Explained: खाद की कीमतों पर 'सियासी खाज' करनेवाले विरोधियों पर पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक!

केंद्र सरकार ने डीएपी फर्टिलाइजर पर मिलने वाली सब्सिडी में 140 फीसदी बढ1ोतरी का फैसला किया है.

अब तक मोदी सरकार 8 किस्तों में 16000 रुपये की सहायता दे चुकी है. बिहार सहित देश के 9.5 करोड़ किसानों के खाते में अक्षय तृतीया के दिन 2000 रुपये की आठवीं किस्त जमा करा दी गई है.

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पटना. 'मोदी सरकार अगली जेब में 2000 रुपये डालती है और पिछली जेब से काट लेती है' खाद की बढ़ती कीमतों के बीच बिहार के विपक्षी नेता इस जुमले को खूब हवा दे रहे थे, लेकिन केंद्र सरकार ने खाद पर ऐतिहासिक सब्सिडी देकर विरोधियों की हवा निकाल दी है. पीएम किसान सम्मान निधि की आठवीं किस्त भी अभी हाल ही में जारी की गई थी और अब डीएपी की हर बोरी पर 1200 रुपये की भारी भरकम सब्सिडी मिलने के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. पिछले एक महीने से न्यूज़ 18 लगातार किसानों की चिंता से सरकार को रूबरू करा रहा था और अब किसानों का भी मानना है कि केंद्र सरकार का ये फैसला खेती करने वालों के हित में लिया गया अब तक का सबसे बड़ा कदम है.

खरीफ की फसल में यूरिया से ज्यादा डीएपी खादों की जरूरत पड़ती है और भारी मांग की वजह से कई जगहों पर कालाबाजारी भी शुरू हो गई थी. किसान आंदोलन की हवा ठंडी पड़ने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने में लग गया था. कांग्रेस के एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी सरकार देश के 62 करोड़ किसानों को गुलाम बनाने की साजिश कर रही है. अब केंद्र सरकार ने डीएपी फर्टिलाइजर पर सब्सिडी 140 फीसदी बढ़ा कर विरोधियों का मुंह बंद कर दिया है.

खाद की बढ़ती कीमतों का गणित और सरकारी सब्सिडी की ABCD
सरकार यूरिया और फॉस्फेट दोनों तरह की खाद पर किसानों को मदद करती आई है। यूरिया की कीमत पर केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण होता है और यही वजह है कि यूरिया की कीमतें पिछले कई सालों से नहीं बढ़ी है. आज भी यूरिया की एक बोरी 266.50 रुपये में मिल जाती है. दूसरी तरफ डीएपी की कीमतें बाजार के हवाले होती हैं. अलग-अलग कंपनियों की कीमतों में भी अंतर होता है. पिछले साल तक डीएपी की एक बोरी की कीमत 1700 के आसपास थी और केंद्र सरकार इसपर 500 रुपये की सब्सिडी दे रही थी। एनएफएल यानी नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड किसानों को डीएपी की एक बोरी 1300 में दे रही थी तो कुछ कंपनिया इसे 1200 रुपये में भी बेच रही थी। इस साल डीएपी की एक बोरी की कीमत 2400 तक पहुंच गई और सब्सिडी के बाद किसानों को ये 1900 रुपये की मिल रही थी. अब 1200 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद किसानों को पुराने रेट पर ही डीएपी की बोरी मिलेगी. केंद्र सरकार ने DAP पर सब्सिडी 140 फीसदी तक बढ़ा दी. सीधे शब्दों में कहें तो किसानों को अब पुराने रेट पर ही डीएपी की बोरी मिलेगी. उन्हें एक रुपया भी ज्यादा खर्च नहीं करना होगा। केंद्र सरकार के इस फैसले से करोड़ों किसानो के चेहरे की खुशी लौट आई है.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल और केंद्र पर इसका भार
डीएपी यानी डाई अमोनियम फॉस्फेट की कीमतें अचानक क्यों बढ़ी इसका जवाब ढूंढना ज्यादा मुश्किल नहीं है. डीएपी में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड और अमोनिया की कीमतों में 60 से 70 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. कोरोना की वजह से दुनिया भर में आवागमन बाधित हुआ है और इसका असर खाद के बाजार पर भी पड़ा है। इस समय जो भी चीज बाहर से आयात करनी पड़ती है वो मंहगी हो रही है. फॉस्फोरिक एसिड और अमोनिया की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद डीएपी की कीमत दोगुनी तक बढ़ गई. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का असर भारत में भी पड़ा और यहां डीएपी की कीमतें आसमान छूने लगी. बढ़ती कीमतों को देखते हुए इसकी कालाबजारी भी शुरू हो गई और कुछ व्यापारियों ने स्टॉक छुपा लिया. केंद्र सरकार ने डीएपी फर्टिलाइजर पर सब्सिडी 140 फीसदी बढ़ा दी है और इसका खजाने पर भारी बोझ पड़ने वाला है. एक अनुमान के मुताबिक केंद्र सरकार को सिर्फ खरीफ के सीजन में करीब 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा. केंद्र सरकार हर साल किसानों को दी जाने वाली खाद पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है. ये खेती के इस्तेमाल में आने वाले उपकरणों पर दी जाने वाली सब्सिडी से अलग है.

मिट्टी का टॉनिक है डीएपी तो फसल लहलहाने के काम आता है यूरिया
केंद्र सरकार के इस फैसले से छोटे-बड़े सभी किसान बेहद खुश हैं और उनके चेहरे खिल उठे हैं. न्यूज़ 18 संवाददाता जब लोगों की राय लेने खेत-खलिहान पहुंचे तो ज्यादतर किसानों का यही मानना था कि मोदी सरकार ने उनकी चिंताएं दूर कर दी है. किसानों ने हमें बताया कि खरीफ की फसल में डीएपी की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. खेत की मिट्टी तैयार करने के लिए डीएपी की जरूरत पड़ती है जो उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है. डीएपी पानी में आसानी से नहीं घुलता और लंबे समय तक जमीन को फायदा पहुंचाता है. धान का बिचड़ा लगाने से लेकर रोपनी तक डीएपी की जरूरत पड़ती है. खास बात ये है कि डीएपी में 46 फीसदी फॉस्फोरेट होने के साथ ही 18 फीसदी यूरिया भी होता है जो धान की जड़ों को मजबूत करते हैं. रबी की फसल से ज्यादा खाद की जरूरत खरीफ की फसल में होती है. खरीफ की फसलों में पानी की भी ज्यादा जरूरत पड़ती है जिसके लिए किसानों को अधिक खर्च करना पड़ता है. डीएपी की कीमत में भारी बढ़ोतरी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी थी लेकिन सरकार के इस फैसले से किसानों ने राहत की सांस ली है.

पीएम किसान सम्मान निधि और सब्सिडी का डबल डोज
किसानों के खाते में पिछले ही हफ्ते पीएम किसान सम्मान निधि के 2000 रुपये पहुंचे हैं और अब तक मोदी सरकार आठ किश्तों मे 16000 रुपये की सहायता दे चुकी है. बिहार सहित देश के 9.5 करोड़ किसानों के खाते में अक्षय तृतीया के दिन 2000 रुपये की आठवीं किस्त जमा करा दी गई है. साथ ही सरकार ने ये भी एलान किया है कि जिन किसानों के खाते में ये रकम नहीं आई है वे किसान मित्रों की मदद से इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। सरकार ने पिछली बार यानि 7वीं किस्त के बाद से किसानों के लिए नियम कड़े कर दिए थे. सरकार ने साफ कर दिया था कि जो लोग फर्जी रूप से इस योजना का लाभ ले रहे थे उन्हें 8वीं किस्त नहीं दी जाएगी. अब सरकार ने ये एलान किया है कि जिन वैध किसानों के खाते में ये रकम नहीं है वो सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत कर सकते हैं. इसके अलावा क्षेत्र के लेखपाल और कृषि अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं.