Home /News /bihar /

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक 10 साल पुरानी है बिहार के नियोजित शिक्षकों की लड़ाई

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक 10 साल पुरानी है बिहार के नियोजित शिक्षकों की लड़ाई

सांकेतिक चित्र

सांकेतिक चित्र

शिक्षकों से जुड़े इस बड़े फैसले में जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने अंतिम सुनवाई पिछले साल तीन अक्तूबर को की थी

शुक्रवार को बिहार के साढ़े तीन लाख से अधिक नियोजित शिक्षकों को एक बार फिर से निराशा हाथ लगी है. सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों समान काम के बदले समान वेतन देने के फैसले से इंकार कर दिया. कोर्ट के इस फैसले से जहां शिक्षकों को निराशा हाथ लगी है वहीं बिहार सरकार को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से पटना हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया है.

फैसले को लेकर सभी की निगाहें दिल्ली पर टिकी थी जहां बिहार के नियोजित शिक्षकों के कई नेता भी कैंप कर रहे थे. शिक्षकों की इस लड़ाई में देश के दिग्गज वकीलों ने उनका पक्ष कोर्ट में रखा था. ये लड़ाई 10 साल पुरानी है जब 2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन की मांग पर एक याचिका पटना हाइकोर्ट में दाखिल की थी. आठ साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद पटना हाइकोर्ट ने साल 2017 को अपना फैसला बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के पक्ष में दिया था.

ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बिहार के 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को लगा बड़ा झटका

इस फैसले के तहत कहा गया था कि नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. पटना हाईकोर्ट के इस फैसले के विरोध में बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी. शिक्षकों की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकीलों ने कोर्ट में बहस की जिसके बाद अंतिम सुनवाई वर्ष 2018 में तीन अक्तूबर को हुई. आपको बता दें कि कोर्ट के इस फैसले से बिहार के प्राथमिक स्कूल से लेकर प्लस टू विद्यालयों के शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे.

ये भी पढ़ें- खजांची और डाकपाल मिलकर डकार गए पोस्ट ऑफिस के ढाई करोड़ रुपए

आपको बता दें कि शिक्षकों से जुड़े इस बड़े फैसले में जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने अंतिम सुनवाई पिछले साल तीन अक्तूबर को की थी जिसके बाद से फैसला सुरक्षित रखा गया था. सात महीने बाद आने वाले इस फैसले का सीधा असर बिहार के पौने चार लाख शिक्षकों और उनके परिवार पर होगा. बिहार के नियोजित शिक्षकों का वेतन फिलहाल लगभग 20 से 25 हजार रुपए के आसपास है और अगर कोर्ट का फैसला शिक्षकों के पक्ष में आता तो उनका वेतन लगभग दोगुना यानी 35-40 हजार रुपए हो जातात. कोर्ट के इस फैसले से शिक्षकों को निराशा हाथ लगी है.

Tags: Bihar News, PATNA NEWS, Supreme Court, Teacher

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर