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EXPLAINED: नीतीश कुमार: 70 साल के बुजुर्ग या 70 साल के युवा!

EXPLAINED: नीतीश कुमार: 70 साल के बुजुर्ग या 70 साल के युवा!

विपक्ष की ओर से 70 वर्ष के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अक्सर थका हुआ बताया जाता है, क्या वाकई में यही सत्य है?

विपक्ष की ओर से 70 वर्ष के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अक्सर थका हुआ बताया जाता है, क्या वाकई में यही सत्य है?

आपके लिए इसका मतलब: विपक्ष द्वारा सीएम नीतीश कुमार की उम्र 70 वर्ष बताकर अक्सर तंज कसा जाता है इसी को आधार बनाकर उनके काम करने की क्षमता व कठिन परिस्थितियों से जूझने के सामर्थ्य पर सवाल उठाए जाते हैं. लेकिन, क्या यही सच्चाई है?

  • News18Hindi
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पटना. हाल के दिनों में बिहार की सियासत (Bihar Politics) में एक बात सामने आती रही है. विपक्षी दलों की ओर से यह कहा जाता रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) अब करीब 70 साल के हो गए हैं और थक गए हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या वाकई ऐसा है? हालांकि राजनीतिक जानकार बताते हैं कि विपक्ष द्वारा ऐसा बार-बार कहा जाना सिर्फ एक धोखा भर है. सीएम नीतीश कुमार आज की राजनीति की मुख्यधारा में आए हुए कई युवा राजनीतिज्ञों से भी अधिक ऊर्जावान हैं.

वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि हाल के दिनों में नीतीश कुमार की राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों को देखें, तो नीतीश कुमार इस उम्र में भी युवा सरीखे काम करते नजर आते हैं. बीते 1 अगस्त से 6 सितंबर तक की सीएम नीतीश कुमार  की गतिविधियों पर निगाह डालें, तो आपको साफ समझ आ सकता है कि नीतीश कुमार अब भी काफी एक्टिव हैं और जन सरोकार के रास्ते बिहार के विकास का विजन उनकी नीति और नीयत दोनों में साफ-साफ दिखती है.

नीतीश कुमार – महीनेभर व्यस्त रहे मुख्यमंत्री
एक अगस्त को रविवार के कारण खास कार्यक्रम नहीं था, लेकिन 2 अगस्त को मुख्यमंत्री ने जनता दरबार कार्यक्रम किया. 153 आवेदकों से मिले. 4 अगस्त को कैबिनेट की बैठक की. इसके पहले क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में अनलॉक को लेकर फैसला किया. 9 अगस्त को पृथ्वी दिवस पर पौधारोपण और 10 अगस्त को फिर जनता दरबार में 134 आवेदकों से मिले.

11 अगस्त को 2705.5 करोड़ की 989 परियोजनाओं का उद्घाटन, इसी दिन शहीद दिवस पर अमर स्वतंत्रता सेनानियों के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया. 11 अगस्त को ही नीतीश ने गंगा में बाढ़ को लेकर हाजीपुर तक की यात्रा की. पटना के कई गंगा घाटों का निरीक्षण किया. फिर नालंदा, जहानाबाद और पटना जिले में हवाई सर्वेक्षण के बाद देर शाम संबंधित जिलों के डीएम के साथ मीटिंग की.

13 अगस्त को सड़क मार्ग से उन्होंने कई जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. फिर अधिकारियों से मीटिंग की. 15 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में झंडारोहण के बाद समारोह में शिरकत की. 16 अगस्त को फिर जनता दरबार में हाजिर हुए और 143 आवेदकों से मिले. 17 अगस्त को भागलपुर, खगड़िया और बेगूसराय के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण और राहत शिविरों के दौरे किए.

समस्तीपुर के एक बाढ़ राहत शिविर में सीएम नीतीश कुमार

18 अगस्त को कटिहार जिले का हवाई सर्वेक्षण किया और बरारी प्रखंड में बाढ़ राहत शिविरों के दौरे किए. 18 अगस्त को पूर्णियां के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गए. रुपौली प्रखंड के राहत शिविरों में भी पहुंचे. 19, 20, 21 को रूटीन कार्यों में रहे. 22 अगस्त को वे पहले समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर प्रखंड और फिर विद्यापतिनगर पहुंचे, जहां बाढ़ राहत शिविरों का जायजा लिया. इसी दिन उन्होंने रक्षाबंधन के दिन पीपल के पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधे और पटना की राजधानी वाटिका में पाटलि वृक्ष का रोपण किया.

25 अगस्त को कोविड को लेकर क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की मीटिंग की और अनलॉक की प्रक्रिया आगे बढ़ाई. 25 अगस्त को बीपी मंडल के जन्म दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. 25 को ही 1121 करोड़ की लागत से 130 किलोमीटर लंबी चार राज्य उच्च पथों का लोकार्पण किया. 26 अगस्त को वे राजगीर पहुंच गए. यहां पुलिस अवर निरीक्षक दीक्षांत परेड समारोह में शामिल हुए. संबोधन भी दिया. इसके बाद जू सफारी का भ्रमण किया.

27 अगस्त को पटना के गर्दनीबाग में बनने वाले बापू टावर प्रोजेक्ट को लेकर बैठक की. 27 अगस्त को ही मोइनुल हक स्टेडियम के नवनिर्माण को लेकर मीटिंग की. इसके बाद फिर तीन दिनों तक लगातार रूटीन कार्य किए. इसी दौरान जन्माष्टमी भी था. फिर 31 अगस्त को दरभंगा व मधुबनी जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. दरभंगा के कुशेश्वरस्थान में दर्शन किए. इसके बाद नाव से बाढ़ प्रभावित इलाकों में गए. 31 अगस्त को पटना में हर घर नल का जल योजना की बैठक और 1 सितंबर से टीकाकरण महाअभियान को लेकर मीटिंग की.

दरभंगा के कुशेश्वर स्थान में स्वयं बोट पर सवार होकर सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया.

1 सितंबर और 2 सितंबर को रूटीन कार्यों के अलावा सोलर स्ट्रीट लाइट योजना जैसी बातों पर बैठक की. 3 सितंबर को पटना साहिब में गुरु के बाग पहुंच गए. प्रकाश पुंज के निर्माण कार्य की समीक्षा की. गुलजारबाग प्रेस भवन परिसर का निरीक्षण किया और पुरातत्वविदों से मिले. इसी दन बीएनआर ट्रेनिंग कॉलेज गए. 4 सितंबर को 422 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले गांधी मैदान से साइंस कॉलेज वाया पीएमसीएच डबल डेकर फ्लाईओवर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया. 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और 6 सितंबर को फिर जनता के दरबार में पहुंच गए.

अशोक कुमार शर्मा इन्हीं आकलनों के आधार पर कहते हैं कि फील्ड में सक्रिय रहने के मामले में नीतीश कुमार तो कई युव नेताओं पर बहुत भारी हैं. हालांकि सीएम रहते उनकी जिम्मेदारी भी महती है, लेकिन इतना जरूर है कि सीएम नीतीश कुमार की कर्मठता, उनकी ऊर्जा और जन सरोकार की समझ के साथ ही बिहार के विकास की आकांक्षा को देखते हुए नीतीश की उम्र को मुद्दा बनाने से पहले विपक्ष को न सिर्फ दोबारा सोचना चाहिए, बल्कि खुद को आईने के सामने भी रखना चाहिए.

Tags: Bihar NDA, Bihar News, Bihar politics, CM Nitish Kumar, Nitish Government, PATNA NEWS

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