तीन सीटों के लिए 5 दावेदार, सवर्णों को लेकर टेंशन में है बिहार BJP
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तीन सीटों के लिए 5 दावेदार, सवर्णों को लेकर टेंशन में है बिहार BJP
बिहार कोटे से राज्यसभा और विधान परिषद के लिए चुनाव होने हैं (फाइल फोटो)

बिहार बीजेपी (BJP) को राज्यसभा चुनाव (Rajyasabha)और विधान परिषद के चुनाव में सवर्ण धर्म संकट होने वाला है. भूमिहार और कायस्थ से खाली होने वाली सीट पर किसे दुबारा भेजे ये संकेत है क्योंकि आने वाले महीनों में विधानसभा का भी चुनाव होना है.

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पटना. बिहार में होने वाले विधान परिषद और राज्यसभा के चुनाव (Rajyasabha Election) में बीजेपी (BJP) की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. यह मुश्किल कुछ और नहीं बल्कि जाति को लेकर है. दरअसल जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें से सभी सवर्ण (Forward) हैं. ऐसे में कम सीटों में बीजेपी के कैडर वोट कहे जाने वाली इस बिरादरी को खुश करना पार्टी के लिए चुनौती बन रहा है.

किस उम्मीदवार को मैदान में उतारें ?

बिहार से बीजेपी की राज्यसभा की 2 सीटें खाली हो रही हैं. एक डॉक्टर सीपी ठाकुर की जो जाति से भूमिहार हैं और दूसरी सीट आरके सिन्हा की जो जाति से कायस्थ हैं. बिहार विधान परिषद से विधानसभा कोटे से 3 सीटें खाली हो रही हैं. बीजेपी के कृष्ण कुमार सिंह जाति से भूमिहार, राधा मोहन शर्मा जाति से भूमिहार और संजय प्रकाश मयूख जाति से कायस्थ हैं. इनका स्वर्ण होना ही बीजेपी के लिए परेशानी का सबब है.



पांच की बजाय तीन चेहरों को देना है मौका



इन पांचों सीटों पर विधानसभा के विधायक वोट करेंगे. ऐसे में बीजेपी के सामने एक बड़ा जाति धर्म सामने आ रहा है. सवर्णों की राजनीति करने वाली बीजेपी दुविधा में है कि आखिर इन सीटों पर दोबारा किसको सदस्य बनाया जाए. हालांकि राज्यसभा से बीजेपी के पास मात्र एक सीट है और विधान परिषद से बीजेपी के पास मात्र दो हैं. बीजेपी नेता और कृषि मंत्री प्रेम कुमार कहते हैं कि जो पार्टी तय करेगी वो स्वीकार्य है.

पार्टी जो निर्णय ले वो सर्वमान्य

इस बार बीजेपी के तरफ से विधान परिषद में 5 से खाली हो रही है जिसमें एक स्नातक और एक शिक्षक कोटे से है जहां चुनाव होने हैं. बाकी 3 सीटों पर विधानसभा सदस्य गए थे जिसमें 2 ही सीट बीजेपी के नसीब में हैं. वहीं राज्यसभा से 2 सीटें खाली हो रही है. इसमें बीजेपी को मात्र 1 सीट ही मिलेगी, लेकिन बीजेपी नेता कहते हैं कि पार्टी जो निर्णय ले वो सर्वमान्य है.

आरजेडी का कटाक्ष

आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी इस पूरे समीकरण को बीजेपी की मानसिकता मानते हैं. वो कहते हैं कि बीजेपी ने पिछड़ों के लिए कभी कुछ नहीं किया है तो वो सदस्य के तौर पर कैसे पिछड़ों को सदन में भेजेंगे. बीजेपी के लिए इस बार की राह तय करना आसान नहीं है.

एक्सपेरिमेंट के मूड में नहींं है बीजेपी

आने वाले कुछ महीने में विधानसभा का चुनावी विगुल बज जाएगा. ऐसे में यदि बीजेपी कोई दूसरा एक्सपेरिमेंट करती है तो उसे नुकसान होगा. हालांकि बीजेपी इस नाजुक मौके पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है.

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