Coronavirus: कोरोना से नहीं, सरकार के आदेश से डर लगता है! जानें क्या है माजरा
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Coronavirus: कोरोना से नहीं, सरकार के आदेश से डर लगता है! जानें क्या है माजरा
श‍िक्षाम‍ित्रों के ल‍िये खुशखबरी

राज्य के माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों का आरोप है कि जो भी शिक्षक मूल्यांकन कर रहे हैं उन्हें जान का डर सता रहा है क्योंकि मूल्यांकन केंद्रों पर ना तो सैनिटाइजर की व्यवस्था है ना ही मास्क वितरित किया गया है.

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पटना. बिहार में कोरोना वायरस (corona virus) को लेकर सभी शैक्षणिक संस्थानों को 31 मार्च तक बंद रखा गया है, लेकिन राज्य में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की कॉपियों का मूल्यांकन (Evaluation of matriculation and intermediate copies) जारी है. ऐसे में हड़ताली शिक्षक राज्य सरकार और बोर्ड के रवैये से आक्रोशित हैं और सरकार पर शिक्षकों की जान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं.

शिक्षकों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
राज्य के माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों का आरोप है कि जो भी शिक्षक मूल्यांकन कर रहे हैं उन्हें जान का डर सता रहा है क्योंकि मूल्यांकन केंद्रों पर ना तो सैनिटाइजर की व्यवस्था है ना ही मास्क वितरित किया गया है. ऐसे हालात में भी शिक्षकों को झुंड में मू्ल्यांकन करना पड़ रहा है. शिक्षकों की मानें तो कोरोना से कम और राज्य सरकार के आदेश से ज्यादा डर लगता है क्योंकि सरकार शिक्षकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है.

126 केंद्रों पर मूल्यांकन
बता दें कि  बिहार बोर्ड ने पिछले वर्ष सबसे पहले रिजल्ट जारी करने का देशभर में रिकॉर्ड स्थापरित किया था. ऐसे में बिहार बोर्ड के पास भी चुनौती है कि इस साल समय पर रिजल्ट जारी कैसे हो पाएगा. हालांकि बोर्ड का दावा है कि राज्य के 126 मूल्यांकन केंद्रों पर तेजी से कॉपियों का मूल्यांकन जारी है और इंटर का मूल्यांकन अंतिम चरण में है जिसका इसी माह के अंत तक रिजल्ट भी जारी हो जाएगा.



'बलि का बकरा बन रहे शिक्षक'
बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बोर्ड और सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि शिक्षकों को ही क्यों बलि का बकरा बनाया जा रहा है. जब बच्चों को छुट्टी दे दी गई है तो शिक्षकों से काम क्यों लिया जा रहा है?

हड़ताली शिक्षकों ने सरकार के आदेश के खिलाफ आवाज उठाई.


'मूल्यांकन को मजबूर हैं शिक्षक'
शिक्षक नेता अभिषेक,जितेंद्र कुमार, वीणा हेंब्रम, पप्पू कुमार विनय मोहन समेत कई शिक्षक नेताओं ने साफ कहा है कि बिहार बोर्ड नियमों को ताक पर रखकर एक
शिक्षक से एक दिन में 65 की वजाय जबरन 200 कॉपियों का मूल्यांकन करवा रहा
है. ऐसे में शिक्षक कोरोना वायरस के दहशत के मजबूरन मूल्यांकन करने को
मजबूर हैं.

ये बोले शिक्षा मंत्री
वहीं, पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि अभी मूल्यांकन स्थगित करने का फैसला नहीं लिया गया है. आगे जरूरत पड़ी तो सरकार विचार करेगी.

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