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Nitish Cabinet Expansion: मंत्रिमंडल विस्तार में क्यों हो रही देरी? जानें किस फॉर्मूले ने JDU-BJP में फंसाया पेच

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद (फाइल फोटो)

Bihar Cabinet Expansion: नीतीश कैबिनेट (Nitish Cabinet) में अभी सिर्फ 14 मंत्री हैं, जबकि विभागों की कुल संख्या 44 है. ऐसे में एक-एक मंत्री के पास कई-कई विभाग हैं, जिस कारण वे अपने सभी विभागों में बैठ भी नहीं पा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 10:59 AM IST
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पटना. बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद (Tar Kishor Prasad) ने कहा है बिहार में जल्द ही बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार (Bihar Cabinet Expansion) होगा. उनका यह भी दावा है कि यह काम इसी महीने हो जाएगा. उन्होंने सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री जी ने कहा है तो यह स्वाभाविक है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा. दरअसल, उम्मीद की जा रही थी कि खरमास (मकर संक्रांति) के बाद तुरंत ही कैबिनेट विस्‍तार हो जाएगा, लेकिन विस्तार टलते जाने से कई सवाल खड़े होने लगे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि जेडीयू और बीजेपी (JDU and BJP) में अभी कई पेच सुलझने बाकी हैं.

बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार में देर होने का साइड इफेक्ट सरकार के कामकाज पर साफ दिख रहा है. कैबिनेट विस्‍तार न होने के कारण सरकार के कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है. एक-एक मंत्री के पास कई-कई विभाग हैं. अब तो बजट सत्र की तारीख भी तय हो गई है. फिर भी मंत्रिमंडल विस्तार का मुद्दा नहीं सुलझ रहा है.

गौरतलब है कि नीतीश कैबिनेट में अभी सिर्फ 14 मंत्री हैं, जबकि विभागों की कुल संख्या 44 है. ऐसे में एक-एक मंत्री के पास कई-कई विभाग हैं, जिसके चलते वे अपने विभागों में बैठ भी नहीं पा रहे हैं. बता दें कि बीते वर्ष 16 नवंबर को नीतीश कुमार ने 14 मंत्रियों के साथ शपथ लेकर कैबिनेट गठन किया था. बीजेपी के 7, जेडीयू के 5 थे. मेवालाल चौधरी के इस्तीफे के बाद 4 मंत्री ही बचे हैं. हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के 1 और वीआईपी से मुकेश सहनी को मंत्री बनाया गया.



एनडीए सरकार को बने दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है. इसकी एक बड़ी वजह है कि इस बार जिस तरह का जनादेश आया है, उसमें मंत्रिमंडल में बीजेपी बड़े भाई की भूमिका चाहती है, जिस पर जेडीयू राजी नहीं है और वो 50-50 का फॉर्मूले चाह रही है.
बता दें कि बिहार के 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 15 प्रतिशत सदस्य मंत्री बनाए जा सकते हैं. इस लिहाज से बिहार में मुख्यमंत्री सहित कुल 36 मंत्री हो सकते हैं. इस बार बिहार चुनाव में एनडीए को 125 सीटें मिली हैं, जिनमें सबसे ज्यादा बीजेपी को 74 सीटें मिली हैं. वहीं, जेडीयू को 43, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी को भी चार सीटें मिली हैं.

ऐसे में अगर पिछली एनडीए की सरकार के आधर पर मंत्रियों की भागीदारी पर नजर डालें तो जदयू के मुख्यमंत्री सहित 22 विधायक मंत्री थे. बीजेपी के उपमुख्यमंत्री समेत 13 विधायक मंत्री बने थे. पिछली बार जेडीयू के विधायकों की संख्या 71 थी जबकि बीजेपी के विधायकों की संख्या 54 थी. लेकिन, इस बार बीजेपी के 74 विधायक हैं और जेडीयू के 43 हैं.

अगर इस फॉर्मूले के आधार पर देखें तो एक 3.5 विधायकों पर एक मंत्री पद मिलता है. इस बार अगर इसका हिसाब लगाएं तो भाजपा के 19 और जदयू के 14 मंत्री हो सकते हैं. हम और वीआईपी को भी कम से कम एक-एक मंत्री पद चाहिए ही. सूत्रों से खबर है कि पेच यहीं फंसा हुआ है, क्योंकि जेडीयू 50-50 फॉर्मूले के आधार पर मंत्री पद चाहती है.
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