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बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सहरसा जेल में कर दी है बेमियादी भूख हड़ताल, जानें क्यों..

हत्या के दोषी पूर्व सांसद आनंद मोहन ने जेल में बेमियादी भूख हड़ताल कर दी है. (फाइल फोटो)

गोपालगंज के पूर्व डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के जुर्म में सहरसा जेल में सजा काट रहे बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन बेमियादी अनशन पर बैठ गए हैं. उनका कहना है कि जेल की मूलभूत समस्याएं जबतक दूर नहीं की जाएंगी, उनका अनशन जारी रहेगा.

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पटना. गोपालगंज के पूर्व डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के जुर्म में सहरसा जेल में सजा काट रहे बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन बेमियादी अनशन पर बैठ गए हैं. जेल की मूलभूत समस्याओं को लेकर किए जा रहे इस अनशन में अन्य कैदी भी शामिल हैं. आनंद मोहन ने ये भी साफ कर दिया है कि जब तक जेल में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती हैं, अनशन जारी रहेगा.

गोपालगंज के पूर्व डीएम जी. कृष्णैया की हत्या में लोअर कोर्ट ने आनंद मोहन को फांसी की सजा सुनाई थी. लोअर कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था. हालांकि पूर्व सांसद आनंद मोहन ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था.

आपको बता दें कि आनंद मोहन के परिजन कोरोना की वजह से आनंद मोहन की सेहत को लेकर लगातार चिंता जताते रहते हैं. साथ ही आनंद मोहन की रिहाई को लेकर मुहिम भी छेड़ रखी है. गौरतलब है की आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद राजद से विधायक है.

सहरसा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आनंद मोहन ने अपनी मांगों को लेकर कारा महानिरीक्षक को पत्र भी लिखा है. इस पत्र की प्रति उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी है. पत्र में उन्होंने जो प्रमुख मांगें रखी हैं, वे ये हैं -
कोरोना संकट के कारण पिछले डेढ़ साल से हम बंदियों की मुलाकात और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही पर पूर्णतः रोक है. 'ई' मुलाकात और दूरभाष पर भी नियमित बातचीत की व्यवस्था नहीं है. इसकी व्यवस्था की जाए.
जबकि कोरोना संकट के नाम पर खाने-पीने और जरूरी सामानों के अंदर आने पर रोक है, तो ऐसे में कारा हस्तक के अनुसार निर्धारित हम बंदियों की 'डाइट' में किसी प्रकार की अनियमितता कहीं से भी उचित नहीं है, इसकी व्यवस्था की जाए.
भीषण गर्मी और क्षमता से अधिक बंदियों के बावजूद वॉर्डों में पर्याप्त पंखे नहीं हैं, जो हैं वे भी खराब पड़े हैं. यहां तक कि अन्य वर्षों की तरह हाथ पंखे और मिट्टी के घड़ों की आपूर्ति भी नहीं की गई है. जेल में वायरिंग भी काफी पुरानी है. जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसे दुरुस्त करवाया जाए.
जेल में कैदियों की क्षमता के मुकाबले बहुत कम शौचालय हैं. जो हैं, उनकी स्थिति भी अत्यंत खराब है. अशक्त बंदियों के लिए कमोड वाले लैट्रिन की व्यवस्था हो.
पिछले वर्षों कई-कई अनशनों और आश्वासनों के बावजूद इस जेल में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई. जबकि प्रदेश के अन्य जेलों में इसके लिए 'एक्वा गार्ड' लगाए जा चुके हैं.
समुचित दवा और चिकित्सा का घोर अभाव है, जिसकी वजह से कैदियों को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है.
पाकशाला की स्थिति जर्जर है. टूटे छत से धूल, गंदगी और वर्षा का पानी पाकशाला में प्रवेश करता है. क्षमता से अधिक बंदियों के बावजूद खाना पकाने का बर्तन और खाना खाने के बर्तन की भारी कमी है.
काम करने वाले बंदियों को पारिश्रमिक नहीं दी गई और कैदियों को मिलने वाले परिहार से भी कैदी वर्षों वंचित हैं. खेलकूद, मनोरंजन की कोई व्यवस्था नहीं है. 'जिम' के भी सामान खराब पड़े हैं.
वर्षों से वॉर्डों में खिड़कियों के पल्ले नहीं हैं. परिणाम स्वरूप आंधी, बारिश, गर्मी में लू, जाड़े में ओस-पाले से बंदियों को भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
वैश्विक महामारी 'कोविड-19' के मद्देनजर सहरसा, मधेपुरा, सुपौल जिलों के लिए जिस बीरपुर उपकरा को अस्थाई तौर पर 'क्वारंटाइन जेल' बनाया गया है, वह पूरी तरह 'यातना गृह' में तब्दील हो चुका है. कई-कई शिकायतों के बावजूद वहां के हालात में अब तक कोई परिवर्तन नहीं है.
तय समय के बीत जाने के बाद भी पुराने बंदियों को कोरोना का दूसरा डोज और नए आए बंदियों को महीनों बाद भी पहला डोज नहीं मिला है.

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