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बिहारः राजकाज में नेताओं की दखलंदाजी पर फूटा पूर्व DGP अभयानंद का दर्द! फेसबुक पोस्ट से सियासत में उबाल

जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा और बीजेपी प्रवक्ता अरविंद सिंह का कुछ ऐसा ही कहना है. (फाइल फोटो)
जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा और बीजेपी प्रवक्ता अरविंद सिंह का कुछ ऐसा ही कहना है. (फाइल फोटो)

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद (Former DGP Abhayanand) ने FB पोस्ट में अपने पिता पूर्व डीजीपी जगदानंद सिंह और एक राजनेता के प्रसंग को लेकर लिखा कि पहले राजनेता अधिकारियों के पास काम के लिए आते थे, लेकिन फैसले के लिए किसी तरह का दबाव नहीं होता था.

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पटना. बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद (Former DGP Abhayanand) इन दिनों अपने फेसबुक पोस्ट (Facebook Post) पर अपने अतीत की यादों को उकेरने  में लगे हैं. कहां गए वो दिन नाम से उनके यह पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. अपने पोस्ट के माध्यम से पूर्व डीजीपी ने प्रत्यक्ष सुशासन की भी चर्चा की है. पूर्व डीजीपी की माने तो सच्चे अर्थों के सुशासन में राजकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका नगण्य है. स्पीडी ट्रायल और सैप जवानों की नियुक्ति कर बिहार पुलिस (Bihar Police) में अपनी सार्थक भूमिका से अमिट पहचान बनाने वाले पूर्व डीजीपी अभयानंद इन दिनों फिर से सुर्खियों में है. दरअसल, पूर्व डीजीपी ने पिछले कुछ दिनों से अपने फेसबुक पोस्ट पर कहां गए वो दिन नाम से अपने संस्मरण को शब्दों में पिरो रहे हैं. पूर्व डीजीपी ने अपने कई एपिसोड वाले पोस्ट में सुशासन की भी चर्चा की है.

अपने पिता और बिहार के पूर्व डीजीपी जगदानंद सिंह और एक राजनेता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए अभयानंद ने बताया है कि पहले के जमाने में राजनेता अधिकारियों के पास काम के मकसद से पहुंचते जरूर थे लेकिन फैसले के लिए किसी तरह का दबाव नहीं होता था. पूर्व डीजीपी ने मौजूदा शासन काल के सुशासन पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. लेकिन राजनीतिक हलके में उनके इस पोस्ट की चर्चा जोरों पर है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्र मानते हैं कि आज राजनीति का स्तर पर गिरावट आई है. भले ही पूर्व डीजीपी इस मामले में खुलकर नहीं बोल रहे. वैसे सत्तापक्ष के नेताओं का दावा है कि बिहार में आज सच्चे अर्थों में सुशासन है क्योंकि खुद प्रदेश के  मुखिया नीतीश कुमार यह बार-बार दोहराते रहे हैं कि हम न तो किसी को बचाते हैं और न ही फसाते हैं. यानी कुल मिलाकर बिहार में राजनेताओं की भूमिका आज भी तटस्थ है.

राजनीतिक माहौल का स्वरूप पहले से कई मायनों में बदला है
जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा और बीजेपी प्रवक्ता अरविंद सिंह का कुछ ऐसा ही कहना है. बहरहाल,सत्ता पक्ष और विपक्ष के अपने तर्क अपनी अपनी जगह सही हो सकते हैं, लेकिन पूर्व डीजीपी के अनुभव ने इस बात को दर्शाने की कोशिश की है कि माहौल भले ही कोई भी हो लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल का स्वरूप पहले से कई मायनों में बदला है. लोग भले ही लोग अपने-अपने दावे और नजरिये से इसे पहले की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर या फिर गिरावट के तौर पर देखते हो.
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