मोदी कैबिनेट: साधारण कार्यकर्ता से मंत्री बनने तक, ऐसा है नित्यानंद राय का सफर
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मोदी कैबिनेट: साधारण कार्यकर्ता से मंत्री बनने तक, ऐसा है नित्यानंद राय का सफर
नित्यानंद राय (फाइल फोटो)

बिहार बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय को मोदी सरकार पार्ट -2 में पहली बार मंत्री बनाया गया है. अमित शाह के बेहद करीबी माने जाने वाले नित्यानंद राय को गृह राज्य मंत्री बनाया गया है.

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बिहार बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय को मोदी सरकार पार्ट -2 में पहली बार मंत्री बनाया गया है. अमित शाह के बेहद करीबी माने जाने वाले नित्यानंद राय को गृह राज्य मंत्री बनाया गया है. साल 2016 में बीजेपी का अध्यक्ष बनने के बाद बीते ढाई वर्षों में उन्होंने गुटों में बंटी बिहार बीजेपी को भी आम सहमति के मंच पर ला खड़ा कर दिया. वैसे नित्यानंद राय का उसूलों और पक्के इरादे के साथ राजनीति का सफर भी बेहद दिलचस्प है.

वर्ष 2016 में जब प्रदेश का अध्यक्ष बदलना था तो विधायकों से लेकर सांसदों तक कई नामों की चर्चा हुई, लेकिन अमित शाह के मापदंडों पर सिर्फ राय ही खरे उतर पाए. संघर्षशील पृष्ठभूमि वाले गंगा पार के युवा नेता राय को बीजेपी ने कमान सौंप दी थी.

राय के राजनैतिक सफर की शुरुआत 1981 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में हुई. हाजीपुर के ही राजनारायण कॉलेज में इंटर की पढ़ाई के दौरान वे नियमित संघ की शाखाओं में जाते थे. उनकी नेतृत्व क्षमता की वजह से संघ ने उन्हें जल्द ही 1986 में हाजीपुर का तहसील कार्यवाह बना दिया. उसके बाद तो वे संगठन की हर सीढ़ी चढ़ते चले गए.



1990 की शुरुआत तक संघ से पदमुक्त होकर वे सीधे बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव बनाए गए. 1995-96 में युवा मोर्चा के महासचिव और 1999 में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने. पहली बार में ही 2000 के विधानसभा चुनाव में हाजीपुर से जीत हासिल की.
वे वहां से लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते और दो बार उसी सीट से मंडल स्तर के ऐसे कार्यकर्ता को चुनाव जितवाया, जो जाति समीकरण में कहीं भी फिट नहीं बैठता था. 2015 के विपरीत माहौल में भी पार्टी ने यह सीट जीती. राय 2014 के लोकसभा चुनाव में उजियारपुर लोकसभा सीट से सांसद बने और इस बार भी उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को बड़े अंतर से पराजित किया.

नित्यानंद राय से जुड़ा एक वाकया बेहद दिलचस्प है. वर्ष 1990 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की राम रथयात्रा बिहार में लोकतंत्र की जन्मभूमि कहे जाने वाले हाजीपुर पहुंचने वाली थी. इसे रोकने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद आमादा थे. उन्होंने ऐलान भी कर दिया था कि रथ को गांधी सेतु (हाजीपुर और पटना के बीच बना पुल) पार नहीं करने दिया जाएगा.

उसी वक्त संघ की पृष्ठभूमि से जुड़ा बीजेपी का युवा चेहरा उभर रहा था. उसने ताकतवर लालू यादव की सत्ता को चुनौती दी और ऐलान किया कि राम रथ यात्रा को हाजीपुर में नहीं रोकने दिया जाएगा. महज 23 वर्ष के नित्यानंद राय ने तब महापंचायत बुलाकर ऐसा जनसमर्थन जुटाया कि सरकार आडवाणी का रथ हाजीपुर में रोकने का साहस नहीं जुटा पाई. नित्यानंद राय ने हाजीपुर में आडवाणी की जनसभा भी कराई.

इस प्रकरण की वजह से नित्यानंद राय की पहचान राजनीति की शुरुआत में ही दबंग और निर्भीक कार्यकर्ता की बन गई. 52 वर्ष के हो चुके राय के करियर में तब अहम मोड़ आया जब 30 नवंबर, 2016 को तड़के बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव रामलाल का फोन आया और उन्हें बिहार में बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.

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