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आखिर क्या थी तेजस्वी के गायब होने की वजह? तेजप्रताप-मीसा से नाराजगी या कुछ और!

आखिरकार सामने आए तेजस्वी, धरने पर तेजप्रताप भी साथ बैठे? लेकिन, इतने दिनों तक गायब क्यों थे? (फाइल फोटो)
आखिरकार सामने आए तेजस्वी, धरने पर तेजप्रताप भी साथ बैठे? लेकिन, इतने दिनों तक गायब क्यों थे? (फाइल फोटो)

पटना में दूध मंडी हटाने के खिलाफ धरने पर तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पहुंचे थे. साथ में बड़े भाई तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) भी पहुंच गए. तेजस्वी के सामने आने से ज्यादा चर्चा उनके अब तक गायब रहने को लेकर शुरू हो गई है.

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तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पटना में दूध मंडी हटाने के खिलाफ बुधवार को धरने पर पहुंचे थे. देर रात तक सड़क पर तेजस्वी यादव का अपने समर्थकों के साथ जमावड़ा लगा रहा. साथ में बड़े भाई तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) भी पहुंच गए. तेजस्वी सामने तो आए, लेकिन उनके सामने आने से ज्यादा चर्चा उनके अब तक गायब रहने को लेकर शुरू हो गई है. क्योंकि, पिछले हफ्ते पटना में आयोजित आरजेडी की बैठक में बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अनुपस्थित थे.

लम्बे इंतज़ार के बाद 16 अगस्त को आरजेडी की बैठक बुलाई गई थी. बैठक में पार्टी के सभी विधायकों, सभी जिलाध्यक्षों और इस बार लोकसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों को भी बुलाया गया था. उम्मीद थी विधायकों की बैठक में विधायकों के नेता भी पहुंचेंगे. लेकिन, विधायक दल के नेता और बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ही नदारद रहे.

दिल्ली में ही डेरा डाले रहे तेजस्वी यादव
मामला तूल पकड़ता देख इस बैठक को अगले दिन 17 अगस्त को भी फिर से बुला लिया गया था. इस आस में शायद पार्टी के राजकुमार तेजस्वी यादव अगले दिन पहुंच जाए, लेकिन एक बार फिर आरजेडी को धक्का लगा. एक बार फिर तेजस्वी यादव गायब रहे. सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव दिल्ली में ही रहे. पटना में पार्टी की बैठक में जाने की बजाय वह दिल्ली में ही डेरा डाले रहे.
परिवार के भीतर चल रही बातों से नाराज हैं तेजस्वी


आखिर क्या कारण है कि बार-बार तेजस्वी यादव आरजेडी की बैठक से नदारद रहते हैं. पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका को खत्म कर तेजस्वी क्या हासिल करना चाहते हैं या फिर कहानी कुछ और है? सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी के भीतर तेजस्वी का सक्रिय न होना पार्टी से ज़्यादा उनके परिवार के भीतर चल रही लड़ाई के चलते है. सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही तेजस्वी यादव परिवार के भीतर चल रही बातों से नाराज चल रहे हैं.

तेजस्वी यादव के साथ तेज प्रताप यादव (फाइल फोटो)


तेजप्रताप यादव और मीसा भारती से मधुर नहीं हैं तेजस्वी के संबंध
तेजस्वी अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव की गतिविधियों से भी खफा हैं. लोकसभा चुनाव में शिवहर और जहानाबाद की सीटों पर बड़े भाई तेजप्रताप यादव ने अपने समर्थक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. तेजप्रताप यादव ने खुलेआम पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला था, लेकिन अब तेजस्वी हर हाल में इस तरह की चीज़ों पर लगाम लागाना चाहते हैं. दूसरी तरफ तेजस्वी की बड़ी बहन और राज्य सभा सांसद मीसा भारती से भी तेजस्वी के मधुर संबंध नहीं बताए जाते हैं.

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते हैं तेजस्वी
लोकसभा चुनाव में लालू यादव की ग़ैर हाज़िरी में चुनाव प्रचार की पूरी कमान तेजस्वी के ही हाथों में थी. पार्टी के भीतर और महगठबंधन की तरफ़ से भी तेजस्वी के ख़िलाफ़ आवाज़ें उठी थीं, लेकिन इसके बावजूद तेजस्वी के ही नेतृत्व में राजद ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा. सूत्रों के मुताबिक़, तेजस्वी यादव अब चाहते हैं कि पूरी पार्टी की कमान उनके हाथों में आ जाए. यानी आरजेडी संगठन में चल रहे चुनाव के बाद कमान उनके हाथों में हो. सूत्रों के मुताबिक़, तेजस्वी यादव चाहते हैं कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनकी ताजपोशी की जाए और उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव की हरकतों पर लगाम लगे. इसके अलावा पार्टी के फ़ैसले में बड़ी बहन मीसा भारती का दख़ल भी कम हो.

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की मांग तेज
तेजस्वी यादव के पटना पहुंचने के बाद से एक बार फिर आरजेडी के भीतर से उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की मांग तेज होने लगी है. भाई वीरेंद्र समेत पार्टी के कई विधायकों और नेताओं की तरफ से यह मांग तेज कर दी गई है. ऐसा होने पर जेल में बंद लालू यादव की भूमिका तो पार्टी में कम होगी ही,  राबड़ी देवी का दख़ल भी कम होगा. यानी सलाह लालू-राबड़ी की मानी जाएगी लेकिन, अंतिम फ़ैसला तेजस्वी का ही होगा. हालांकि, लालू यादव ने तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है. लालू प्रसाद यादव ने पहले डिप्टी सीएम बनाकर फिर नेता प्रतिपक्ष बनाकर तेजस्वी का कद पार्टी में बड़ा कर दिया है.

पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं तेजस्वी
इसके बाद तेजस्वी के नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ने का फ़ैसला भी हो चुका है. फिर भी तेजस्वी इससे संतुष्ट नज़र नहीं आ रहे हैं. तेजस्वी अब पूरी तरह से पार्टी पर अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक़ लालू परिवार के भीतर इस पर अभी सहमति नहीं बन पा रही है. तेजस्वी का गायब रहना पार्टी के भीतर सक्रिय नहीं रहना, उसी खींचतान को दिखा रहा है. यह खींचतान पार्टी से ज़्यादा परिवार के भीतर की खींचतान को दिखाने वाली है.

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