर कोशिश करेंगे कि राजद एक परिवार की पार्टी है और वहां अन्य यादव नेताओं का कोई सम्मान नहीं है.
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