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बिहार सरकार के एक आदेश से संकट में अन्नदाता, जानें क्या है अरवा-उसना चावल का गणित

बिहार सरकार के एक आदेश से संकट में अन्नदाता, जानें क्या है अरवा-उसना चावल का गणित

बिहार में अरवा-उसना चावल को लेकर किसान सरकारी आदेश से सकते में हैं (सांकेतिक चित्र)

बिहार में अरवा-उसना चावल को लेकर किसान सरकारी आदेश से सकते में हैं (सांकेतिक चित्र)

Bihar Paddy Purchase Rule:  बिहार सरकार ने आदेश निकाला है कि अब वो अरवा नहीं बल्कि उसना चावल खरीदेगी. सरकार के इस फैसले के बाद बिहार के कई जिलों में पैक्स किसानों से धान नहीं खरीद रहे हैं. किसानों के धान नहीं खरीदे जाने से अब वो परेशान हैं और मदद की आस में हैं.

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पटना. पटना जिला सहित बिहार के कई जिलों के किसान इस वक़्त अरवा चावल और उसना चावल के एक सरकारी फरमान से परेशान हैं. धान अधिप्राप्ति (Paddy Purchase) का वक़्त गुजर रहा है लेकिन जिन्हें सरकार ने किसानों से धान खरीद के लिए अधिकृत किया है वो सरकार के आदेश के बाद भी किसानों से धान नहीं खरीद रहे हैं. किसान परेशान हैं तो पैक्स (Pacs) के लोगों की अपनी दलील है लेकिन सरकारी फरमान से सभी फिलहाल परेशानी में हैं.

दरअसल बिहार सरकार ने तय कर लिया है कि अब वो अरवा की जगह उसना चावल की खरीद पैक्स से करेगा जिसे किसानों से धान खरीद कर उसकी कुटाई कर सरकार को बेचना है और इसके लिए इसी साल सरकार ने इसी साल आदेश भी जारी कर दिए है. सरकार की दलील है कि उसना चावल से सेहत ठीक रहता है और बिहार की बड़ी आबादी उसना चावल ही खाती है. सरकार के इसी दलील ने किसानों की समस्या बढ़ा दी है और किसानो की फसल खेतों में पड़ी हुई. पटना जिला के बिक्रम के किसानों से जब न्यूज 18 ने बातचीत की तो उनका दर्द उभर आया.

बैजनाथ सिंह जो पेशे से किसान हैं इनकी काफी अच्छी फसल हुई है और इन्होंने उम्मीद की थी कि इस बार फसल के अच्छे और समय पर दाम मिलेंगे लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. इनका मलाल है कि हमने तो मेहनत कर धान उपजा दिया लेकिन उसकी ख़रीदारी नहीं हो रही है और धान बिकने का वक़्त भी गुजर रहा है. घर में शादी है और पैसे की सख़्त ज़रूरत है, कोई रास्ता नहीं दिखेगा तो क्या करेंगे महाजन से बेचने को मजबूर होंगे. कुछ ऐसा ही दर्द महावीर चौधरी किसान का भी है जो कहते हैं कि सरकार और पैक्स वालों की आपसी खींचतान में हमारे जैसे किसान पीस रहे हैं. सरकार को जल्द से जल्द इस पर ध्यान देना चाहिए.

इस मामले में पैक्स अध्यक्ष चिंटू सिंह कहते हैं कि सरकार का उसना चावल ख़रीदने का फैसला तुगलकी फैसला है. पैक्स वालों ने जब बड़ी-बड़ी मिलें बिठा रखी है और मिल मालिकों से उसना चावल कूटने को कहते हैं तो उनकी दलील है कि हमने पहले ही काफ़ी पैसा लगा मिल बैठाया है, जिसमें अरवा चावल की कुटाई होती है. अब इतनी जल्दी दुबारा से उसना चावल की कुटाई की मशीन लगाने में बड़ी राशि लगेगी वो इतनी जल्दी कहां से आएगी. पैक्स वाले बताते हैं कि सरकार की तरफ से अरवा चावल की कुटाई के लिए दस रुपया प्रति क्विंटल दिया जाता है जबकि उसना चावल की कुटाई में प्रति क्विंटल 135 रुपया लगता है. सरकार उतनी राशि दे नहीं रही है तो हम घाटा सह के क्यों उसना चावल की कुटाई करें.

दरअसल इस समस्या पर जब हमने बिहार के पूर्व सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि सरकार हर फैसला बिहार की जनता की हित में रखकर करती है और बिहार की अधिकांश जनता उसना चावल का सेवन करती है. हां ये सही है कि फिलहाल बिहार में उसना चावल की कुटाई मशीन की संख्या कम है लेकिन इसके लिए भी सरकार ने जिला प्रशासन को ये अधिकार दिया है कि जिस जिला में उसना चावल की कुटाई होती है वहां किसान का धान ले जाने की व्यवस्था ज़िला प्रशासन करे, जो किया भी जा रहा है.

इस मामले में पटना के DM चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि सरकार का आदेश है उसना चावल खरीदने का तो उसका पालन तो किया ही जाएगा. अगर कुछ मिलरों और पैक्स के लोगों को दिक़्क़त हो रही है तो उसका भी समाधान किया जाएगा. हम बहुत जल्द एक बैठक कर इस समस्या का भी समाधान करेंगे और किसानो को कोई समस्या नही होने देंगे.

Tags: Bihar News, Indian Farmers, Nitish Government, Paddy crop

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