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Explained: पूर्व MLC कृष्ण कुमार सिंह को राजद में लेकर तेजस्वी ने नीतीश को कितना बड़ा झटका दिया?

राजद में शामिल हुए जदयू के कद्दावर नेता कहे जाने वाले पूर्व एमएलसी कृष्ण कुमार सिंह.

राजद में शामिल हुए जदयू के कद्दावर नेता कहे जाने वाले पूर्व एमएलसी कृष्ण कुमार सिंह.

आपके लिए इसका मतलब: पूर्व एलएलसी कृष्ण प्रसाद सिंह को तेजस्वी यादव और जगदानंद ने राजद की सदस्यता दिलाई. इस दलबदल को राजद की ओर से जदयू को बहुत बड़ा झटका बताया जा रहा है. पर इसकी सच्चाई क्या है?

  • News18Hindi
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पटना. जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल (JDU-RJD) के बीच एक दूसरे को झटका देने का सिलसिला जारी है. इसी क्रम में इस बार बारी लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की पार्टी राजद की थी. इस बार राजद ने शाहाबाद क्षेत्र (Shahabad area) के कद्दावर नेता को अपनी पार्टी में मिलाकर सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को जोरदार झटका दे दिया है. पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित राजद पार्टी कार्यालय में मिलन समारोह का आयोजन किया गया था. इस मिलन कार्यक्रम में पूर्व MLC कृष्ण कुमार सिंह (Former MLC Krishna Kumar Singh) अपने समर्थकों के साथ जेडीयू से त्याग पत्र देकर राजद में शामिल हो गए. इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि शाहाबाद क्षेत्र में राजद अब और भी मजबूत होगा.

राष्‍ट्रीय जनता दल के प्रदेश कार्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वैशाली जिले के राघोपुर से राजद के विधायक तेजस्वी यादव और राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह सहित कई नेताओं ने जदयू के पूर्व एलएलसी कृष्ण प्रसाद सिंह को राजद की सदस्यता दिलाई. इस अवसर पर राजद के कई अन्य नेता भी मौजूद थे. इस दलबदल को राजद की ओर से जदयू को बहुत बड़ा झटका बताया जा रहा है. पर इसकी सच्चाई क्या है?

कृष्ण कुमार सिंह ने क्यों बदला पाला?
बता दें कि कृष्ण कुमार सिंह 2015 के विधानसभा चुनाव में सासाराम सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं. हालांकि उन्हें जीत हासिल नहीं हो पाई थी. इससे पहले 2003 और 2009 में हुए एमएलसी चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी. सियासत के जानकार बताते हैं कि इस बार भी चूंकि एमएलसी का चुनाव होना है तो उन्हें जदयू से टिकट की उम्मीद शायद नहीं थी. यही वजह है कि उन्होंने पाला बदला है.

परसेप्शन की राजनीति कर रहे तेजस्वी
हालांकि, तेजस्वी यादव की ओर से यही कोशिश है कि राजद को लेकर जो विशेष जाति-धर्म की छवि बन चुकी है, उसे तोड़ा जाय. कृष्ण कुमार सिंह राजपूत समुदाय से आते हैं, ऐसे में तेजस्वी यादव भी परसेप्शन के लिहाज से इसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं. यह उनके मिलन समारोह के मौके पर दिए वक्तव्य में भी झलकता है. इस दौरान तेजस्वी ने कहा कि राजद पर जाति धर्म विशेष के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हैं लोग, जो गलत है. राजद की कोशिश सभी लोगों को साथ लेकर चलने की है.

नीतीश के करीबी नेताओं में से एक हैं कृष्ण कुमार सिंह
हालांकि, सियासत के जानकारों की नजर में यह सीएम नीतीश कुमार के लिए बड़ा झटका इसलिए माना जा सकता है, क्योंकि वे उनके बेहद करीबी नेताओं में से एक हैं. जब भी शाहाबाद क्षेत्र में सीएम का जाना होता था तो वे कृष्ण कुमार सिंह का आतिथ्य ही स्वीकार करते रहे हैं. ऐसे में सीएम नीतीश के एक करीबी को तेजस्वी द्वारा अपने पाले में किया जाना एक झटका जरूर माना जा सकता है.

जनाधार के मामले में नहीं नजर आता कोई खास दम!
हालांकि, एक हकीकत यह भी है कि जब 2015 ंमें कृष्ण कुमार सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था तो उन्हें महज 9000 वोट ही मिले थे. जाहिर है जनाधार के मामले में कृष्ण कुमार सिंह का जदयू छोड़ जाना नीतीश के लिए कोई बड़ा झटका नहीं है. दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि कृष्ण कुमार सिंह बीते एक साल से फिर से एमएलसी बनने की जुगत में हैं. राजद जॉइन करने का भी उनका मकसद यही माना जा रहा है.

जदयू-राजद में चलता रहेगा झटका देने का क्रम!
सियासत के जानकार यह भी कहते हैं कि अगर उनकी मांग राजद में पूरी नहीं हुई तो उन्हें घर वापसी करते भी देर नहीं लगेगी. क्योंकि, दौर ऐसा है जहां अब सियासी दलों और नेताओं में न तो सिद्धांत रहे और न ही विचारधारा की कोई बात ही रही. सियासत का सूत्र वाक्य भी यही कहा जाता है कि ‘जिधर मेवा उधर ही सेवा’. बहरहाल जदयू और राजद के बीच एक दूसरे को झटका देने का क्रम अभी और जारी रहने की उम्मीद है, ऐसे में मलाई और मेवा की चाहत रखने वाले नेताओं का इधर से उधर आना-जाना लगा ही रहेगा.

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