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AIMIM की जीत पर बोले गिरिराज- ओवैसी की जिन्नावादी सोच, कांग्रेस बोली- दोनों उन्मादी चाहते हैं ध्रुवीकरण

News18 Bihar
Updated: October 25, 2019, 2:24 PM IST
AIMIM की जीत पर बोले गिरिराज- ओवैसी की जिन्नावादी सोच, कांग्रेस बोली- दोनों उन्मादी चाहते हैं ध्रुवीकरण
गिरिराज सिंह ने AIMIM की किशनगंज में जीत को समाजिक समरसता के लिए खतरा बताया.

जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने किशनगंज में AIMIM की पार्टी की जीत पर सवाल उठाते हुए कहा, 'ओवैसी की पार्टी अतिवादी विचारों के लिए जानी जाती है, उसका जीतना धर्मनिरपेक्ष दलों की गलत राजनीति का नतीजा है और बिहार की धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए ये शुभ नहीं है.'

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पटना. बिहार में कोई एक सीट कांग्रेस के लिए सबसे अधिक सेफ मानी जाती थी तो वह किशनगंज की सीट थी. यही नहीं धर्मनिरपेक्ष राजनीति करने का दावा करने वाली कोई भी पार्टी इसे अपने लिए सबसे सुरक्षित मानती थी. लेकिन यहां के बिहार विधानसभा उपचुनाव के नतीजे ने सारे सियासी समीकरण ध्वस्त कर दिए और असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) ने अब बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में शानदार जीत दर्ज की. इस चुनाव नतीजे की सबसे खास बात ये रही कि इस सीट पर आरजेडी-कांग्रेस एक साथ थी तो बीजेपी-जेडीयू की संयुक्त ताकत थी. बावजूद इसके अकेले AIMIM ने दोनों ही गठबंधन दलों को धराशायी कर दिया.

जाहिर है ये सीमांचल की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत हैं. अब इसे बीजेपी बिहार में सामाजिक समरसता के लिए खतरा बता रही है तो जेडीयू इसे बिहार में धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए शुभ नहीं मान रही है.

गिरिराज सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, बिहार के उपचुनाव में सबसे खतरनाक परिणाम किशनगंज से उभर के आया है. ओवैसी की पार्टी AIMIM जिन्ना की सोच वाले है, यें वंदे मातरम से नफरत करते हैं, इनसे बिहार की सामाजिक समरसता को खतरा है. बिहारवासियों को अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.

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हालांकि कांग्रेस इसे बीजेपी-ओवैसी की मिलीभगत बता रही है. पार्टी के प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्र ने कहा, गिरिराज और ओवैसी दोनों में अंडरस्टैंडिंग है. दोनों ही जहरीले भाषण करते हैं. दोनों उन्मादी ध्रुवीकरण चाहते हैं.

वहीं, जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने किशनगंज में AIMIM की पार्टी की जीत पर सवाल उठाते हुए कहा, 'ओवैसी की पार्टी अतिवादी विचारों के लिए जानी जाती है, उसका जीतना धर्मनिरपेक्ष दलों की गलत राजनीति का नतीजा है और बिहार की धर्म निरपेक्ष राजनीति के लिए ये शुभ नहीं है.'

बता दें कि सीमांचल के चार जिले अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया से चार सांसद और करीब 30 विधायक चुन कर आते हैं. ऐसे में ओवैसी की पार्टी की इंट्री मिल जाने से इस पूरे इलाके में खास तरह की राजनीति को जगह मिल सकती है.

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First published: October 25, 2019, 2:04 PM IST
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