बिहार के नए राज्‍यपाल फागू चौहान के बहाने मिशन 2020 में जुटी BJP

घोसी के विधायक फागू चौहान बिहार की सीमा से सटे आजमगढ़ से लेकर मऊ तक के इलाके में प्रमुख ओबोसी नेता हैं. वह उत्तर प्रदेश की चौहान जाति से आते हैं जिसे बिहार में नोनिया जाति के नाम से जाना जाता है.

Kumari ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 21, 2019, 3:39 PM IST
बिहार के नए राज्‍यपाल फागू चौहान के बहाने मिशन 2020 में जुटी BJP
क्‍या फागू चौहान के बहाने मिशन 2020 में जुट गई है भाजपा? (फाइल फोटो)
Kumari ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 21, 2019, 3:39 PM IST
उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में उस समय सबको आश्चर्य हुआ, जब बिहार के राज्यपाल के लिए फागू चौहान का नाम सामने आया. यूपी के घोसी विधानसभा क्षेत्र से छठी बार विधायक बने फागू चौहान ने भी नहीं सोचा था कि वो राज्यपाल बन जाएंगे. आखिर ऐसा क्या हुआ कि यकायक बीजेपी को उन्हें गवर्नर बनाने का फैसला करना पड़ा. क्या बीजेपी मिशन बिहार में जुट गई है?

बीजेपी का मिशन 2020
वैसे तो फागू चौहान उत्तर प्रदेश से सातवें राज्यपाल बनाए गए हैं, लेकिन इसमें बीजेपी के लिए भी ये खास है. जी हां, बीजेपी का मिशन 2020 की तैयारी का नतीजा हैं फागू चौहान. ये उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन भी हैं. फागू चौहान घोसी विधानसभा से छह बार विधायक रहे हैं. 1985 में पहली बार दलित किसान मजदूर पार्टी से विधायक बने थे. 1991 में जनता दल के टिकट पर विधायक बने. 1996 और 2002 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे, तो फिर बसपा का दामन थामा और 2007 का विधानसभा चुनाव जीता. जबकि 2017 में बीजेपी से सदन पहुंचे हैं. यानी कि पूर्णरुपेण भाजपाई नहीं रहे हैं फागू चौहान, फिर भी बिहार चुनाव को देखते हुए राज्यपाल बनाए गए हैं.
लालजी टंडन बीजेपी के अगले मिशन में बिहार में फिट नहीं बैठ रहे थे, लिहाजा उन्हें वहां भेजा गया जहां चुनाव चार साल बाद होना है. लालजी टंडन मात्र 11 महीने बिहार के राज्यपाल रहे. बीजेपी के मिशन बिहार में फागू चौहान सबसे ज्यादा फिट बैठ रहे थे. लिहाजा उन्हें विधायकी छोड़कर राजभवन में बिठाने का फैसला ले लिया गया. न्यूज़ 18 से बातचीत में भी फागू चौहान ये मानते हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वो राज्यपाल बनाए जाएंगे.

चौहान हैं ओबोसी के दमदार नेता
घोसी के विधायक फागू चौहान बिहार की सीमा से सटे आजमगढ़ से लेकर मऊ तक के इलाके में प्रमुख ओबोसी नेता हैं. फागू चौहान उत्तर प्रदेश की चौहान जाति से आते हैं जिसे बिहार में नोनिया जाति के नाम से जाना जाता है. बिहार में ये अति पिछड़ी जाति है और इस जाति के वोटरों की संख्या भी ठीक ठाक है. नोनिया या बेलदार को निषाद यानि मल्लाह जाति की उप जाति भी माना जाता है. ये बिहार का बड़ा वोट बैंक है. यही वो फैक्टर है जो फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाने में काम आया. बिहार में अभी नीतिश कुमार की सरकार को बीजेपी ने समर्थन दिया है ऐसे में फागू चौहान वहां की राजनीति को कैसे देखते हैं, इस सवाल पर वे बिहार की राजनीति को समझने की बात करते हैं.

क्‍या बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी भाजपा?
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दरअसल, भाजपा का नेतृत्व 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का मन बना रहा है. वह (भाजपा) जानती है कि बिहार में अति पिछड़े वोट बैंक का महत्व क्या है. ये ईवीएम से निकलने वाला वही जिन्न है जो किसी भी पार्टी को सत्ता में बिठा सकता है. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में की गई गलती को बीजेपी दोहराना नहीं चाहती. पिछड़े वोट बैंक की अनदेखी का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा था. 2020 में पार्टी ये गलती नहीं दोहराने जा रही है और फागू चौहान की नियुक्ति इसी रणनीति का एक कदम है.

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First published: July 21, 2019, 2:58 PM IST
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