Lockdown के बाद बिहार में बदलेगा निवेश का माहौल, जिंदल सहित इन ग्रुप्स ने दिखाई दिलचस्पी

सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

Industries in Bihar: बिहार में 3516 करोड़ के 70 निवेश के प्रस्ताव के बाद बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज़ हुसैन बेहद उत्साहित हैं और उम्मीद जाहिर करते हैं कि आने वाले समय में ये और बेहतर होगा.

  • Share this:

पटना. कोरोना की वजह से पिछले दो साल से बिहार के विकास पर असर पड़ा है. रोजगार की समस्या के साथ साथ आर्थिक तौर पर भी बिहार को झटका लगा है लेकिन अब बिहार सरकार इससे निपटने के लिए प्रयास में जुट गई है. इसके तहत बिहार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए निवेश के कई प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी गई है और उम्मीद जाहिर की जा रही है कि निवेश के इस कदम से बिहार में रोजगार के साथ साथ आर्थिक हालात भी बेहतर होंगे.

बिहार में विकास आयुक्त आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में निवेश प्रोत्साहन की बैठक में 70 निवेशों के प्रस्ताव को पारित किया गया जिसमें 15 बड़े प्रस्ताव ईथनौल के क्षेत्र में हैं जो लगभग 2554 करोड़ रुपया का है. ऑक्सीजन नीति के तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद की तरफ से 5 यूनिट लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया, जो लगभग 59 करोड़ रुपया का है. इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी 21 प्रस्ताव को  हरी झंडी मिल गई है जो लगभग 456.78 करोड का है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है निवेश करने वाली कम्पनियों के स्तर को देखना. भारत की कई बड़ी कम्पनियों ने बिहार में लम्बे समय के बाद निवेश करने में रुचि दिखाई है. कुछ बड़ी कम्पनियों की नाम जो बिहार में निवेश कर सकते हैं उनमें सज्जन जिंदल ग्रुप की जेएसडब्ल्यू प्रोडक्ट लिमिटेड, हल्दीराम भुजियावाला, बायोफ्यूल्स, माइक्रोमैक्स बायो फ्युल, एलायंस इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ,बिहार डिस्ट्रिक्ट एंड वायरस इंडिया आदि शामिल हैं.

फिलहाल बिहार में 3516 करोड़ के 70 निवेश के प्रस्ताव के बाद बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज़ हुसैन बेहद उत्साहित हैं और उम्मीद जाहिर करते हैं कि आने वाले समय में बिहार में और भी बड़े निवेशक आएंगे, ये तो शुरुआत भर है. बिहार में निवेश की काफी सम्भावना है और निवेश करने वाले निवेशक भी इस बात को बखूबी जानते हैं.

कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह कहते हैं कि बिहार में कृषि के क्षेत्र में भी निवेश की बड़ी सम्भावना है, ख़ासकर फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में. बिहार में लीची, मक्का, केला, मखाना जैसे उत्पाद खूब होते हैं लेकिन फिलहाल बिहार में प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने की वजह से हमारे यहां का कच्चा माल बाहर चला जाता है जिसका फ़ायदा दूसरी कंपनिया उठा लेती हैं जबकि बिहार के किसान और बिहार सरकार को फायदा नहीं मिल पाता है. सिंह ने कहा कि हम बहुत जल्द बिहार में प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की कोशिश में हैं और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई सहूलियत भी देने की तैयारी कर रखी है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज