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CM फेस के लिए कांग्रेस ने मीरा कुमार का नाम आगे क्यों किया? पढ़ें 5 वजह
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News18 Bihar
Updated: January 21, 2020, 12:30 PM IST
CM फेस के लिए कांग्रेस ने मीरा कुमार का नाम आगे क्यों किया? पढ़ें 5 वजह
कांग्रेस ने बिहार में सीएम पद के लिए मीरा कुमार का नाम आगे किया.

कांग्रेस इस बार वर्ष 2015 के विधान सभा चुनाव से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. बीते चुनाव में महागठबंधन में कांग्रेस को 43 सीटें मिली थीं और 27 पर जीत हासिल की थी.

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पटना. बिहार में इसी साल विधान सभा चुनाव ( Bihar Assembly election) होने हैं और महागठबंधन (Grand Alliance) में शामिल दलों में सीएम फेस को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. इसमें एक नया मोड़ तब आ गया जब कांग्रेस (Congress) की ओर से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार (Meera Kumar) का नाम मुख्यमंत्री के लिए उछाला गया. सबसे खास ये है कि गठबंधन के दूसरे सहयोगी दल जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) ने भी दबी जुबान में सीएम फेस के लिए अपनी दावेदारी पेश पहले से पेश कर रखी है. ऐसे में जहां आरजेडी के लिए असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, वहीं मीरा कुमार का नाम सामने लाना कांग्रेस का बड़ा दांव माना जा रहा है.

अधिक से अधिक सीटों की दावेदारी
बिहार में कांग्रेस का यह दांव एक तरह से सीटों की दावेदारी से भी जुड़ता नजर आता है. दरअसल पार्टी इस बार वर्ष 2015 के विधान सभा चुनाव से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. बीते चुनाव में महागठबंधन में कांग्रेस को 43 सीटें मिली थीं और 27 पर जीत हासिल की थी. अब जब कांग्रेस ने दलित जाति से आने वाली मीरा कुमार का नाम आगे कर दिया है तो आरजेडी के लिए सीधा इनकार कर पाना मुश्किल होगा. ऐसे में कांग्रेस अधिक से अधिक सीटों पर समझौते के साथ आगे बढ़ेगी.

लोकसभा चुनाव से सबक ले रही पार्टी



राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस बार कांग्रेस पहले से तैयारी कर रही क्योंकि कांग्रेस बीते लोकसभा चुनाव में आरजेडी के समाने फजीहत झेल चुकी है. तब 11 सीटों पर डील हो जाने के बाद भी उसे नौ से ही संतोष करना पड़ा था. इस कारण वह इस बार पहले से ही दबाव बना रही है ताकि इस बार आरजेडी अपनी मनमानी नहीं कर पाए और कांग्रेस के लिए एक सम्मानजनक स्थिति तो जरूर सामने आए. अगर ऐसी स्थिति नहीं आएगी तो कांग्रेस दलित कार्ड खेलते हुए महागठबंधन से अलग कोई और विकल्प तलाश सकती है.

उपचुनाव से ही कांग्रेस-आरजेडी में बढ़ी दूरी
उपचुनाव के दौरान आरजेडी ने बिना अपने सहयोगियों से बात किए पांच विधान सभा सीटों में से चार सीटों से अपने उम्मीदवारों को पार्टी का सिंबल दे दिया था. इससे नाराज प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी पांचों सीटों पर लड़ने का ऐलान भी कर दिया था. हालांकि केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद कांग्रेस समस्तीपुर लोकसभा सीट और किशनगंज विधानसभा सीट लेकर ही मान गई. परिणाम हुआ कि दोनों पार्टियों के बीच दूरी बढ़ गई और कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे का सहयोग नहीं किया. फलस्वरूप कांग्रेस दोनों ही सीटें हार गई थी.

मांझी-कुशवाहा का मिल सकता है साथ
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की ओर से बिहार में 35 से 40 सीटों पर और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी भी 27 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की जा चुकी है. हालांकि आरजेडी के 150 से अधिक सीटों की दावेदारी के साथ इन दोनों ही पार्टियों के अरमान पूरे होते नहीं दिख रहे. ऐसे में अगर कांग्रेस कांग्रेस-हम-रालोसपा की तिकड़ी बनती है तो आने वाले समय में राजनीति के नए समीकरण भी देखने को मिल सकते हैं. ऐसे भी ये दोनों दल मीरा कुमार के नाम के साथ आरजेडी का साथ छोड़ कांग्रेस के साथ आ सकते हैं.

कांग्रेस की फंटफुट पर खेलने की तैयारी
बिहार कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अक्सर बिहार में फ्रंटफुट पर खेलने की बात करते हैं. दरअसल ऐसे नेताओं को अपने पुराने दिन लौटते दिख रहे हैं. तारिक अनवर जो एनसीपी से कुछ दिन पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं, मानते हैं कि कांग्रेस के पुराने दिन फिर से वापस लौटेंगे. वहीं लालू यादव की अनुपस्थिति में आरजेडी अब उतनी मजबूत नहीं रही, ऐसे में उसे ये भी लगता है कि अगर आरजेडी से सीटों पर बात नहीं बनती है तो मीरा कुमार के नाम पर महागठबंधन से अलग होकर 1990 के बाद से बैकफुट पर चली गई पार्टी के लिए फ्रंटफुट पर आने का एक मौका साबित हो सकता है.

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First published: January 21, 2020, 12:30 PM IST
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