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इसी महीने हो सकता है बिहार विधान परिषद के चुनावों की तारीख का ऐलान, दांव पर होगी इन नेताओं की साख!

बिहार विधान परिषद चुनाव तारीखों का ऐलान.

बिहार विधान परिषद चुनाव तारीखों का ऐलान.

अप्रैल में राज्य विधान परिषद (Bihar Legislative Council) की 27 सीटें खाली हो गई थीं. इनमें से 17 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है. जबकि इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है.

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पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) से पहले सत्ताधारी जेडीयू-बीजेपी के साथ ही आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन की परीक्षा होने वाली है. अप्रैल में राज्य विधान परिषद (Bihar Legislative Council) की 27 सीटें खाली हो गई थीं. इनमें से 17 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है. ज्यादातर सीटें अभी एनडीए (NDA) के पास हैं, तो वहीं आरजेडी और कांग्रेस को भी कुछ सीटें मिलना तय है. जबकि इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है.

एनडीए को नुकसान हुआ, आरजेडी कोंग्रेस को फायदा हुआ
बिहार विधान परिषद चुनाव पर भी कोरोना का प्रभाव पड़ा है. चुनाव की तारीख बढ़ चुकी है, लेकिन राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद अब ये कयास लगाए जा रही है कि विधान परिषद की चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा. विधान परिषद के 17 सदस्यों का कार्यकाल 6 मई को, जबकि राज्यपाल कोटे के 10 सदस्यों का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो गया. राज्यपाल कोटे की दो सीटें पहले से खाली थीं. चुनाव 17 सीटों पर होना है. इसके लिए चुनाव की प्रक्रिया इसी माह शुरू होने की संभावना है. वरिष्ठ पत्रकार अरुण पाण्डेय बताते हैं कि जो विधानसभा कोटे की 9 और स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के 4-4 सदस्यों का चुनाव की तारीखों का ऐलान इस महीने कर दिया जाएगा. जबकि वो ये भी बताते हैं कि इस बार कांग्रेस और आरजेडी को फायदा हुआ है और एनडीए का नुकसान हुआ है.

जिसकी जितनी ताकत उतने एमएलसी बनेंगे
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से 4 जो चुनाव होंगे उसमे बीजेपी से प्रो. नवल किशोर यादव, सीपीआई से संजय कुमार सिंह, सीपीआई केदारनाथ पांडे और कांग्रेस से मदन मोहन झा रिटायर्ड हुए है और संभवतः यही उम्मीदवार भी होंगे. स्नातक क्षेत्र से 4 सदस्यों में जेडीयू से मंत्री नीरज कुमार, बीजेपी से देवेश चंद्र ठाकुर, जेडीयू से दिलीप कुमार चौधरी और सीपीआई से डॉ. एनके यादव रिटायर्ड हुए है और यही उम्मीदवार भी होंगे. विधानसभा कोटे से 9 सदस्य में 5 जेडीयू से हारुन रशीद, मंत्री अशोक चौधरी, पीके शाही, हीरा प्रसाद बिंद और सोनेलाल मेहता हैं. वहीं, बीजेपी से संजय मयूख, कृष्ण कुमार सिंह, राधामोहन शर्मा, सतीश कुमार हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री नन्द किशोर यादव बताते हैं कि इस विधान परिषद के चुनाव में तीन प्रारूप में चुनाव होने हैं. दो में चुनाव आयोग को तय करना है तो एक में राज्य सरकार तय करेगी. जबकि जेडीयू के प्रवक्ता निखिल मण्डल का भी मानना है कि ये चुनाव संख्याबल के आधार पर होता है तो विधानसभा में जिसकी जितनी ताकत है वो उतने एमएलसी बनाए.

राज्यपाल कोटे में होगा बीजेपी और जेडीयू में बंटवारा
राज्यपाल कोटे से 10 सदस्य जेडीयू से ही ताल्लुक रखते हैं. रणवीर नंदन, शिव प्रसन्न यादव, डॉ. रामवचन राय, विजय मिश्रा, ललन सर्राफ, रामलषन राम रमन, राणा गंगेश्वर सिंह, जावेद इकबाल अंसारी, संजय कुमार सिंह और रामचंद्र भारती रिटायर्ड हुए हैं. मनोनयन की 2 सीटें पहले से ही खाली थीं. राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और पशुपति कुमार पारस सांसद बनने के बाद इस्तीफा दे चुके हैं. इन 12 सीटों में से संख्या बल के आधार पर 5 बीजेपी और 7 जेडीयू के खाते में जाएंगी. ये दोनों गठबंधन दल मिलकर तय करेंगे .

आरजेडी और कांग्रेस मिलकर विप का चुनाव लड़ेंगे
विधान सभा कोटे से इस विधान परिषद के चुनाव में बीजेपी को दो और जेडीयू को दो सीटों का नुकसान होगा. इसका फायदा सीधे कांग्रेस को एक और आरजेडी को तीन सीट के रूप में मिलेगा. वहीं कांग्रेस ने विधान परिषद के चुनाव आरजेडी के साथ लड़ने का संकेत दिया है. कांग्रेस पटना स्नातक और तिरहुत शिक्षक चुनाव में अपने उम्मीदवार उतार सकती है. कांगेस नेता प्रेम चन्द्र मिश्रा बताते हैं कि इस बार कांग्रेस और आरजेडी को अपर हाउस में काफी फायदा मिलेगी. जबकि आरजेडी नेता शक्ति यादव कहते हैं कि जैसे चुनाव का ऐलान होगा पार्टी अपने उम्मीदवारो की घोषणा कर देगी.

ये हो सकते हैं संभावित नाम
इस चुनाव को लेकर संभावित उम्मीदवारो की चर्चा तेज हो गई है. विधान सभा कोटे से जेडीयू से प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ,मंत्री अशोक चौधरी, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह का नाम आगे चल रहा है. वहीं बीजेपी से संजय मयूख , ऋतुराज सिन्हा , राधा मोहन शर्मा के अलावा अतिपिछड़ा से सतपाल नरोत्तम के नाम रेस में है. कांग्रेस ने पिछली बार प्रेम चन्द्र मिश्रा को परिषद भेजा था तो इस बार किसी पिछड़े को भेजने की तैयारी है. आरजेडी से प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह, लालू यादव के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव परिषद जा सकते हैं. जबकि राज्यपाल कोटे को लेकर जेडीयू- बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि किनको परिषद से सदस्य बनाया जाए. राज्यपाल कोटे से समाजिक, शैक्षणिकऔर कला क्षेत्र से जुड़े लोगों को सदस्य बनाया जाता है.

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