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    यादों के झरोखों से: डीएसपी होते-होते 'एसएसपी' हो गए थे राम विलास पासवान

    केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन (फाइल फोटो)
    केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन (फाइल फोटो)

    दलित परिवार में जन्मे राम विलास पासवान ने एमए और एलएलबी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी. मजे की बात यह कि उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा क्लियर भी कर ली. उनका चयन डीएसपी पद के लिए हुआ था.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 9, 2020, 12:13 PM IST
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    पटना. ऐसा पहली बार हो रहा है जब लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) बिहार का चुनाव इसके संस्थापक राम विलास पासवान (Ram vilas Paswan) के बिना लड़ेगी. गौरतलब है कि अभी थोड़ी देर पहले तकरीबन 75 वर्षीय राम विलास पासवान का निधन हो गया. हालांकि जब राम विलास पासवान गंभीर रूप से बीमार थे तभी तय हो चुका था कि लोजपा इस बार उनके बेटे चिराग पासवान (Chirag Paswan) के नेतृत्व में बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) लड़ेगी.

    डीएसपी की नौकरी मंजूर नहीं की

    आपको बताते चलें कि राम विलास का कभी पुलिस फोर्स में जाने वाले थे. हालांकि नियति को यह मंजूर नहीं हुआ और उनके पांव राजनीति की ओर मुड़ गए. राम विलास पासवान का जन्म खगड़िया के एक दलित परिवार में हुआ था. उन्होंने एमए और एलएलबी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी. मजे की बात यह कि उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा क्लियर भी कर ली. उनका चयन डीएसपी पद के लिए हुआ था.




    संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का थामा दामन

    लेकिन ठीक इसी समय जब उनका चयन यूपीएससी में हुआ, तभी वे समाजवादी नेता राम सजीवन के संपर्क में आए और उन्होंने डीएसपी की कुर्सी छोड़कर राजनीति का रुख कर लिया. उनके तेज-तर्रार व्यक्तित्व का असर था कि संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) ने 1969 में उन्हें अलौली विधानसभा से टिकट दिया. उन्होंने चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे. अपनी इस पहली जीत के बाद पासवान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आपातकाल के बाद 1977 में वह जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव लड़े. मजे की बात यह कि उन्हें इस सीट से बंपर जीत मिली. इस जीत ने सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीतने का विश्व रिकॉर्ड बना लिया. फिर 1989 में राम विलास ने इसी सीट से अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा. बाद के दिनों में सबसे अधिक वोटों से जीतने का उनका ये रिकॉर्ड नरसिम्हा राव समेत कई दूसरे नेताओं ने तोड़ा.

    2000 में किया लोजपा का गठन

    पासवान पिछले 29 सालों में तकरीबन हर प्रधानमंत्री के साथ काम कर चुके हैं. राम विलास पासवान ने साल 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया. राम विलास पासवान पार्टी के अध्यक्ष बने और लंबे अरसे तक रहे. साल 2019 में लोकसभा चुनावों से पहले राम विलास पासवान ने अपने बेटे चिराग पासवान को पार्टी की बागडोर थमाई. देखना होगा कि अब चिराग पासवान अपने पिता की राजनीतिक विरासत को कितनी दूर तक ले जा पाते हैं. हालांकि उन्होंने फिलहाल तो नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.
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