एक क्लर्क से बिहार के मुख्यमंत्री बनने तक, जानें कैसा रहा है जीतनराम मांझी का राजनीतिक सफर

मांझी ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था, लेकिन 1990 में कांग्रेस के गिरावट के दौर में वह जनता दल में चले गए थे.  (फाइल फोटो)
मांझी ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था, लेकिन 1990 में कांग्रेस के गिरावट के दौर में वह जनता दल में चले गए थे. (फाइल फोटो)

साल 1980 में जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया और राजनीति में कूद गए. वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर फतेहपुर क्षेत्र से चुनाव जीतकर वे विधानसभा पहुंचे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 2:32 PM IST
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पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव ( Bihar Assembly Elections 2020 ) को लेकर बिगुल बज चुका है. अधिकांश राजनीतिक दलों के बीच सीटों के बंटवारे भी लगभग हो गए हैं. सभी पार्टियां धीरे-घीरे उम्मीदवारों के नामों का ऐला भी करने लगे हैं. वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के मुखिया जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने अपनी सभी सात सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है. खास बात यह है कि वे महागठबंधन से नाता तोड़कर फिर से एनडीए में आ गए हैं. उनकी पार्टी जदयू के खाते से मिले 7 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इन सात सीटों में से तीन प्रत्याशी उनके परिवार के ही हैं. ऐसे में जीतनराम मांझी के ऊपर परिवारवाद के सवाल भी उठने लगे हैं. बता दें कि जीतनराम मांझी ने साल 2015 का विधानसभा चुनाव एनडीए (NDA) के साथ ही लड़ा था. लेकिन फिर वे बीच में महागठबंधन (Grand Alliance) में चले गए थे. लेकिन हवा का रूख भांपते हुए उन्होंने फिर से राजग में वापसी कर ली है. यही वजह है कि अब जीतनराम मांझी को बिहार का नया मौसम वैज्ञानिक कहा जाने लगा है. तो आइए जानते हैं मांझी के अब तक के राजनीतिक सफर के बारे में.

जीतनराम मांझी ने 80 के दशक में राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. वे कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू की राज्य सरकारों में मंत्री रह चुके हैं. छह बार विधायक रहे मांझी पहली बार कांग्रेस की चंद्रशेखर सिंह सरकार में 1980 में मंत्री बने थे. उसके बाद बिंदेश्वरी दुबे की सरकार में मंत्री रहे. फिर उन्होंने जदयू का दामन धाम लिया. इसके बाद साल 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाकर पूरे देश को चौंका दिया था. लेकिन 8 महीने के बाद जदयू ने उन्हें सीएम पद से हटा दिया. इसके बाद मांझी ने खुद की पार्टी बनाई और बीजेपी और महागठबंधन से हाथ मिलाया, लेकिन दोनों खेमे के साथ वे कामयाब नहीं हो पाए. अब जेडीयू के खाते से चुनाव लड़ रहे हैं.

कांग्रेस पार्टी से की राजनीति की शुरुआत
जीतनराम मांझी का जन्म 6 अक्टूबर 1944 को गया जिले के खिजरसराय के महकार गांव में एक मुसहर जाति के परिवार में हुआ था. उनके पिता रामजीत राम मांझी एक खेतिहर मजदूर थे. जीतन राम मांझी बचपन में पढ़ाई के साथ-साथ खेत में मजदूरी का काम भी करते थे. अगर जीतन राम मांझी की शिक्षा की बात करें तो 1962 में उच्च विद्यालय में शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 1967 में गया कॉलेज से इतिहास विषय से स्नातक की डिग्री हासिल की. इसके बाद साल 1968 में मांझी को डाक एवं तार विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गई. यहां पर उन्होंने 12 साल डाक विभाग में नौकरी की. फिर साल 1980 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी. इसके बाद कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया और राजनीति में कूद गए. वर्ष 1980 में कांग्रेस की टिकट पर फतेहपुर क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद मांझी चंद्रशेखर सिंह की सरकार में तुरंत मंत्री बन गए थे. इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.
छह साल बाद ही वह लालू यादव के साथ हो लिए


मांझी ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था, लेकिन 1990 में कांग्रेस के गिरावट के दौर में वह जनता दल में चले गए थे. छह साल बाद ही वह लालू यादव के साथ हो लिए और राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए. 2005 में जब जेडीयू का कुनबा बढ़ा और उसके सत्ता में आने के आसार बने तो वह जेडीयू में चले आए. फिर कालांतर में वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारण जनता दल में रहते हुए मुसहर जाति से पहले मुख्मंत्री बने. 20 मई 2014 को पद संभालने के बाद 20 फरवरी 2015 तक वे मुख्यमंत्री रहे. 2015 के सत्ता संघर्ष में नीतीश कुमार से मात खाने के बाद उन्होंने हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा नामक अपनी पार्टी बना ली. इसके बाद महागठबंधन में शामिल हो गए. हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को बुरी हार झेलनी पड़ी लेकिन राजद की मदद से अपने बेटे संतोष सुमन को एमएलसी बनवाने में सफल रहे. अब चुनावों के ऐन पहले मांझी एनडीए में शामिल हुए हैं.
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