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Bihar News: तेजस्वी यादव के बजट आंकड़ों में उलझी नीतीश सरकार, जानें पूरा मामला

तेजस्‍वी यादव के बजट के आंकड़ों का जवाब सत्‍ता पक्ष के पास नहीं है.

तेजस्‍वी यादव के बजट के आंकड़ों का जवाब सत्‍ता पक्ष के पास नहीं है.

Nitish Vs Tejashwi: नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने बिहार बजट के आंकड़ों को लेकर नीतीश सरकार को सदन में जमकर घेरा. हालांकि उनके आंकड़ों को डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने भ्रामक बताया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 10:20 PM IST
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पटना. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और राबड़ी देवी के कनिष्ठ पुत्र तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) अब परिपक्व हो गए हैं. नेता प्रतिपक्ष के रूप में एनडीए की नीतीश सरकार पर हमला करने के साथ ही अपनी पारिवारिक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (दल) पर लगे लालू-राबड़ी के जंगलराज के दाग को भी आंकड़ों की मदद से साफ करने में जुट गए हैं. गुरुवार को इसकी एक बानगी सदन में दिखी. जब वे सदन में बजट पर बोल रहे थे तो बजट के आकार पर एक आंकड़ा पेश किया. इसमें उन्होंने 15 साल की जदयू-भाजपा और 15 साल के लालू-राबड़ी सरकार की तुलनात्मक समीक्षा पेश कर नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar Government) को आंकड़ों में उलझा दिया.

हालांकि बिहार के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने उनके आंकड़ों को भ्रामक बताया, लेकिन सुशील मोदी की जगह लेने वाले प्रसाद में वो आत्मविश्वास नहीं दिखा, जो चारा घोटाले के चार मामलों सजायाफ्ता लालू के पुत्र तेजस्वी में दिख रहा था. तेजस्वी बोल तो बजट पर रहे थे, लेकिन करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक उन्होंने आंकड़ों पर बोला. इसके अलावा सरकार पर हमले का कोई अवसर नहीं जाने दिया. इसी क्रम में उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार दावा करती है कि उसने बिहार में बजट के आकार को बड़ा कर दिया. 2005 में नीतीश कुमार ने जब प्रदेश में सत्ता संभाली, तब बिहार का बजट 24 हजार करोड़ का था, अब 15 सालों के बाद यानी 2020-21 में यह बढ़कर 2 लाख 11 हजार करोड़ हो गया. साफ है कि तब से अब तक बजट का आकार करीब आठ गुना बढ़ गया.

तेजस्‍वी कुछ यूं गिनाए आंकड़े
नीतीश सरकार के 15 सालों के बजट के आकार की तुलना अपने माता-पिता के 15 साल के शासन काल से करते हुए सदन में बताया कि 1990 में लालू प्रसाद जब सत्ता में आए थे, तब बिहार का बजट 3 हजार करोड़ का था. राजद का शासन काल (1990-2005) खत्म होने तक 8 गुणा बढ़कर यह आकार 24 हजार करोड़ हो गया था. वे यहां ही नहीं रुके बल्कि बताया कि 1990 से लेकर अब तक भारत सरकार के बजट आकार में भी 8 गुना ही वृद्धि हुई है. उन्होंने यह साबित करने का प्रयास किया कि नीतीश कुमार जो बार-बार बजट के आकार पर लालू-राबड़ी के शासन काल को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास करते हैं वह तर्क संगत नहीं है. उन्होंने यह कहते हुए नीतीश सरकार को कठघरे में खड़ा करने का भी प्रयास किया कि वर्तमान सरकार के बजट आकार भले ही 2 लाख 11 हजार करोड़ था, लेकिन सरकार बजट का सिर्फ 33 फीसदी ही खर्च कर पाई है. यानी केवल 70 हजार करोड़ रुपये ही सरकार खर्च कर सकी है. जबकि 1 लाख 41 हजार करोड़ खर्च नहीं हुए.
इसके अलावा तेजस्‍वी ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान राज्य के आतरिक संसाधनों की हिस्सेदारी 20 फीसदी थी.जबकि अब ये घटकर 18 प्रतिशत हो गई है. ऐसे में आंतरिक ससांधनों की आमदनी में 2 फीसदी की कमी आई है. डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने तेजस्वी के आंकड़ो को भ्रामक बताया है, लेकिन उनमें वो आत्मविश्वास नहीं दिखा, जो तेजस्वी में दिख रहा था. यही कारण था कि सदन में उन्होंने गुरुवार को टोका टोकी पर पशुपालन मंत्री को रिचार्ज कूपन कहा, तो पथ परिवहन मंत्री नीतिन नवीन को सलाह देने से भी नहीं चूके. सरकार पर तेजस्वी के वार के बाद राजद नेता भी उत्साहित हैं. पार्टी प्रवक्ता मृत्युजंय तिवारी कहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन में सरकार को जो आईना दिखाया उससे राजद कार्यकर्ता उत्साहित हैं. प्रदेश की एनडीए सरकार ने जनता में जो भ्रम फैलाया था वो इससे दूर होगा.
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