पटना में रंगमंच की महिला कलाकारों ने बनाया की वुमनिया बैंड, लड़कियों ने कहा- वह आत्मनिर्भर बनेंगी

पटना में रंगमंच में महिला कलाकारों ने वुमनिया म्यूजिकल बैंड बनाया है.

पटना में रंगमंच में महिला कलाकारों ने वुमनिया म्यूजिकल बैंड बनाया है.

पटना में रंगमंच कलाकारों ने वुमनिया म्यूजिकल बैंड बनाया है, जिससे अब लड़कियां ही संगीत की महफ़िल भी सजाएंगी. म्यूजिकल बैंड की शुरुआत में कुल 15 लड़कियां शामिल हुई हैं. वह आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 4:00 PM IST
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पटना. पटना की रंगमंच में कला से अपनी पहचान बना चुकी लड़कियों ने अब वुमनिया म्यूजिकल बैंड की शुरुआत की है जिससे अब लड़कियां ही संगीत की महफ़िल भी सजाएंगी. म्यूजिकल बैंड की शुरुआत में कुल 15 लड़कियां इससे जुड़ी हैं, जिनका मकसद है अपने दम पर समाज में अपनी पहचान बनाना और आत्मनिर्भर बनना है. बतौर म्यूजिकल बैंड में ये सभी लड़कियां हारमोनियम, ढोल, नाल, झाल और डफली बजाने में जहां निपुण हैं, वहीं नृत्य में भी महारत रखती हैं.

इस बैंड के स्थापित करने का उद्देश्य न सिर्फ पुरुष बादी सोच को गलत साबित करना है बल्कि इसके जरिये लड़कियां आमदनी भी करेंगी. इसकी शुरुआत रंगकर्मी रूबी खातून ने की लेकिन देखते देखते बाकि लड़कियां इससे जुड़ गई जो कि अब बर्थडे सेलिब्रेशन से लेकर शादी व्याह तक में म्यूजिकल बैंड बजाकर आमदनी करेगी और शोभा बढ़ाएगी. लाल रंग के यूनिफॉर्म में आत्मविश्वास से लबालब होकर सभी एक साथ निकलती हैं और सुरों की महफ़िल सजाती हैं.

इन लड़कियों की सोच है कि बिहार में महिला रंगकर्मियों की माली हालत भी इससे ठीक हो जाएगी और आत्मनिर्भर भी बन सकेगी. म्यूजिकल बैंड में शामिल लड़कियों में कोई एमए है तो कोई संगीत से ग्रेजुएट और कोई छोटे पर्दे की प्रसिद्ध कलाकार भी लेकिन अब ये हर ऐसे कार्यक्रम में म्यूजिक बजाते नजर आएंगी जहां कल तक पुरुषों का राज होता था.
रूबी खातून, नृत्यांजली ठाकुर, तालांजली ठाकुर, लक्ष्मी, अंशिका समेत सभी 15 कलाकार मानती हैं कि इसे व्यावसायिक दृष्टिकोण से शुरू किया गया है. टीम लीडर रूबी खातून की माने तो रंगमंच में महिला कलाकारों की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफी कम है दूसरी वजह है कि महिला कलाकारों के लिए जहां सांस्कृतिक संस्था की भी कमी है ऐसे में अवसर भी कम मिलते हैं लेकिन अब वुमनिया म्यूजिकल बैंड के जरिये महिला कलाकारों को बेहतर अवसर भी मिल सकेगा और कला को पहचान भी मिलेगी.
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