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Explained: जदयू में अब यही तिकड़ी बनाएगी हर रणनीति! पढ़ें अंदरखाने की खबर

बिहार के राजनीतिक जानकार बताते हैं कि जदयू  के सभी गुट नीतीश कुमार तक पहुंचने के साथ ही खद ब खुद खत्म हो जाते हैं.

बिहार के राजनीतिक जानकार बताते हैं कि जदयू के सभी गुट नीतीश कुमार तक पहुंचने के साथ ही खद ब खुद खत्म हो जाते हैं.

आपके लिए एसका मतलब: जेडीयू की इस तिकड़ी में कौन कौन हैं ये जानना भी बेहद दिलचस्प है. इनके ऊपर JDU को पुराने गौरव को बहाल करने की चुनौती है. साथ ही बिहार की आगामी राजनीति के लिहाज से यह भी जानना जरूरी होगा कि कैसे खुद आरसीपी सिंह को उन्हीं की जेडीयू में किनारे लगाने की कवायद की जा रही है और इस पर अमल भी शुरू हो चुका है.

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पटना. जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष और केंद्र में मंत्री आरसीपी सिंह (RCP Singh) केंद्र में मंत्री क्या बने JDU में गुटबाजी की खबर आए दिन आने लगी. आज स्थिति यह हैं कि JDU की गुटबाजी की तस्वीर भी साफ-साफ दिखने लगी है. हालांकि कोई भी नेता खुल कर कुछ नही बोल रहा है. लेकिन, JDU में जो हलचल हो रही है उससे साफ है की केंद्र में मंत्री बनने के बाद भी JDU में आरसीपी सिंह की  हनक कम होने लगी है. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि JDU में अब नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की अगुवाई में तिकड़ी की ही चलेगी. यही तिकड़ी JDU के सारे बड़े फैसले लेगी.

जेडीयू की इस तिकड़ी में कौन कौन हैं ये जानना भी बेहद दिलचस्प है. इनके ऊपर JDU को पुराने गौरव को बहाल करने की चुनौती है. साथ ही बिहार की आगामी राजनीति के लिहाज से यह भी जानना जरूरी होगा कि कैसे खुद आरसीपी सिंह को उन्हीं की जेडीयू में किनारे लगाने की कवायद की जा रही है और इस पर अमल भी शुरू हो चुका है.

नीतीश कुमार- नीतीश कुमार निर्विरोध JDU के सबसे बड़े नेता हैं और JDU में जो भी बड़े फैसले होते हैं इनके बगैर नहीं होता है. लेकिन, पार्टी के कई निर्णय ऐसे होते हैं जो ये खुलकर नहीं बोलते हैं, मगर उनकी तिकड़ी इशारे को बेहतर तरिके से समझती है. इशारा होते ही JDU में वो लागू हो जाता है. नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हैं, और बिहार की सरकार चला रहे हैं, लेकिन JDU के अंदर क्या कुछ हो रहा है और आगे क्या होना है? ये सब उनकी मर्जी से ही होता है. तिकड़ी में नम्बर एक पर नीतीश कुमार ही है.

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ललन सिंह-  JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह नीतीश कुमार के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली शख़्सियत हैं जिनके ऊपर नीतीश कुमार ने JDU को 2005 वाली स्थिति में लाने की जिम्मेदारी सौंपी है. केंद्र में मंत्री बनने से चूक जाने वाले ललन सिंह नीतीश कुमार के बेहद ख़ास माने जाते हैं. माना जाता है कि नीतीश कुमार के ऊपर जब भी कोई राजनीतिक संकट आता है, ललन सिंह संकट मोचक बन कर सामने आते रहे है.

बिहार के राजनीतिक जानकार बताते हैं कि नीतीश कुमार, ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा की तिकड़ी ही जेडीयू में प्रभावी रहेगी.

आरसीपी सिंह के केंद्र में मंत्री बनने के बाद JDU दो धड़ों में बटता दिखा था. JDU  में समर्थकों ने पोस्टर लगाकर इसका इजहार भी कर दिया, लेकिन उसके बाद नीतीश कुमार ने ललन सिंह के ऊपर पार्टी को आगे बढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी दे दी. इसके बाद ललन सिंह ने भी जिस तरह से आरसीपी सिंह के प्रदेश संगठन में बनाए गए कई पदों को ख़त्म किया, इससे साफ हो गया ललन सिंह नीतीश के बाद सर्वेसर्वा हैं.

उपेन्द्र कुशवाहा – JDU संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने जब JDU में अपनी पार्टी को विलय कराया था और आरसीपी सिंह की नाराजगी के बावजूद उपेन्द्र कुशवाहा का JDU में आना,  फिर संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाना, ये बताता है कि नीतीश कुमार ने लव- कुश (कुर्मी-कोयरी जाति को बिहार में स्थानीय स्तर पर लव-कुश भी कहा जाता है) समीकरण को ध्यान में रखते हुए JDU में उपेन्द्र कुशवाहा की अहमियत बढ़ा दी है. कुशवाहा ने भी साफ़ कर दिया कि JDU को 2005 वाले दौर में ले जाना है.

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यही नहीं नीतीश कुमार को PM मटेरियल वाले बयान ने भी ये साफ कर दिया है कि कुशवाहा नीतीश कुमार के लिए कहां तक जा सकते हैं. वंही हाल के दिनो में JDU के अंदर उनके समर्थकों की पार्टी संगठन से लेकर पार्टी में जो तवज्जो मिली है उससे ये भी साफ है कि JDU में बड़े फैसले में उनकी भी मर्जी चलती है. यहां यह जानना जरूरी है कि ये सब नीतीश कुमार और ललन सिंह से बेहतर तालमेल की वजह से हो रहा है.

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वहीं, केंद्र में मंत्री बनने के पहले आर सी पी सिंह को JDU का नीतीश कुमार के बाद सबसे बड़ा नेता समझा जाता था, जो संगठन से लेकर हर बड़े फैसले लेते थे. लेकिन, केंद्र में मंत्री बनने के बाद से आरसीपी सिंह की JDU संगठन से लेकर JDU में पकड़ कमजोर होती जा रही है. इसकी तस्वीर भी दिखी जब प्रदेश संगठन में उनके कई समर्थकों को या तो बाहर का रास्ता दिखा दिया गया या फिर किनारे लगा दिया गया. साफ है कि JDU की हर रणनीति अब नीतीश कुमार, ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा के इर्द-गिर्द ही घूमेगी.

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