बिहार: मतगणना प्रक्रिया पर उठाए गए तेजस्वी के सभी सवालों के चुनाव आयोग ने दिए जवाब, NDA की जीत को क्लीन चिट

मीडिया से बात करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवासन.
मीडिया से बात करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवासन.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवासन (Chief Electoral Officer HR Srinivasan) ने बताया कि हिलसा में सभी पोस्टल बैलेट की पुनर्मतगणना करायी गयी और इसके बाद भी नतीजा वही आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:53 PM IST
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पटना. बिहार निर्वाचन आयोग (Bihar Election Commission) ने महागठबंधन की ओर से रिकाउंटिंग कराने की मांग को खारिज करते हुए बहुमत पर एनडीए को क्लीन चिट दे दी है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवासन (Chief Electoral Officer HR Srinivasan) ने देर रात मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने राज्यपाल को निर्वाचित सदस्यों की सूची सौंप दी है. चुनाव में धांधली के विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि 11 ऐसे विधानसभा जिसमें जीत का मार्जिन 1 हजार से कम था. उनमें से शिकायत के बाद सिर्फ हिलसा में दोबारा से मतों की गिनती की गई. बाकी जगहों पर पोस्टल बैलेट के आधार पर सही करार दिया गया और रिकाउंटिंग नहीं हुई.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि इन सीटों में चार पर जदयू, तीन पर राजद, एक पर लोजपा, एक पर भाजपा, एक पर सीपीआई व एक पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई है. इस प्रकार इनमें सभी प्रमुख दल शामिल हैं. इनमें एकमात्र हिलसा में 12 वोटों के अंतर से हार-जीत हुई, जहां प्रत्याशी की मांग पर पुनर्मतगणना कराई गई. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार वोटों का अंतर रद्द किए गए पोस्टल बैलेट से कम होने पर ही रद्द किए गए पोस्टल बैलेट की पुनर्मतगणना कराने का प्रावधान है. हिलसा में रद्द किए गए वोटों से वोटों का अंतर कम होने के कारण निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा सभी पोस्टल बैलेट की पुनर्मतगणना करायी गयी और इसके बाद भी नतीजा वही आया.

आयोग ने आरोपों पर दिए जवाब
श्रीनिवासन ने बताया कि 11 में छह विधानसभा क्षेत्रों में पुनर्मतगणना की मांग की गयी थी. इनमें हिलसा को छोड़कर अन्य पांच निर्वाचन क्षेत्रों रामगढ़, मटिहानी, भोरे, डेहरी एवं परबत्ता में रद्द किए गए पोस्टल वोट से जीत-हार के वोटों का अंतर अधिक होने के कारण पुनर्मतगणना की मांग को निर्वाची पदाधिकारी द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया. गोपालगंज के जेडीयू सांसद आलोक कुमार सुमन को भी निर्वाचन आयोग ने क्लीन चिट देते हुए कहा कि जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि काउंटिंग सेंटर पर प्रवेश का आरोप गलत है. शिकायतकर्ता से निर्वाचन आयोग ने अपील की है कि अगर जरूरत हो तो उन्हें आयोग वीडियोग्राफी और डॉक्यूमेंट्स मुहैया कराने को तैयार है. निर्वाची पदाधिकारी द्वारा आरोपों को तथ्यहीन एवं अतार्किक करार दिया.




आयोग ने मतगणना की स्थिति स्पष्ट की
श्रीनिवास ने पोस्टल बैलेट की गिनती पहले नहीं शुरू होने से जुड़े प्रश्न पर कहा कि सभी निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना के दौरान पहले पोस्टल बैलेट की जांच शुरू हुई. उन्होंने बताया कि पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होने के आधे घंटे बाद नियमानुसार ईवीएम वोटों की भी गिनती शुरू की गयी. कई क्षेत्रों में पोस्टल बैलेट की गिनती व ईवीएम वोटों की गिनती साथ-साथ जारी रही. दोनों की गणना की वीडियोग्राफी करायी गयी है और पूरी प्रक्रिया पर माइक्रो ऑब्जर्बर व प्रत्याशियों के अभिकर्ताओं की नजर थी.

तेजस्वी ने EC की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत और महागठबंधन की हार हुई है. एनडीए जहां 125 सीटों के साथ सरकार बनाने जा रही है तो महागठबंधन 110 सीटों के साथ बहुमत से 12 सीटें दूर रह गया. इस बार के चुनाव में पहले की तरह इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ का मुद्दा नहीं उठा है. पहले हर चुनावों में एनडीए पर ईवीएम को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं. हालांकि बिहार में इस बार पोस्टल बैलेट का नया आरोप सामने आया है जिसे आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने जोर-शोर से उठाया है.
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