बिहार में चुनावी हलचल के बीच Corona का कहर, AIIMS में एक दिन में 5 मरीजों की मौत

पटना एम्स (फाइल फोटो)
पटना एम्स (फाइल फोटो)

Bihar Covid-19 Update: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Chunav) के दूसरे फेज की वोटिंग 3 और तीसरे फेज की वोटिंग 7 नवंबर को होनी है, इससे पहले कोरोना (Coronavirus) के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.

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पटना. बिहार में पिछले डेढ़ माह से धीमी पड़ी कोरोना मरीजों (Corona Patients) की रफ्तार में एक बार फिर से तेजी आने लगी है तो मौत के आंकड़ों में भी इजाफा होने लगा है. आलम यह है कि विधानसभा चुनाव (Bihar Chunav 2020) की हलचल के बीच पटना एम्स (Patna AIIMS) में एक दिन में कोरोना के पांच मरीजों की मौत हो गई. वहीं राजधानी में दो डॉक्टर समेत 258 लोग पॉजिटिव मिले. मृतक मरीजों में नालंदा, अररिया, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और गया के निवासी शामिल थे. घटना के बाद एम्स प्रशासन जहां हरकत में आ गया है, वहीं बढ़ते संक्रमण से बिहार के लिए मुश्किलें भी बढ़ गई है.

इसके साथ ही पटना में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 35929 हो गई है हालाकि राहत की बात ये है कि इन मरीजों में  33408 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. अब भी  एक्टिव मरीजों  की संख्या 2253 पर बरकरार है. सरकार के साथ अस्पताल प्रशासन खुद हैरान है कि जिस राज्य में रिकवरी रेट 92 प्रतिशत पर पहुंच गया है वहां मौत के आंकड़ों में अचानक इजाफा कैसे होने लगा. पॉजिटिव मरीजों में दो पीएमसीएच के डाक्टर भी शामिल हैं जिन्हें पॉजिटिव होने के बाद आइसोलेशन में भर्ती किया गया है.

डॉक्टरों के अलावा पीएमसीएच का एक कर्मी भी संक्रमित पाया गया है. एम्स के बाद पीएमसीएच की बात करें तो यहां कुल 716 सैम्पल की जांच हुई है जिसमें कुल 30 लोग संक्रमित पाए गए हैं. सबसे ज्यादा पॉजिटिव मरीजों के भर्ती होने का आंकड़ा एम्स में है जहां अब भी लगभग 200  संक्रमित मरीज भर्ती हैं जबकि एनएमसीएच में 15 ,पीएमसीएच में लगभग 20 मरीज भर्ती हैं. हालाकि राहत की बात ये भी है कि भर्ती होने की तुलना में 30 प्रतिशत से ज्यादा मरीज रोज डिस्चार्ज भी हो रहे हैं.



पीएमसीएच के नोडल ऑफिसर डॉ पीएन झा की मानें तो कोविड को लेकर लोग अब भी लापरवाही बरत रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क का सही से इस्तेमाल नहीं कर रहे जिसका नतीजा है कि एक बार फिर कोविड संक्रमण बढ़ने लगा है, हालांकि सरकार ने पहले से ही सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है ताकि मरीजों के आंकड़े बढ़ने पर संसाधनों की कमी नहीं हो.
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