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इंजीनियरिंग कर 27 की उम्र में बने सांसद, कुछ ऐसा है शरद यादव का पॉलिटिकल करियर
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News18 Bihar
Updated: May 1, 2019, 2:48 PM IST
इंजीनियरिंग कर 27 की उम्र में बने सांसद, कुछ ऐसा है शरद यादव का पॉलिटिकल करियर
शरद यादव

23 साल के लंबे समय तक शरद यादव का बिहार से इस कदर कनेक्शन रहा कि अधिकांश लोग उनको बिहारी ही समझते थे.

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शरद यादव भले ही मध्य प्रदेश के रहने वाले हों लेकिन उनकी पहचान बिहार से ही होती है. जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष, केंद्रीय मंत्री और सात बार सांसद रह चुके शरद यादव इस बार भी बिहार से लोकसभा के उम्मीदवार हैं. किसी जमाने में नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे शरद की राहें अब जुदा हैं और वो लालू खेमे यानी महागठबंधन के प्रत्याशी हैं.

शरद भले ही मध्यप्रदेश में जन्मे हों लेकिन छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक उन्होंने अपनी पहचान बिहार और उत्तर प्रदेश से बनाई. न्यूज 18 आपको बता रहा है सात बार सांसद रह चुके शरद यादव के राजनीतिक सफर से जुड़ीं खास बातें...

72 साल के शरद यादव का जन्‍म 1 जुलाई 1947 को मध्‍यप्रदेश के होशंगाबाद के बंदाई गांव में किसान परिवार में हुआ. किसान के घर जन्मे शरद पढ़ने लिखने में काफी तेज थे. प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्‍होंने अपने ही प्रदेश के जबलपुर से इंजीनियरिंग में स्‍नातक की डिग्री ली. शरद पढ़ाई के दौरान ही राजनीति से प्रभावित थे. यही कारण था कि पढ़ाई के दौरान वो जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए.



चुनाव प्रचार के दौरान शरद यादव




सात बार सांसद रहे शरद यादव के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1971 से हुई. कहा जाता है कि पढ़ाई के दौरान ही वो लोकनायक जेपी के साथ-साथ डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से खासे प्रभावित थे. 27 साल की उम्र में शरद पहली बार 1974 में वे मध्यप्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. साल 1977 में वे दोबारा वो इसी लोकसभा सीट से चुनाव जीते और लोकसभा पहुंचे.

1989 में यूपी की राह पकड़ी

दो बार लोकसभा जाने के बाद शरद यादव 1986 में राज्यसभा से सांसद चुने गए. मध्यप्रदेश के बाद शरद ने साल 1989 में यूपी का रास्ता पकड़ा. तब वो यूपी की बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और जीतकर तीसरी बार संसद पहुंचे. साल 1989-1990 शरद के लिए काफी अहम था. ये वो दौर था जब शरद केंद्र में टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री रहे.

1990 से बिहार को बनाया कर्मक्षेत्र

साल 1990 में वो बिहार आ गए. इसके बाद लगातार 23 साल यानी 1991 से 2014 तक बिहार की मधेपुरा सीट से सांसद रहे. 23 साल के लंबे समय तक शरद का बिहार से इस कदर कनेक्शन रहा कि अधिकांश लोग उनको बिहारी ही समझते थे. शरद जनता दल के संस्थापकों में से एक थे. 1995 में उन्हें जनता दल का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया और 1996 में वे पांचवीं बार लोकसभा का चुनाव जीते.

sharad nitish
File Photo


1997 में जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शरद ने 1998 में जॉर्ज फर्नांडीस की मदद से जनता दल यूनाइटेड पार्टी बनाई. शरद यादव एनडीए के घटक दल से होने के कारण केंद्र सरकार में फिर से मंत्री बने.

1999 में उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय बने जबकि 2001में वो केंद्रीय श्रम मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री चुने गए. साल 2004 में शरद यादव राज्यसभा गए. 2009 में वो 7वीं बार सांसद बने लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मधेपुरा सीट से हार का सामना करना पड़ा. इस सीट से उनको जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव ने शिकस्त दी.

साल 2019 के चुनाव में भी शरपद पप्पू यादव के सामने चुनावी मैदान में हैं. गोपलैंड यानी यादव बाहुल्य इस सीट में उनका सीधा मुकाबला पप्पू यादव से है लेकिन एनडीए के प्रत्याशी भी इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं.

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First published: April 22, 2019, 3:15 PM IST
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